ईरान के खिलाफ अमेरिका का ‘स्पेशल मिलिट्री कैंपेन’ जारी है. गुरुवार को लगातार छठा दिन रहा जब इजरायल के साथ मिलकर अमेरिका ने तेहरान को निशाना बनाया. राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में सत्ता परिवर्तन चाहते हैं.

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उन्होंने कहा है कि अगला ईरानी नेता उनकी पसंद का होना चाहिए. हालांकि, पूर्व पेंटागन अधिकारी और मिडिल ईस्ट एनालिस्ट आलिया अवादल्लाह के अनुसार केवल एयरस्ट्राइक के जरिए ईरान में सत्ता परिवर्तन करना लगभग असंभव है. उनका कहना है कि अगर रेजीम चेंज की कोशिश करनी हो तो जमीन पर सैन्य मौजूदगी जरूरी होगी. लेकिन यही वह कदम है जिसे अमेरिका उठाने से बच रहा है. ईरान में जब भी ‘बूट्स ऑन द ग्राउंड’ यानी जमीनी हमले की बात आती है, तो बड़े-बड़े रणनीतिकारों के हाथ-पांव फूल जाते हैं. वजह है ईरान की जटिल टोपोग्राफी, विशाल भूभाग, पहाड़ी किलेबंदी, लंबी सप्लाई लाइन और असिमेट्रिक युद्ध क्षमता.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

पूर्व अमेरिकी मरीन दिग्गज लुकास गेज ने सोशल मीडिया पर चेतावनी देते हुए कहा है कि आप ईरान की जमीन पर अपनी सेना उतार तो देंगे, लेकिन उन्हें जिंदा वापस लाना नामुमकिन होगा. यह देश प्राकृतिक रूप से एक ऐसा किला है, जहां घुसने का हर रास्ता मौत की घाटी से होकर गुजरता है.

[q]ईरान में सेना उतार हमला इतना मुश्किल क्यों?[/q]

[ans]ईरान का क्षेत्रफल 16.5 लाख वर्ग किलोमीटर है. इसकी बनावट इतनी पेचीदा है कि एक अनुमान के मुताबिक, यहां कब्जा करने के लिए अमेरिका को 15 लाख से 22 लाख सैनिकों की फौज उतारनी पड़ेगी. यह संख्या वियतनाम युद्ध में शामिल सैनिकों से कहीं ज्यादा है. पूर्व पेंटागन अधिकारी आलिया अवदल्लाह का एनालिसिस कहता है कि सिर्फ आसमान से बम बरसाकर ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं किया जा सकता. इसके लिए जमीन पर मौजूदगी जरूरी है, लेकिन अमेरिका उस तबाही के लिए तैयार नहीं है. ईरान का हर पहाड़ और हर रेगिस्तान अमेरिकी सेना के लिए एक नया फ्रंट खोल देगा, जहां रसद पहुंचाना और सैनिकों को बचाना नामुमकिन हो जाएगा.[/ans]


ईरान की टोपोग्राफी सैन्य अभियान के लिए बेहद जटिल है. (File Photo : Reuters)

जागरोस और अल्बोर्ज के पहाड़ अमेरिका के लिए ‘मौत का जाल’ बनेंगे

  • ईरान के पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम में फैली जागरोस पर्वत श्रृंखला दुनिया के सबसे कठिन इलाकों में से एक है. यहां की चोटियां 4,000 मीटर से भी ज्यादा ऊंची हैं, जो इराक की सीमा से सटे इलाकों में एक दीवार की तरह खड़ी हैं.
  • अगर अमेरिकी सेना इराक के रास्ते ईरान में घुसने की कोशिश करती है, तो उसे इन संकरी घाटियों से गुजरना होगा. यहां डिफेंस करना बेहद आसान है और हमलावर सेना को आसानी से एम्बुश किया जा सकता है.
  • उत्तर में अल्बोर्ज की पहाड़ियां तेहरान की रक्षा करती हैं, जो किसी भी बाहरी सेना के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच की तरह काम करती हैं.

[q]दश्त-ए-कावीर का रेगिस्तान रसद सप्लाई को कैसे नरक बना देगा?[/q]

[ans]ईरान के केंद्र में स्थित दश्त-ए-कावीर और दश्त-ए-लुत जैसे विशाल रेगिस्तान किसी भी आधुनिक सेना की लॉजिस्टिक्स चेन को तोड़ सकते हैं. 800 किलोमीटर से ज्यादा में फैला यह बंजर इलाका भीषण गर्मी और पानी की कमी के लिए जाना जाता है. अफगानिस्तान में अमेरिका ने देखा है कि ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर सप्लाई लाइन बनाए रखना कितना महंगा और घातक होता है. ईरान में यह चुनौती दस गुना बढ़ जाती है. यहां की जमीन पर भारी टैंक और बख्तरबंद गाड़ियां चलाना एक दुःस्वप्न जैसा होगा, जिससे अमेरिकी सेना की रफ्तार सुस्त हो जाएगी और वह छापामार हमलों का आसान शिकार बन जाएगी.[/ans]


ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान में अपनी पसंद का नेता चाहते हैं. (File Photo : Reuters)

[q]क्या कुर्द और अजेरी लड़ाकों के कंधे पर बंदूक रखकर जीत पाएगा अमेरिका?[/q]

[ans]ईरान की दुर्गम भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यह चर्चा भी तेज है कि क्या अमेरिका सीधे लड़ने के बजाय स्थानीय गुटों का इस्तेमाल करेगा. रणनीतिकारों का एक धड़ा मानता है कि कुर्द और अजेरी लड़ाके, जो इस जमीन की रग-रग से वाकिफ हैं, उत्तर-पश्चिम में एक बफर जोन बना सकते हैं. इन इलाकों में एयरफील्ड और फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस बनाकर ईरान के अंदरूनी हिस्सों पर दबाव बनाया जा सकता है. लेकिन इतिहास गवाह है कि प्रॉक्सी वॉर के जरिए इतने बड़े और भौगोलिक रूप से मजबूत देश पर कब्जा करना नामुमकिन है. यह रणनीति केवल संघर्ष को लंबा खींच सकती है, निर्णायक जीत नहीं दिला सकती.[/ans]

पूर्व पेंटागन अधिकारी आलिया अवदल्लाह के मुताबिक, सिर्फ हवाई हमलों से किसी देश की सरकार को उखाड़ फेंकना मुमकिन नहीं है. सीमित एयरस्ट्राइक से ईरान का नेतृत्व नहीं बदलेगा. अगर अमेरिका वास्तव में ‘रेजीम चेंज’ चाहता है, तो उसे अपनी सेना को उस पहाड़ी दलदल में उतारना होगा, जिससे वह सालों से बचता रहा है. अमेरिका के लिए ईरान में हार का मतलब वैश्विक स्तर पर अपनी सुपरपावर की छवि को हमेशा के लिए दफन करना होगा.


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