बबीता कहाँ है? छह दिन बाद भी जवाब नहीं, सवालों के घेरे में व्यवस्था

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उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल से लापता हुई 24 वर्षीय एमबीए छात्रा बबीता पांडे का छह दिन बाद भी कोई सुराग न मिलना केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आपदा एवं पर्यटन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। नैनीताल जनपद के रामनगर की रहने वाली बबीता अपने दोस्तों के साथ उत्तरकाशी घूमने आई थीं, लेकिन आज उनका परिवार उनकी एक झलक पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड


राज्य सरकार अक्सर पर्यटन को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जब किसी पर्यटक की सुरक्षा का प्रश्न आता है तो व्यवस्थाओं की वास्तविकता सामने आ जाती है। आखिर ऐसा कैसे हुआ कि एक युवती प्रसिद्ध ट्रेकिंग मार्ग से लापता हो गई और कई दिनों तक खोज अभियान चलने के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं मिला? क्या ट्रेकिंग मार्गों पर पर्याप्त निगरानी, पंजीकरण और सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी?
यह भी चिंताजनक है कि संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी द्वारा वैध अनुमति न लेने की बात सामने आई। यदि नियमों का पालन नहीं किया गया तो जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या निगरानी तंत्र केवल कागजों तक सीमित है?
मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार को इस मामले को केवल एक सामान्य गुमशुदगी नहीं मानना चाहिए। यह उत्तराखंड की पर्यटन सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा है। बबीता के परिजन न्याय और जवाब चाहते हैं। उनकी माँ की आँखों से बहते आँसू और भाई की मार्मिक अपील पूरे समाज को झकझोर रही है।
आज आवश्यकता केवल खोज अभियान चलाने की नहीं, बल्कि इस घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने, सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करने और दोषियों की जवाबदेही तय करने की है। जब तक बबीता का पता नहीं चलता, तब तक यह सवाल गूंजता रहेगा—क्या उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों पर आने वाले लोग वास्तव में सुरक्षित हैं?


दयारा ट्रैक से लापता बबीता की तलाश जारी, छह दिन बाद भी नहीं मिला सुराग,उत्तरकाशी। दयारा बुग्याल ट्रैक पर 29 मई से लापता नैनीताल निवासी 24 वर्षीय एमबीए छात्रा बबीता पांडे की तलाश लगातार जारी है। बबीता का छह दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिससे परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही है। उसकी खोज में सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की संयुक्त टीमें युद्ध स्तर पर अभियान चला रही हैं।
करीब 150 जवान और अधिकारी गोई बेस कैंप के आसपास के जंगलों, खाईयों, गुफाओं और जलाशयों में व्यापक तलाशी अभियान चला रहे हैं। खोज अभियान में ड्रोन, डॉग स्क्वाड और गोताखोरों की भी मदद ली जा रही है। मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद राहत एवं बचाव दल लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रहे हैं।
प्रशासन का कहना है कि बबीता की तलाश में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। वहीं, परिजन उसकी सकुशल वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं और पूरे मामले पर प्रदेशभर की नजर बनी हुई है।


हम बबीता पांडे की सकुशल वापसी की कामना करते हैं और उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। साथ ही सरकार, प्रशासन और संबंधित एजेंसियों से अपेक्षा करते हैं कि वे इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर सच्चाई को सामने लाएं।
यह लेख संवेदनशीलता बनाए रखते हुए सरकार, प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था की जवाबदेही पर प्रश्न उठाता है तथा पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता


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