

यानी ईरानी वैज्ञानिक कहीं न कहीं परमाणु बम बनाने की फिनिश लाइन तक पहुंच चुके थे. अमेरिका को शायद यही डर सता रहा हो, इसलिए उसने ईरान पर हमला बोल दिया. इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी की फरवरी 2026 की एक सीक्रेट रिपोर्ट के मुताबिक 2026 के सैन्य हमले से पहले ईरान के पास करीब 440 किलोग्राम यूरेनियम था.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
2025 में अमेरिका ने एटम बम का जखीरा बढ़ाने की बात की थी. उधर आज ही फ्रांस ने अपने परमाणु हथियारों का जखीरा बढ़ाने की बात की है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई दुनिया पर परमाणु हमले का खतरा बढ़ गया है?
मिडिल ईस्ट की जंग में फूटेगा एटम बम?
मिडिल-ईस्ट की जंग में परमाणु हमला हो सकता है. ऐसे संकेत एक-दो जगह से नहीं बल्कि कई जगह से मिले हैं. जिसके बाद अमेरिका ने फौरन अपने नागरिकों को मिडिल-ईस्ट छोड़ देने को कह दिया है. एटमी हमले के डर की वजह कोई बेबुनियाद नहीं है. ट्रंप 2025 में दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद चीख-चीख कर कई बार कह चुके हैं. हमारे पास सबसे विनाशक हथियारों का बड़ा जखीरा है, हम न्यूक्लियर में नंबर-1 हैं, रूस दूसरे नंबर पर है जबकि चीन तीसरे नंबर पर है. हम इस दुनिया को कम से कम 150 बार उड़ा सकते हैं.
ट्रंप का वो बयान
मिडिल-ईस्ट में महायुद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वही दुनिया को 150 बार एटम बम से उड़ा देने की बात वाला बयान वायरल हो रहा है. लेकिन सवाल ये है कि क्या ऐसा मुमकिन है?




