

रुद्रपुर के अटरिया मंदिर, पांच मंदिर और शिव शक्ति मंदिर आवास विकास में नवरात्रि के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा विशेष श्रद्धा के साथ की जा रही है। यहां भक्तजन विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर मानसिक शांति, साहस और जीवन में स्थिरता की कामना करते हैं। मंदिरों में सुबह से ही भक्ति का वातावरण बना हुआ है, जहां मंत्रोच्चारण और आरती से सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है। श्रद्धालु दूध से बने प्रसाद अर्पित कर सुख-समृद्धि की प्रार्थना कर रहे हैं, जिससे आस्था और आत्मबल दोनों सुदृढ़ हो रहे हैं

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
नवरात्रि के तीसरे दिन शिव अरोड़ा, विकास शर्मा और राजकुमार ठुकराल ने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए देवी चंद्रघंटा की आराधना को साहस, संयम और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि नवरात्रि केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि आत्मबल बढ़ाने का अवसर है। जनप्रतिनिधियों ने सभी नागरिकों से शांति, सद्भाव और सामाजिक एकता बनाए रखने की अपील की। साथ ही उन्होंने कामना की कि मां दुर्गा सभी के जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सफलता का आशीर्वाद प्रदान करें।
इस दिन की पूजा को मानसिक दृढ़ता और जीवन में स्थिरता से जोड़ा जाता है. भक्त मानते हैं कि श्रद्धा से की गई साधना सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है.
नियमित पूजा और ध्यान व्यक्ति के मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास को मजबूत कर सकते हैं. देवी चंद्रघंटा की आराधना को साहस और धैर्य से जोड़कर देखा जाता है. धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह अभ्यास व्यक्ति को तनाव से उबरने और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है.
शुक्र ग्रह से जुड़ा महत्व
ज्योतिषीय दृष्टि से देवी चंद्रघंटा का संबंध शुक्र ग्रह से माना जाता है. ऐसे में उनकी पूजा को जीवन में संतुलन, संबंधों में सुधार और सुख-समृद्धि से जोड़ा जाता है.
देवी चंद्रघंटा का स्वरूप और प्रतीक
देवी चंद्रघंटा का स्वरूप शक्ति और शांति का अनोखा संगम माना जाता है. वे सिंह पर विराजमान होती हैं और उनके दस हाथों में विभिन्न शस्त्र होते हैं. माथे पर अर्धचंद्र उनके नाम का आधार है. उनका यह रूप यह संकेत देता है कि वे रक्षा और संतुलन दोनों का प्रतिनिधित्व करती हैं.
पूजा विधि और प्रसाद
नवरात्रि के तीसरे दिन भक्त सुबह स्नान कर विधिपूर्वक देवी की पूजा करते हैं. साफ स्थान पर कलश स्थापित कर दीप, धूप और फूल अर्पित किए जाते हैं. भोग के रूप में दूध से बने पदार्थ जैसे खीर, मिष्ठान आदि चढ़ाना शुभ माना जाता है. यह परंपरा समृद्धि और शांति के प्रतीक के रूप में देखी जाती है.
मंत्र जाप का महत्व
पूजा के दौरान मंत्र जाप को विशेष महत्व दिया जाता है. नियमित और सही उच्चारण के साथ मंत्रों का जप ध्यान को केंद्रित करने में सहायक होता है.
प्रमुख मंत्र:
“ॐ देवी चंद्रघण्टायै नमः”
“या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता…”
नवरात्रि का तीसरा दिन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और मानसिक संतुलन का अवसर भी है. देवी चंद्रघंटा की पूजा को आस्था के साथ-साथ आत्मबल बढ़ाने के रूप में भी देखा जा सकता है. यह परंपरा दर्शाती है कि आध्यात्मिक अभ्यास व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं, बशर्ते उन्हें संतुलित दृष्टिकोण से अपनाया जाए.✧ धार्मिक और अध्यात्मिक




