वैश्विक मंच पर चमका भारत, पहाड़ में अब भी पलायन और बेरोजगारी
मोदी सरकार की उपलब्धियां ऐतिहासिक, उत्तराखंड सरकार क्यों पिछड़ रही?उत्तराखंड राज्य की मूल अवधारणा केवल एक नए प्रशासनिक ढांचे का निर्माण नहीं थी, बल्कि यह पहाड़ की संस्कृति, जल-जंगल-जमीन, स्थानीय पहचान, रोजगार और स्वाभिमान की रक्षा का आंदोलन था। पृथक राज्य आंदोलन के दौरान लाखों लोगों ने यह सपना देखा था कि उत्तराखंड बनने के बाद यहां का युवा अपने गांव में रोजगार पाएगा, पलायन रुकेगा, शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा प्राकृतिक संसाधनों पर पहला अधिकार स्थानीय लोगों का होगा।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड
आज जब प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना रहा है, तब उत्तराखंड की जनता यह सवाल पूछ रही है कि आखिर राज्य निर्माण के मूल उद्देश्य अब तक अधूरे क्यों हैं। केंद्र सरकार ने देश को मजबूत नेतृत्व दिया, विश्व मंच पर भारत का सम्मान बढ़ाया, बुनियादी ढांचे से लेकर डिजिटल क्रांति तक बड़े परिवर्तन किए, लेकिन उत्तराखंड में इन उपलब्धियों का लाभ अपेक्षित स्तर तक जमीन पर दिखाई नहीं देता।
मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाने जैसा साहसिक निर्णय लिया, राम मंदिर निर्माण से सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा दी, आत्मनिर्भर भारत अभियान से देश को आर्थिक मजबूती प्रदान की और डिजिटल भारत के माध्यम से गांव-गांव तक तकनीक पहुंचाई। दुनिया आज भारत को नई दृष्टि से देख रही है। जी-20 की सफल अध्यक्षता और वैश्विक कूटनीति में भारत की सक्रिय भूमिका ने यह साबित किया कि देश निर्णायक नेतृत्व के दौर में प्रवेश कर चुका है।
लेकिन उत्तराखंड की तस्वीर अब भी कई सवाल खड़े करती है। राज्य निर्माण के 25 वर्षों बाद भी पहाड़ों से पलायन जारी है। हजारों गांव खाली हो चुके हैं। युवा रोजगार के लिए दिल्ली, चंडीगढ़ और देहरादून की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। यदि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी गांव वीरान हो रहे हैं तो यह राज्य सरकारों की नीतिगत विफलता मानी जाएगी।
भू-कानून का मुद्दा आज उत्तराखंड की सबसे बड़ी जनभावना बन चुका है। जनता को डर है कि अंधाधुंध भूमि खरीद से स्थानीय संस्कृति और संसाधनों पर बाहरी कब्जा बढ़ रहा है। राज्य आंदोलन की मूल भावना थी कि उत्तराखंड की जमीन और संसाधनों की रक्षा हो, लेकिन आज यही सबसे बड़ा सवाल बन गया है। जनता का आरोप है कि सरकार केवल घोषणाएं करती है, लेकिन कठोर और प्रभावी भू-कानून लागू करने का साहस नहीं दिखा पा रही।
शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत भी चिंता का विषय बनी हुई है। पहाड़ी क्षेत्रों में स्कूल बंद हो रहे हैं, अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं और युवाओं के सामने रोजगार का संकट लगातार गहराता जा रहा है। भर्ती घोटालों और प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं ने युवाओं का भरोसा तोड़ा है।
चारधाम यात्रा और पर्यटन को सरकार उपलब्धि बताती है, लेकिन स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि आखिर पर्यटन का वास्तविक लाभ पहाड़ के गांवों तक क्यों नहीं पहुंच रहा। बड़े होटल और बाहरी कारोबारी लाभ कमा रहे हैं जबकि स्थानीय दुकानदार और छोटे व्यवसायी संघर्ष कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार उत्तराखंड को “देवभूमि” और “आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र” बताते हुए विशेष प्राथमिकता दी है। केंद्र सरकार ने सड़क, रेल, हवाई संपर्क और धार्मिक पर्यटन के लिए बड़े प्रोजेक्ट दिए। इसके बावजूद यदि जनता अपने ही राज्य में खुद को उपेक्षित महसूस कर रही है तो यह सीधे तौर पर राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है।
आज उत्तराखंड की जनता केवल भाषण और घोषणाएं नहीं, बल्कि राज्य आंदोलन की मूल अवधारणा को धरातल पर उतरते देखना चाहती है। लोगों को ऐसा उत्तराखंड चाहिए जहां गांव आबाद हों, युवा रोजगार पाए, किसान सुरक्षित महसूस करे और पहाड़ की संस्कृति संरक्षित रहे। केंद्र सरकार ने देश को नई दिशा देने का प्रयास किया है, अब उत्तराखंड सरकार की जिम्मेदारी है कि वह राज्य निर्माण के सपनों को साकार करने के लिए निर्णायक कदम उठाए, अन्यथा जनता का असंतोष आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है।मोदी सरकार के 12 वर्ष : संकल्प से सिद्धि तक, कैसे बदला भारत का वैश्विक स्वरूप
प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे हो चुके हैं। 26 मई 2014 को शुरू हुआ यह राजनीतिक सफर अब केवल एक सरकार के कार्यकाल तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारत के व्यापक परिवर्तन और आत्मविश्वास के पुनर्जागरण के दौर के रूप में देखा जा रहा है। बीते 12 वर्षों में भारत ने आर्थिक, सामरिक, सांस्कृतिक, तकनीकी और वैश्विक कूटनीति के क्षेत्र में कई ऐसे ऐतिहासिक फैसले देखे, जिन्होंने देश की दिशा और दशा दोनों बदल दीं।
इन वर्षों में केंद्र सरकार ने कई बड़े और साहसिक निर्णय लिए, जिन्हें समर्थक “नए भारत की नींव” बताते हैं। इन फैसलों ने न केवल देश के भीतर व्यापक बदलाव किए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति को भी मजबूत किया। कभी विकासशील राष्ट्र कहे जाने वाला भारत आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और प्रभावशाली शक्तियों में गिना जा रहा है।
अनुच्छेद 370 हटाकर राष्ट्रीय एकता का संदेश
अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाकर एक ऐतिहासिक फैसला लिया। दशकों से यह मुद्दा भारतीय राजनीति का सबसे संवेदनशील विषय बना हुआ था। इस निर्णय के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया।
सरकार का दावा है कि इस फैसले के बाद वहां सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ, आतंकवादी घटनाओं में कमी आई और विकास योजनाओं को नई गति मिली। केंद्र सरकार ने इसे “एक देश, एक विधान” की अवधारणा को साकार करने वाला कदम बताया। समर्थकों के अनुसार यह निर्णय केवल संवैधानिक बदलाव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता का प्रतीक था।
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से सांस्कृतिक चेतना का उदय
अयोध्या में भगवान राम मंदिर निर्माण को मोदी सरकार के कार्यकाल की सबसे बड़ी सांस्कृतिक उपलब्धियों में गिना जा रहा है। वर्षों पुराने विवाद का समाधान सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद संवैधानिक तरीके से हुआ। इसके बाद भव्य मंदिर निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा ने करोड़ों लोगों की आस्था को नया सम्मान दिया।
राम मंदिर केवल धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन चुका है। अयोध्या का तेजी से हो रहा विकास इसे वैश्विक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, चौड़ी सड़कें और आधुनिक सुविधाएं इस परिवर्तन की गवाही दे रही हैं।
आत्मनिर्भर भारत अभियान ने बदली आर्थिक सोच
कोरोना महामारी के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने “आत्मनिर्भर भारत” का आह्वान किया। इसका उद्देश्य भारत को उत्पादन, तकनीक और उद्योग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना था। “मेक इन इंडिया” अभियान के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल क्षेत्रों में बड़े निवेश आकर्षित किए गए।
आज भारत मोबाइल निर्माण के क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल हो चुका है। पहले जहां अधिकांश मोबाइल विदेशों से आयात होते थे, वहीं अब भारत बड़े स्तर पर मोबाइल निर्माण और निर्यात कर रहा है। रक्षा क्षेत्र में भी स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दिया गया। छोटे और मध्यम उद्योगों को आसान ऋण और प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से नई ताकत दी गई।
कोरोना काल में भारत बना दुनिया का संकटमोचक
कोरोना महामारी पूरी दुनिया के लिए अभूतपूर्व संकट बनकर आई थी। उस समय भारत ने न केवल अपनी विशाल आबादी के लिए टीकों का निर्माण किया, बल्कि अनेक देशों की भी सहायता की। भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड ने दुनिया भर में भारत की वैज्ञानिक क्षमता का परिचय दिया।
भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चलाया। करोड़ों लोगों तक वैक्सीन पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्वास्थ्य ढांचे का व्यापक उपयोग किया गया। “वैक्सीन मैत्री” अभियान के तहत भारत ने कई देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराकर वैश्विक मानवीय नेतृत्व का उदाहरण पेश किया।
डिजिटल इंडिया और यूपीआई क्रांति
मोदी सरकार के सबसे बड़े बदलावों में डिजिटल इंडिया अभियान को माना जाता है। यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी यूपीआई ने भारत में लेनदेन की व्यवस्था पूरी तरह बदल दी। अब छोटे दुकानदार से लेकर बड़े व्यापारी तक डिजिटल भुगतान स्वीकार कर रहे हैं।
यूपीआई ने बैंकिंग प्रणाली को आसान और तेज बनाया। आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। कई देश भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल को अपनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
डिजिटल इंडिया अभियान के तहत गांवों तक इंटरनेट पहुंचाने, सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन करने और डिजिटल साक्षरता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। इससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों में वृद्धि हुई।
जीएसटी लागू कर बदली कर व्यवस्था
वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी को स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े कर सुधारों में गिना जाता है। पहले अलग-अलग राज्यों और केंद्र के अनेक कर व्यापारियों के लिए जटिल व्यवस्था पैदा करते थे। जीएसटी लागू होने के बाद “एक राष्ट्र, एक कर” की अवधारणा लागू हुई।
हालांकि शुरुआती दौर में व्यापारियों और छोटे उद्योगों को तकनीकी और प्रक्रियागत चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन बाद में इसे कर प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाने वाला कदम माना गया। इससे कर संग्रह में वृद्धि हुई और अर्थव्यवस्था के औपचारिक ढांचे को मजबूती मिली।
बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार
पिछले 12 वर्षों में सड़क, रेलवे, हवाई अड्डों और एक्सप्रेसवे के निर्माण में तेज गति देखने को मिली। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट भारत के बदलते बुनियादी ढांचे की तस्वीर पेश करते हैं।
“वंदे भारत” ट्रेनें भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण का प्रतीक बन चुकी हैं। रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। उड़ान योजना के तहत छोटे शहरों को हवाई सेवाओं से जोड़ा गया, जिससे आम नागरिक के लिए हवाई यात्रा अधिक सुलभ हुई।
सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क निर्माण और सुरंग परियोजनाओं को भी प्राथमिकता दी गई, जिससे सामरिक दृष्टि से भारत और मजबूत हुआ।
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से भ्रष्टाचार पर प्रहार
सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना के जरिए सब्सिडी और योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजना शुरू किया। इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई और भ्रष्टाचार पर काफी हद तक अंकुश लगा।
उज्ज्वला योजना, किसान सम्मान निधि, वृद्धावस्था पेंशन और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचने लगा। सरकार का दावा है कि इससे करोड़ों रुपये की बचत हुई और फर्जी लाभार्थियों की पहचान संभव हुई।
मिशन शक्ति और रक्षा आत्मनिर्भरता
भारत ने अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में भी अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। 2019 में “मिशन शक्ति” के तहत भारत ने एंटी-सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण कर दुनिया को अपनी तकनीकी क्षमता का परिचय दिया। भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बना।
रक्षा क्षेत्र में विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने के लिए कई कदम उठाए गए। रक्षा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा दिया गया। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में रक्षा औद्योगिक गलियारे स्थापित किए गए। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए।
स्वच्छ भारत मिशन बना जन आंदोलन
2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ स्वच्छ भारत मिशन केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि जन आंदोलन बन गया। करोड़ों शौचालयों का निर्माण किया गया और खुले में शौच मुक्त भारत का लक्ष्य तय किया गया।
स्वच्छता के प्रति लोगों की सोच बदलने का प्रयास किया गया। गांवों और शहरों में सफाई को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाए गए। विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी इस अभियान की सराहना की।
योग को मिली वैश्विक पहचान
भारत की प्राचीन परंपरा योग को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने का श्रेय भी मोदी सरकार को दिया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया। इस प्रस्ताव को रिकॉर्ड संख्या में देशों का समर्थन मिला।
आज दुनिया के अनेक देशों में योग दिवस बड़े स्तर पर मनाया जाता है। इससे भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शक्ति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है।
जी-20 अध्यक्षता से बढ़ा भारत का वैश्विक प्रभाव
भारत की जी-20 अध्यक्षता को कूटनीतिक दृष्टि से बड़ी सफलता माना गया। नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन में भारत ने विकासशील देशों की आवाज को मजबूती से उठाया।
भारत ने “ग्लोबल साउथ” यानी विकासशील देशों की चिंताओं को दुनिया के सामने प्रमुखता से रखा। अफ्रीकी संघ को जी-20 की स्थायी सदस्यता दिलाने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इससे भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता और मजबूत हुई।
नया भारत और बढ़ता आत्मविश्वास
बीते 12 वर्षों में भारत ने केवल योजनाओं और नीतियों का विस्तार नहीं देखा, बल्कि एक नए आत्मविश्वास का उदय भी महसूस किया। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की आवाज पहले की तुलना में अधिक प्रभावशाली हुई है। विदेश नीति में संतुलन और दृढ़ता दोनों दिखाई दीं।
चाहे रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत की रणनीतिक स्थिति हो, या पश्चिम एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कूटनीतिक सक्रियता, भारत ने खुद को एक स्वतंत्र और निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित किया।
मोदी सरकार के समर्थकों का मानना है कि इन 12 वर्षों में भारत ने दुनिया का अनुसरण करने के बजाय दुनिया के लिए एजेंडा तय करना शुरू किया है। “संकल्प से सिद्धि” का मंत्र केवल नारा नहीं, बल्कि शासन की कार्यशैली का आधार बना।
आज भारत आर्थिक, सामरिक, तकनीकी और सांस्कृतिक क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में यह परिवर्तन कितना स्थायी और व्यापक साबित होगा, यह भविष्य तय करेगा, लेकिन इतना स्पष्ट है कि मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों ने भारत की राजनीति और विकास यात्रा पर गहरी छाप छोड़ी है।
