

उत्तराखंड की न्यायिक परंपरा में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। Bar Council of Uttarakhand के सदस्य के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता श्री डी.के. शर्मा का निर्वाचित होना केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे विधि समुदाय के लिए गौरव का क्षण है। विशेष रूप से तब, जब वे चुनाव में शीर्ष स्थान पर निर्वाचित हुए — यह उनके प्रति अधिवक्ताओं के विश्वास और सम्मान का स्पष्ट प्रमाण है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी )
नैनीताल उच्च न्यायालय रुद्रपुर जिला एवं सत्र न्यायालय में वर्षों से सक्रिय और अपने सधे हुए तर्क, स्पष्ट दृष्टिकोण तथा अनुशासित कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले डी.के. शर्मा ने हमेशा बार की गरिमा को सर्वोपरि रखा है। अधिवक्ता हरबंस चावला (चैंबर नं. 49) और अधिवक्ता रेखा रानी (मुस्कान चावला) सहित अनेक साथियों ने जिस आत्मीयता और गर्व के साथ उन्हें शुभकामनाएँ दी हैं, वह इस बात का संकेत है कि यह जीत केवल मतों की नहीं, बल्कि विश्वास की जीत है।
बार काउंसिल केवल एक संवैधानिक संस्था नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं के अधिकारों, अनुशासन और पेशे की नैतिकता की संरक्षक है। ऐसे में एक अनुभवी और संतुलित व्यक्तित्व का उसमें शामिल होना, आने वाले समय में नीतिगत निर्णयों को अधिक परिपक्व दिशा दे सकता है। आज जब न्यायिक व्यवस्था पर पारदर्शिता, जवाबदेही और पेशेवर आचरण को लेकर कई सवाल उठते हैं, तब बार काउंसिल की भूमिका और भी अहम हो जाती है।
यह भी उल्लेखनीय है कि उनके समर्थन में जो अपील की गई — “अनुभव, ईमानदारी और बार की गरिमा के लिए” — वह केवल एक चुनावी नारा नहीं, बल्कि एक मूल्य-आधारित प्रतिबद्धता का संदेश है। अधिवक्ताओं के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बदलते पेशेवर परिवेश में यदि नेतृत्व अनुभव और नैतिकता के संतुलन पर खड़ा हो, तो पूरी व्यवस्था को स्थिरता मिलती है।
डी.के. शर्मा की यह सफलता युवा अधिवक्ताओं के लिए भी प्रेरणास्रोत है। यह बताती है कि निरंतर परिश्रम, सादगी और पेशे के प्रति निष्ठा अंततः सम्मान में परिवर्तित होती है। न्यायालय की गरिमा केवल निर्णयों से नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं के आचरण और नेतृत्व से भी निर्मित होती है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि बार काउंसिल जैसे मंच केवल औपचारिक निकाय बनकर न रह जाएँ, बल्कि अधिवक्ताओं के प्रशिक्षण, कल्याण, अनुशासन और पेशे की प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करने में सक्रिय भूमिका निभाएँ। उम्मीद की जानी चाहिए कि डी.के. शर्मा जैसे वरिष्ठ और संतुलित अधिवक्ता इस दिशा में ठोस पहल करेंगे।
अंततः, यह निर्वाचन एक संदेश देता है — विधि क्षेत्र में सम्मान पद से नहीं, बल्कि सिद्धांतों से अर्जित होता है। और जब सिद्धांतों पर खड़ा व्यक्ति नेतृत्व की भूमिका में आता है, तो संस्थाएँ मजबूत होती हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता डी.के. शर्मा को इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ। उत्तराखंड की विधिक परंपरा उनके अनुभव और मार्गदर्शन से और अधिक सशक्त हो — यही अपेक्षा
Uttarakhand Rajya Nirman Andolankari Parishad के अध्यक्ष अवतार सिंह बिष्ट एवं प्रदेश के समस्त राज्य आंदोलनकारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री डी.के. शर्मा को Bar Council of Uttarakhand का सदस्य निर्वाचित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
यह गौरवपूर्ण उपलब्धि उनके लंबे अनुभव, अटूट निष्ठा और विधि जगत के प्रति समर्पण का सशक्त प्रमाण है। न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, अधिवक्ताओं के हितों की सजग पैरवी और बार की गरिमा को बनाए रखने की उनकी निरंतर प्रतिबद्धता उन्हें इस दायित्व के लिए अत्यंत योग्य बनाती है।
हम उनके उज्ज्वल, सफल और प्रेरणादायी कार्यकाल की कामना करते हैं।




