

आसमान का संतुलन और कूटनीति की कसौटी: दक्षिण एशिया में बढ़ते तनाव पर भारत की रणनीतिक सतर्कता
दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया में इन दिनों जो घटनाक्रम तेज़ी से बदल रहे हैं, उन्होंने वैश्विक राजनीति को असामान्य मोड़ पर ला खड़ा किया है। ईरान, इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ता टकराव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बना हुआ है। इसी बीच अफगानिस्तान–पाकिस्तान सीमा पर झड़पों और दावों–प्रतिदावों ने क्षेत्रीय अस्थिरता को और जटिल कर दिया है।
इन हालातों के बीच भारतीय वायु सेना द्वारा 5 से 12 मार्च के बीच दक्षिणी सेक्टर में बड़े सैन्य अभ्यास हेतु NOTAM (Notice to Airmen) जारी करना सामरिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। यह कदम औपचारिक रूप से नियमित सैन्य अभ्यास बताया गया है, किंतु समय-परिस्थिति के संदर्भ में इसकी व्याख्या रणनीतिक संदेश के रूप में भी की जा रही है।
भारतीय वायु सेना का NOTAM: संदेश क्या है?

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
NOTAM जारी करना अंतरराष्ट्रीय उड्डयन व्यवस्था का सामान्य और अनिवार्य प्रोटोकॉल है। इसका उद्देश्य नागरिक विमानों को सूचित करना होता है कि निर्दिष्ट क्षेत्र में सैन्य गतिविधि होगी और उस एयरस्पेस से दूर रहना चाहिए।
भारत द्वारा दक्षिणी सेक्टर—विशेषकर राजस्थान-सिंध सीमा के निकट—हवाई क्षेत्र को अस्थायी रूप से आरक्षित करना यह दर्शाता है कि भारत अपनी वायु-तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता को लगातार अद्यतन रख रहा है।
सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, ऐसे अभ्यास तीन प्रमुख संकेत देते हैं—
सतर्कता (Readiness)
संदेश (Deterrence Signaling)
समन्वय (Operational Coordination)
यह संदेश केवल पड़ोसी देश के लिए नहीं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय परिदृश्य के लिए भी होता है।
पाकिस्तान पर बहुस्तरीय दबाव
पाकिस्तान की सामरिक स्थिति इस समय जटिल है। पश्चिम में अफगान सीमा पर तनाव, दक्षिण में अरब सागर में बढ़ती नौसैनिक सक्रियता, और पूर्व में भारत के साथ पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता—ये सभी कारक उसे कई मोर्चों पर संसाधन बाँटने को मजबूर करते हैं।
यदि किसी देश को एक साथ अनेक सीमाओं पर चौकसी रखनी पड़े, तो उसकी सैन्य और आर्थिक क्षमता पर स्वाभाविक दबाव बनता है। ऐसे में भारत की ओर से बड़े पैमाने पर वायु-अभ्यास की घोषणा पाकिस्तान के रणनीतिक हलकों में चिंता पैदा कर सकती है, भले ही वह नियमित अभ्यास ही क्यों न हो।
क्या अमेरिका–इज़राइल–भारत एक साथ पाकिस्तान के विरुद्ध?
यह प्रश्न भावनात्मक रूप से आकर्षक हो सकता है, किंतु यथार्थ राजनीति (Realpolitik) कहीं अधिक जटिल होती है।
भारत की विदेश नीति परंपरागत रूप से रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) पर आधारित रही है। भारत ने बहुपक्षीय संबंधों को संतुलित रखते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा है।
भारत के अमेरिका और इज़राइल से रक्षा सहयोग अवश्य गहरे हुए हैं—चाहे वह रक्षा तकनीक, संयुक्त अभ्यास या खुफिया सहयोग हो—लेकिन इसका अर्थ स्वतः किसी संयुक्त सैन्य आक्रमण की पूर्व-योजना नहीं माना जा सकता।
भारत का प्राथमिक उद्देश्य है:
अपनी सीमाओं की सुरक्षा
आतंकवाद के विरुद्ध कठोर रुख
क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना
भारत खुली आक्रामकता की बजाय विश्वसनीय प्रतिरोध (Credible Deterrence) की नीति अपनाता रहा है।
वैश्विक तनाव और ‘वर्ल्ड वॉर’ की आशंका
मध्य-पूर्व में बढ़ते संघर्षों को कुछ विश्लेषक विश्व युद्ध की दिशा में संकेत मान रहे हैं, लेकिन अब तक प्रमुख शक्तियाँ प्रत्यक्ष आमने-सामने टकराव से बचने की कोशिश करती रही हैं। आधुनिक युद्ध अब केवल पारंपरिक नहीं, बल्कि साइबर, ड्रोन, आर्थिक प्रतिबंध और प्रॉक्सी युद्धों के रूप में भी लड़े जाते हैं।
ऐसे माहौल में भारत की प्राथमिकता यही है कि वह अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत रखे, लेकिन अनावश्यक उकसावे से दूर रहे।
भारतीय वायु शक्ति: आत्मविश्वास का आधार
भारतीय वायु सेना आज अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों, मिसाइल प्रणालियों और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर क्षमता से लैस है। नियमित अभ्यास यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी भी आपात स्थिति में प्रतिक्रिया समय न्यूनतम रहे।
“आसमान पर राज” जैसे भावनात्मक वाक्य जनभावना को व्यक्त कर सकते हैं, लेकिन सैन्य रणनीति का मूल आधार संतुलन, तैयारी और संयम है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड) संदेश स्पष्ट है, पर संयम सर्वोपरि
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स के इस संपादकीय विश्लेषण का सार यह है कि—
भारत ने जो कदम उठाया है, वह सैन्य प्रोटोकॉल और रणनीतिक सतर्कता का हिस्सा है।
पाकिस्तान पर बहुस्तरीय दबाव की स्थिति वास्तविक हो सकती है, किंतु अतिरंजना से बचना चाहिए।
अमेरिका–इज़राइल–भारत का औपचारिक संयुक्त सैन्य आक्रमण वर्तमान परिदृश्य में अनुमान से अधिक कुछ नहीं है।
भारत की ताकत उसकी तैयारी, संतुलन और कूटनीतिक परिपक्वता में निहित है।
आज का दौर युद्धोन्माद का नहीं, बल्कि रणनीतिक धैर्य का है। भारत की नीति स्पष्ट है—
हम शांति चाहते हैं, पर सुरक्षा के साथ।




