हिमालय क्रांति पार्टी के स्थापना दिवस पर सरकार पर तीखा हमला?लोकायुक्त को जानबूझकर कमजोर किया गया, भ्रष्टाचार को मिला संरक्षण” — वक्ताओं के आरोप

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पौड़ी,उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। हिमालय क्रांति पार्टी के तृतीय स्थापना एवं संकल्प दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने राज्य सरकारों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लोकायुक्त को जानबूझकर निष्क्रिय रखा गया, ताकि सत्ता और व्यवस्था में बैठे लोग जवाबदेही से बच सकें।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


कार्यक्रम में मौजूद नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने एक स्वर में कहा कि उत्तराखंड में भ्रष्टाचार अब अपवाद नहीं, बल्कि व्यवस्था का हिस्सा बनता जा रहा है, और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण स्वतंत्र और शक्तिशाली लोकायुक्त की अनुपस्थिति है।
“25 साल बाद भी लोकायुक्त विहीन है उत्तराखंड”
वक्ताओं ने कहा कि राज्य गठन के समय जनता से स्वच्छ, पारदर्शी और जवाबदेह शासन का वादा किया गया था, लेकिन आज हालात यह हैं कि—
वर्ष 2013 के बाद से उत्तराखंड में कोई लोकायुक्त नियुक्त नहीं हुआ
लोकायुक्त कार्यालय मौजूद है, बजट भी है, लेकिन संस्था का मुखिया नहीं
यह स्थिति प्रशासनिक भूल नहीं, बल्कि राजनीतिक साजिश का परिणाम है
वक्ताओं का आरोप था कि सत्ता में बैठे लोग नहीं चाहते कि मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक जांच के दायरे में आएं, इसलिए लोकायुक्त को लगातार टाला जा रहा है।
खंडूड़ी सरकार के मजबूत लोकायुक्त का जिक्र
सभा के दौरान वक्ताओं ने 2011 में भुवन चंद्र खंडूड़ी सरकार द्वारा पारित मजबूत लोकायुक्त कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि—
उस कानून में मुख्यमंत्री सहित सभी जनप्रतिनिधियों को लोकायुक्त के दायरे में लाया गया था
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद भी उसे राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में लागू नहीं किया गया
सत्ता बदलते ही लोकायुक्त को कमजोर कर दिया गया
वक्ताओं ने कहा कि यह साबित करता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई सिर्फ विपक्ष में रहकर याद आती है।
“भ्रष्टाचार के दुष्परिणाम आम आदमी भुगत रहा”
हिमालय क्रांति पार्टी के नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड जैसे सीमित संसाधनों वाले राज्य में भ्रष्टाचार का सीधा असर—
सड़कों की गुणवत्ता
स्वास्थ्य सेवाओं
शिक्षा व्यवस्था
भर्तियों और आवास योजनाओं
पर पड़ता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हर योजना में कमीशनखोरी और दलाली की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन जांच की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है।
युवाओं और आंदोलनकारियों की चिंता
कार्यक्रम में मौजूद युवाओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि—
बेरोजगारी और पलायन के मुद्दे पर भी भ्रष्टाचार हावी है
भर्तियों में अनियमितताओं के आरोप लगातार लगते रहे हैं
लेकिन दोषियों पर कार्रवाई के बजाय मामले दबा दिए जाते हैं
युवाओं ने लोकायुक्त को राज्य आंदोलन की मूल भावना से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि यह केवल कानूनी नहीं, बल्कि नैतिक और सामाजिक आवश्यकता है।
रजत जयंती वर्ष में सरकार से सवाल
वक्ताओं ने आगामी रजत जयंती वर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि इस अवसर पर भी—
लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं होती
उसे वास्तविक शक्तियां नहीं दी जातीं
तो यह उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के सपनों के साथ धोखा होगा।
सभा में यह भी कहा गया कि घोषणाओं और विज्ञापनों से नहीं, बल्कि संस्थागत सुधारों से ही भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकता है।
जनसंकल्प: लोकायुक्त के लिए जनदबाव
हिमालय क्रांति पार्टी ने कार्यक्रम के अंत में यह संकल्प लिया कि—
लोकायुक्त की नियुक्ति तक संघर्ष जारी रहेगा
मुख्यमंत्री सहित सभी संवैधानिक पदों को इसके दायरे में लाने की मांग उठेगी
भ्रष्टाचार के मामलों को जनआंदोलन के रूप में सामने लाया जाएगा
वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक जनता दबाव नहीं बनाएगी, तब तक सत्ता लोकायुक्त जैसे असहज विषय से बचती रहेगी।

हिमालय क्रांति पार्टी के स्थापना दिवस का यह कार्यक्रम केवल संगठनात्मक उत्सव नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ एक राजनीतिक चेतावनी के रूप में सामने आया।
यह सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया है ।अध्यक्ष, हिमालय क्रांति पार्टी अजय बिष्ट, मुख्य अतिथि उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संपादक अवतार सिंह विष्ट, संचालन दिनेश बिष्ट,महासचिव, लाल सिंह बिष्ट, पौड़ी जिला उपाध्यक्ष रविन्द्र जुयाल, शंकर दत्त, अनिल जोशी, कन्हैया लाल डबरियल,शिवा नन्द नौटियाल ने सभा को संबोधित किया

सभा में पार्टी के उपस्थित सदस्य  एवं पदाधिकारी कुलवंत सिंह नेगी
हंसा दत्तू बेलवाल
लक्ष्मण सिंह रावत
देवेन्द्र सिंह
विजेश चन्द्र बिष्ट
राम सिंह रावत
ए.एस. मेहरा
बिरेन्द्र सिंह बंगारी
महेश चन्द्र डौ
अजय बिष्ट
दिनेश सिंह रावत –
महेश आर्य
महेश उपाध्याय –आदि उपस्थित थे

अजय बिष्ट
अवतार सिंह विष्ट
दिनेश बिष्ट
लाल सिंह बिष्ट
रविन्द्र जुयाल
शंकर दत्त
अनिल जोशी
कन्हैया लाल डबरियल
शिवानंद नौटियाल
कुलवंत सिंह नेगी
हंसा दत्तू बेलवाल
लक्ष्मण सिंह रावत
देवेन्द्र सिंह
विजेश चन्द्र बिष्ट
राम सिंह रावत
ए. एस. मेहरा
बिरेन्द्र सिंह बंगारी
महेश चन्द्र डौ
दिनेश सिंह रावत
महेश आर्य
महेश उपाध्याय
मनोज जुयाल (फिल्म डायरेक्टर, उत्तराखंड)
विपिन कुकरेती
बृजेश शर्मा (दिल्ली)
संजय कुमार (दिल्ली)
गब्बर सिंह चौहान (पौड़ी)
पूजा चमोली
रेखा बालोनी
भारतीय बिष्ट
ग्रुप सिंह भंडारी
संजय सिंह
सत्येंद्र सिंह रावत
अरविंद सिंह रावत
सुरेश चमोली
देवेंद्र गोसाई
पपेंद्र सिंह रावत
मनमोहन
गौरव
रमेश सिंह बेलवाल  की उपस्थिति में ज्वलंत मुद्दों पर हुई चर्चा


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