उत्तराखंड,सनातन धर्म में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का अत्यंत विशेष महत्व है। इस दिन एक ओर जहां चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है, वहीं दूसरी ओर लक्ष्मी पंचमी का पर्व भी मनाया जाता है, जो धन, समृद्धि और वैभव की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी को समर्पित है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
इस पावन अवसर पर विख्यात कर्मकांडी विद्वान और सत्यनारायण कथा के प्रसिद्ध कथावाचक पण्डित त्रिलोचन पनेरु ने लक्ष्मी पंचमी और स्कंदमाता पूजा के महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला है।
लक्ष्मी पंचमी की तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल पंचमी तिथि का आरंभ 22 मार्च 2026 को रात 09:16 बजे से हुआ और इसका समापन 23 मार्च को शाम 06:38 बजे होगा। उदयातिथि के आधार पर आज ही लक्ष्मी पंचमी का व्रत और पूजन किया जा रहा है।
लक्ष्मी पंचमी पूजन विधि
पंडित त्रिलोचन पनेरु के अनुसार इस दिन पूजा पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से करनी चाहिए—
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
घर के मंदिर की सफाई करें
चौकी पर मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें
गंगाजल से स्नान कराकर लाल वस्त्र अर्पित करें
कुमकुम का तिलक लगाएं, आभूषण पहनाएं
फल, मिठाई, खीर आदि का भोग लगाएं
धूप-दीप प्रज्वलित करें
मंत्र जाप और अंत में आरती करें
पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
लक्ष्मी पंचमी का महत्व
पंडित पनेरु बताते हैं कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से—
घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है
आर्थिक संकट दूर होते हैं
कुंडली के धन दोष समाप्त होते हैं
जीवन में स्थायी समृद्धि आती है
मां स्कंदमाता का स्वरूप और कृपा
मां स्कंदमाता, भगवान कार्तिकेय की माता हैं। वे कमल पर विराजमान होती हैं और उनकी गोद में बाल रूप में कार्तिकेय विराजते हैं। इनकी पूजा करने से भक्त को कार्तिकेय की पूजा का भी फल प्राप्त होता है।
विशुद्ध चक्र और ज्योतिषीय महत्व
पंडित त्रिलोचन पनेरु मोबाइल नंबर। 86500 85870 के अनुसार—
स्कंदमाता का संबंध विशुद्ध चक्र (कंठ चक्र) से है
यह वाणी, अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास से जुड़ा है
ज्योतिष में इसका संबंध बृहस्पति ग्रह से माना गया है
संतान सुख की प्राप्ति के लिए यह दिन अत्यंत शुभ है
आज के शुभ योग
आज नवरात्रि के पांचवें दिन विशेष शुभ योग बन रहे हैं—
सर्वार्थ सिद्धि योग
रवि योग
इन योगों में की गई पूजा कई गुना अधिक फलदायी मानी जाती है।
स्कंदमाता पूजा के विशेष नियम
पीले फूल अर्पित करें
पीले वस्त्र पहनें
पीले भोजन का भोग लगाएं
संतान से जुड़ी मनोकामना व्यक्त करें
विशुद्ध चक्र को मजबूत करने का उपाय
पंडित पनेरु द्वारा बताया गया विशेष उपाय—
रात्रि में शांत स्थान पर बैठें
घी का दीपक जलाएं
देवी को लाल चंदन का तिलक लगाएं
वही तिलक अपने कंठ पर लगाएं
ध्यान करते हुए कंठ में प्रकाश की कल्पना करें
“ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे” मंत्र का 108 बार जाप करें
लक्ष्मी कृपा के लिए महिलाओं से जुड़ी मान्यताएं
पंडित जी के अनुसार घर की महिलाओं को लक्ष्मी स्वरूप माना गया है, इसलिए—
घर की गोपनीय बातें बाहर न बताएं
सूर्यास्त के बाद झाड़ू न लगाएं
त्योहारों पर स्वच्छता रखें
बड़ों का सम्मान करें
धन का दुरुपयोग न करें
पंडित त्रिलोचन पनेरु का विशेष संदेश
पंडित जी का कहना है कि उनके द्वारा किए गए वैदिक मंत्रों और शुद्ध गोत्र (कृष्ण गोत्र) की विधि से संपन्न पूजा अत्यंत प्रभावशाली होती है। विशेषकर नवरात्रि में उनके द्वारा कराई गई पूजा का फल सामान्य से कई गुना (100 गुना तक) बढ़ जाता है, क्योंकि यह शास्त्रसम्मत और उच्च कोटि की साधना पर आधारित होती है।
ब्राह्मणों में सबसे उच्च कोटि के पं. त्रिलोचन पनेरू कृष्णात्रेय एक वैदिक परंपरा से जुड़ा विद्वान नाम है। “त्रिलोचन” Lord Shiva का प्रतीक है, जबकि “अत्रेय” महर्षि Atri के वंश को दर्शाता है। यह नाम ज्ञान, आध्यात्मिकता, ब्राह्मणीय परंपरा और धार्मिक विद्वता का प्रतिनिधित्व करता है।
लक्ष्मी पंचमी और मां स्कंदमाता की पूजा केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं, बल्कि जीवन में समृद्धि, संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी है। यदि इस दिन विधि-विधान और श्रद्धा से पूजा की जाए, तो मां लक्ष्मी और मां स्कंदमाता दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
जय मां लक्ष्मी | जय मां स्कंदमाता
