

रुद्रपुर।उधम सिंह नगर में एक बार फिर सामाजिक और शैक्षिक नीतियों को लेकर बहस तेज होने जा रही है। शिवसेना (उधम सिंह नगर) ने 16 मार्च, सोमवार को सुबह 10 बजे रुद्रपुर के गांधी पार्क से जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च निकालने की घोषणा की है। इस मार्च के माध्यम से संगठन केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं को अपनी मांगों से अवगत कराएगा। शिवसेना नेताओं का कहना है कि वर्तमान शिक्षा और आरक्षण से जुड़े कुछ प्रावधान समाज में विभाजन पैदा कर रहे हैं, इसलिए उन्हें पुनर्विचार के साथ संशोधित या समाप्त किया जाना चाहिए।
शिवसेना के कुमाऊँ मंडल प्रमुख पूरन चन्द्र भट्ट द्वारा जारी जानकारी के अनुसार यह मार्च गांधी पार्क से प्रारंभ होकर जिलाधिकारी कार्यालय तक जाएगा, जहां जिलाधिकारी के माध्यम से भारत के महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा जाएगा। संगठन के अनुसार यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में शिवसैनिक और पदाधिकारी भाग लेंगे।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
उठाए गए प्रमुख मुद्दे
शिवसेना द्वारा जारी मांग पत्र में मुख्य रूप से नई UGC नियमावली को रद्द करने, जातिगत आरक्षण समाप्त करने और आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग की गई है। संगठन का तर्क है कि आज के दौर में गरीबी और आर्थिक विषमता हर जाति और धर्म में मौजूद है, इसलिए सामाजिक न्याय की नीतियों का आधार आर्थिक स्थिति होना चाहिए।
अपील – कुमाऊँ मंडल प्रमुख पूरन चन्द्र भट्ट
शिवसेना के कुमाऊँ मंडल प्रमुख पूरन चन्द्र भट्ट ने आम जनमानस से अपील करते हुए कहा है कि यदि आप भी नई यूजीसी नियमावली और जातिगत भेदभाव के विरोध में अपनी आवाज उठाना चाहते हैं, तो 16 मार्च को सुबह 10 बजे रुद्रपुर के गांधी पार्क में आयोजित पैदल मार्च में अवश्य पहुंचें। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी जाति या धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि समाज में समानता और न्याय की भावना को मजबूत करने के लिए है।
भट्ट ने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि समाज के सभी वर्ग एकजुट होकर ऐसी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाएं, जो लोगों के बीच विभाजन पैदा करती हैं। उन्होंने युवाओं, छात्रों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से बड़ी संख्या में इस शांतिपूर्ण मार्च में शामिल होने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि गांधी पार्क से जिलाधिकारी कार्यालय तक निकाले जाने वाले इस पैदल मार्च के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर अपनी मांगों को मजबूती से रखा जाएगा।
संगठन ने यह भी कहा कि समाज में जातिगत भेदभाव समाप्त होना चाहिए और सरकारों को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो समाज को एकजुट करें, न कि विभाजित करें। शिवसेना के अनुसार दिव्यांग, अनाथ, शहीदों के बच्चों और अत्यंत गरीब परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर अवसर मिलना चाहिए।
UGC नियमों पर सवाल
शिवसेना नेताओं ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में लागू कुछ प्रावधानों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी शिकायत के आधार पर सीधे कठोर कार्रवाई की व्यवस्था है, तो सभी वर्गों के लिए समान सुनवाई का अधिकार होना चाहिए। संगठन का दावा है कि शिक्षा संस्थानों में समानता और न्याय का वातावरण होना जरूरी है।
समाज में बढ़ती बहस
आरक्षण और सामाजिक न्याय का मुद्दा भारत में लंबे समय से बहस का विषय रहा है। एक ओर इसे ऐतिहासिक सामाजिक असमानताओं को दूर करने का माध्यम माना जाता है, वहीं दूसरी ओर कई संगठन इसे आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग भी उठाते रहे हैं। रुद्रपुर में प्रस्तावित यह मार्च इसी व्यापक राष्ट्रीय बहस का स्थानीय स्वरूप माना जा सकता है।
नेतृत्व और आयोजन
इस कार्यक्रम में प्रदेश स्तर और जिला स्तर के कई पदाधिकारी शामिल होंगे। इनमें प्रदेश उपप्रमुख गेला अग्रवाल, प्रदेश महासचिव अल्का सक्सेना, कुमाऊँ मंडल प्रमुख पूरन चन्द्र भट्ट, जिला अध्यक्ष नरेश कुमार, सचिव सुरेश टम्टा, जिला महासचिव बसंत कुमार और सितारगंज ब्लॉक अध्यक्ष नागेन्द्र यादव प्रमुख रूप से मौजूद रहेंगे।
लोकतंत्र में विरोध का महत्व
लोकतंत्र में किसी भी नीति या निर्णय के पक्ष और विपक्ष में आवाज उठाना नागरिक अधिकारों का हिस्सा है। शांतिपूर्ण विरोध और संवाद के माध्यम से ही समाज और सरकार के बीच संतुलन बनता है। रुद्रपुर में होने वाला यह पैदल मार्च भी उसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जहां एक संगठन अपनी मांगों और विचारों को सार्वजनिक मंच पर रख रहा है।




