नैनीताल । हाई कोर्ट ने हरिद्वार के 76 वर्षीय शफीक हसन और उनकी 43 वर्षीय पत्नी शायरा बानो के जीवन और स्वतंत्रता को कोई खतरा होने पर उचित कदम उठाने के निर्देश एसएसपी हरिद्वार को दिए हैं।

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न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने दंपति की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में उन्होंने निजी प्रतिवादियों हसन के बेटे और बानो के दो देवरों से पुलिस सुरक्षा की मांग की गई है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड) रही थी।

पूर्व पत्नी की सहमति से हुई थी शादी

याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय को बताया कि उन्होंने 11 मार्च, 2023 को मुरादाबाद में शादी की थी, तब से साथ रह रहे हैं। उनकी शादी से एक लड़की का जन्म हुआ। कहा कि बानो तलाकशुदा थीं और हसन ने अपनी पूर्व पत्नी की सहमति से उनसे शादी की थी।

हालांकि आदेश में यह उल्लेख किया गया कि याचिका में तलाक की कोई विशिष्ट तारीख नहीं दी गई थी और हसन की पूर्व पत्नी की सहमति का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया था। बानो ने कहा कि उनके पूर्व पति ने उन्हें मौखिक तीन तलाक दिया था। उन्होंने अपना विवाह प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें 24 मार्च 2026 को पंजीकरण दिखाया गया था।

प्रतिवादी नौशाद और दिलशाद जो बानो के पूर्व पति के भाई हैं, गुलशेर जो हसन का 30 वर्षीय बेटा है उनसे खतरा बताया है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि उन्होंने 10 अप्रैल को एसएसपी, हरिद्वार को एक अभ्यावेदन प्रस्तुत किया, किंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई। सरकार ने याचिकाकर्ताओं की उम्र पर विवाद नहीं किया और प्रस्तुत किया कि चूंकि विवाह पंजीकृत था, एसएसपी को खतरे के दावे की जांच करनी चाहिए।

इस प्रक्रिया को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने एसएसपी को खतरे की धारणा का आकलन करने और यदि यह संतुष्ट हो कि कोई खतरा है तो जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए कार्रवाई करने का निर्देश दिया। संबंधित एसएचओ को यह भी निर्देश दिया कि प्रतिवादियों को बुलाएं और उन्हें कानून अपने हाथ में न लेने को कहें।


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