

बंदरगाहों से रुका निर्यात, कंटेनर लौटने लगे; पीएनजी और शिपिंग दरें बढ़ने से उद्योगों पर दोहरी मार

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
रुद्रपुर।मध्य-पूर्व में बढ़ते युद्ध संकट की आंच अब उत्तराखंड के औद्योगिक क्षेत्र तक पहुंचने लगी है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय हवाई और समुद्री यातायात को प्रभावित कर दिया है, जिसका सीधा असर पंतनगर स्थित सिडकुल के उद्योगों पर दिखाई देने लगा है। बंदरगाहों से मध्य-पूर्व के देशों को होने वाला निर्यात लगभग ठप हो गया है, जिसके कारण अब तक करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है।
सिडकुल पंतनगर से ईरान, इराक, जॉर्डन, कुवैत और बहरीन जैसे देशों को हाई प्रेशर लैमिनेट, एमडीएफ बोर्ड, मीडियम डेंसिटी फाइबर तथा फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स का बड़ा निर्यात होता है। लेकिन युद्ध के कारण समुद्री मार्गों में बाधा आने से इन देशों के लिए तैयार माल बंदरगाहों से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। कई शिपिंग कंपनियों ने कंटेनरों की उपलब्धता कम कर दी है और भाड़ा भी बढ़ा दिया है।
कुमाऊं गढ़वाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष पवन अग्रवाल के अनुसार शिपिंग कंपनियों ने कंटेनर के किराए में करीब तीन हजार डॉलर तक की बढ़ोतरी कर दी है और समुद्री टैरिफ में भी 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि हो गई है। इससे उद्योगों की लागत और बढ़ने की आशंका है।
इधर, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकोर) के माध्यम से सिडकुल से बंदरगाहों तक भेजे गए कई कंटेनर अब वापस लौटने लगे हैं। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार करीब 40 कंटेनर वापस सिडकुल क्षेत्र में आ रहे हैं, क्योंकि युद्ध के कारण निर्यात और आयात दोनों ही बाधित हो गए हैं।
सिडकुल इंटरप्रिन्योर वेलफेयर सोसायटी के संरक्षक अजय तिवारी का कहना है कि मिडिल ईस्ट को होने वाला निर्यात रुकने से उद्योगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि युद्ध लंबा चला तो आने वाले समय में आयात-निर्यात दोनों पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
इस संकट का असर केवल निर्यात तक सीमित नहीं है। युद्ध के कारण पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ गया है। गैस ऑथिरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) द्वारा सिडकुल क्षेत्र में पीएनजी की आपूर्ति लगभग 20 प्रतिशत तक कम कर दी गई है। उद्योगों को निर्धारित सीमा से अधिक गैस उपयोग करने पर अधिक दरें चुकानी पड़ रही हैं, जिससे उत्पादन लागत बढ़ने लगी है।
सिडकुल इंटरप्रिन्योर वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष श्रीकर सिन्हा का कहना है कि उद्योग पहले ही वैश्विक आर्थिक अस्थिरता से जूझ रहे थे। अब पीएनजी और बिजली दरों में संभावित वृद्धि से उद्यमियों पर दोहरी मार पड़ रही है।
इसके अलावा विदेशों से आने वाले गत्ते और अन्य कच्चे माल के आयात पर भी असर पड़ा है, जिसके कारण कई कंपनियों के लिए उत्पादन बनाए रखना चुनौती बन सकता है।
स्पष्ट है कि यदि मध्य-पूर्व का यह युद्ध जल्द शांत नहीं हुआ, तो इसका असर केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पंतनगर सिडकुल जैसे औद्योगिक क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों पर भी गहरा संकट खड़ा हो सकता है।
रुद्रपुर।मध्य-पूर्व में बढ़ते युद्ध संकट की आंच अब उत्तराखंड के औद्योगिक क्षेत्र तक पहुंचने लगी है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय हवाई और समुद्री यातायात को प्रभावित कर दिया है, जिसका सीधा असर पंतनगर स्थित सिडकुल के उद्योगों पर दिखाई देने लगा है। बंदरगाहों से मध्य-पूर्व के देशों को होने वाला निर्यात लगभग ठप हो गया है, जिसके कारण अब तक करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है।
सिडकुल पंतनगर से ईरान, इराक, जॉर्डन, कुवैत और बहरीन जैसे देशों को हाई प्रेशर लैमिनेट, एमडीएफ बोर्ड, मीडियम डेंसिटी फाइबर तथा फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स का बड़ा निर्यात होता है। लेकिन युद्ध के कारण समुद्री मार्गों में बाधा आने से इन देशों के लिए तैयार माल बंदरगाहों से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। कई शिपिंग कंपनियों ने कंटेनरों की उपलब्धता कम कर दी है और भाड़ा भी बढ़ा दिया है।
कुमाऊं गढ़वाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष पवन अग्रवाल के अनुसार शिपिंग कंपनियों ने कंटेनर के किराए में करीब तीन हजार डॉलर तक की बढ़ोतरी कर दी है और समुद्री टैरिफ में भी 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि हो गई है। इससे उद्योगों की लागत और बढ़ने की आशंका है।
इधर, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकोर) के माध्यम से सिडकुल से बंदरगाहों तक भेजे गए कई कंटेनर अब वापस लौटने लगे हैं। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार करीब 40 कंटेनर वापस सिडकुल क्षेत्र में आ रहे हैं, क्योंकि युद्ध के कारण निर्यात और आयात दोनों ही बाधित हो गए हैं।
सिडकुल इंटरप्रिन्योर वेलफेयर सोसायटी के संरक्षक अजय तिवारी का कहना है कि मिडिल ईस्ट को होने वाला निर्यात रुकने से उद्योगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि युद्ध लंबा चला तो आने वाले समय में आयात-निर्यात दोनों पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
इस संकट का असर केवल निर्यात तक सीमित नहीं है। युद्ध के कारण पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ गया है। गैस ऑथिरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) द्वारा सिडकुल क्षेत्र में पीएनजी की आपूर्ति लगभग 20 प्रतिशत तक कम कर दी गई है। उद्योगों को निर्धारित सीमा से अधिक गैस उपयोग करने पर अधिक दरें चुकानी पड़ रही हैं, जिससे उत्पादन लागत बढ़ने लगी है।
सिडकुल इंटरप्रिन्योर वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष श्रीकर सिन्हा का कहना है कि उद्योग पहले ही वैश्विक आर्थिक अस्थिरता से जूझ रहे थे। अब पीएनजी और बिजली दरों में संभावित वृद्धि से उद्यमियों पर दोहरी मार पड़ रही है।
इसके अलावा विदेशों से आने वाले गत्ते और अन्य कच्चे माल के आयात पर भी असर पड़ा है, जिसके कारण कई कंपनियों के लिए उत्पादन बनाए रखना चुनौती बन सकता है।
स्पष्ट है कि यदि मध्य-पूर्व का यह युद्ध जल्द शांत नहीं हुआ, तो इसका असर केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पंतनगर सिडकुल जैसे औद्योगिक क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों पर भी गहरा संकट खड़ा हो सकता है।




