मोदी सरकार के 12 साल (Modi Government 12 Years) 26 मई को पूरे हो गए हैं, पिछले 12 वर्षों में भारत ने एक असाधारण परिवर्तन देखा है, जहां ‘संकल्प से सिद्धि’ का मंत्र मोदी सरकार की नीतियों का आधार रहा है।

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सरकार के वो 12 ऐतिहासिक और साहसिक फैसले, जिन्होंने भारत को एक उभरती शक्ति से बदलकर वैश्विक पटल पर एक ‘ग्लोबल लीडर’ के रूप में स्थापित किया है। ये कदम केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि भारत के आत्मविश्वास के प्रतीक हैं।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड



इन अहम फैसलों ने ना सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी मोदी सरकार की साख में चार चांद लगाए। यह के दूरदृष्टि वाले निर्णय ही थे जिन्होंने अपनी अलग ही छाप छोड़ी है। मोदी सरकार के इन 12 वर्षों को सिर्फ ‘राजनीतिक कार्यकाल’ के रूप में नहीं, बल्कि ‘राष्ट्र निर्माण के एक युग’ के रूप में देखा जाता है।

पिछले 12 वर्षों में भारत ने एक ऐसा कायाकल्प देखा है, जिसे भविष्य में ‘असाधारण युग’ के रूप में याद किया जाएगा। यह सफर केवल नीतियों का नहीं, बल्कि उन 12 साहसिक कदमों का है जिन्होंने भारत को एक ‘उभरती हुई शक्ति’ से ‘ग्लोबल लीडर’ के रूप में स्थापित किया है।देखिए क्या हैं ये बड़े और अहम फैसले-
 

1. अनुच्छेद 370 और 35A का उन्मूलन (अगस्त 2019)

दशकों से लंबित इस मुद्दे को सुलझाकर सरकार ने ‘एक देश, एक विधान’ का सपना पूरा किया। इससे जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है और निवेश के नए रास्ते खुले हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया। अब भारतीय संविधान के सभी प्रावधान और केंद्रीय कानून वहां भी पूरी तरह लागू हैं। इस बदलाव के बाद राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, और बुनियादी ढांचे के सुधार पर जोर दिया गया है। निजी निवेश बढ़ने और पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था में सुधार के दावे किए गए हैं।
 

2. अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण

अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा काफी लंबे समय से विवादों और कानूनी प्रक्रियाओं में उलझा हुआ था। अंततः, सर्वोच्च न्यायालय के एक ऐतिहासिक निर्णय के बाद इस दशकों पुराने विवाद का सर्वसम्मति और संवैधानिक तरीके से समाधान निकाला गया। राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही भारत की सांस्कृतिक चेतना का पुनर्जागरण हुआ। यह फैसला आस्था और संवैधानिक प्रक्रिया के बीच संतुलन का एक वैश्विक उदाहरण बना।


राम मंदिर का निर्माण और वहां हुई प्राण प्रतिष्ठा भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अस्मिता को पुनर्जीवित करने का प्रयास माना गया है। यह घटना करोड़ों भारतीयों की अटूट आस्था को सम्मान देने के रूप में देखी गई है। मंदिर निर्माण के पश्चात अयोध्या का कायाकल्प एक वैश्विक सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में हुआ है।
 

3. ‘आत्मनिर्भर भारत’ और मैन्युफैक्चरिंग हब

‘मेक इन इंडिया’ के जरिए आयात पर निर्भरता कम की गई। भारत रक्षा से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक का ग्लोबल एक्सपोर्ट हब बन रहा है। सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों (जैसे- इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, और टेक्सटाइल) के लिए आकर्षक इंसेंटिव स्कीम शुरू की। इस अभियान के जरिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) को प्राथमिकता दी गई। एकल खिड़की निकासी (Single Window Clearance) और श्रम कानूनों के सरलीकरण ने कंपनियों के लिए भारत में फैक्ट्री लगाना आसान बना दिया। MSME को प्रोत्साहन- भारत की रीढ़ माने जाने वाले लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को आसान लोन, तकनीक और वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए विशेष पैकेज दिए गए।
 

4. कोरोना काल में ‘वैक्सीन विजय’

भारत ने स्वदेशी वैक्सीन का निर्माण कर दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चलाया। ‘वैक्सीन मैत्री’ ने वैश्विक स्तर पर भारत को ‘संकटमोचक’ की पहचान दी। महामारी की शुरुआत में जब पूरी दुनिया वैक्सीन के लिए संघर्ष कर रही थी, तब भारत ने ‘मिशन मोड’ पर काम किया। भारत ने न केवल अपने वैज्ञानिकों पर भरोसा किया, बल्कि दो स्वदेशी वैक्सीन-कोवैक्सीन और कोविशील्ड (Covishield) का रिकॉर्ड समय में विकास और परीक्षण सुनिश्चित किया। यह भारत के फार्मास्युटिकल सेक्टर की तकनीकी श्रेष्ठता का नतीजा था। भारत ने केवल वैक्सीन बनाई नहीं, बल्कि उसे 140 करोड़ से अधिक की आबादी तक पहुंचाने का भी कार्य किया।


 

5. डिजिटल इंडिया: ट्रांजेक्शन की नई क्रांति

UPI ने भारत की अर्थव्यवस्था को डिजिटल बनाया। आज दुनिया के कई देश भारत के UPI मॉडल को अपनाना चाह रहे हैं। सरकार ने ‘डिजिटल इंडिया’ को बढ़ावा देते हुए एकीकृत भुगतान इंटरफेस लॉन्च किया, जिसने भारत को विश्व स्तर पर सबसे बड़े डिजिटल पेमेंट इकोनॉमी में बदल दिया। UPI ने IFSC कोड या बैंक डिटेल डालने की जटिलता को खत्म कर दिया। अब केवल QR कोड स्कैन करके या UPI ID के जरिए कहीं भी, कभी भी पैसे भेजे जा सकते हैं।
 

6. जीएसटी (GST) का कार्यान्वयन

‘एक राष्ट्र, एक कर’ की व्यवस्था ने व्यापारिक बाधाओं को खत्म किया। इसने देश की अर्थव्यवस्था को औपचारिक (Formalize) और पारदर्शी बनाया है। जीएसटी से पहले, भारत में केंद्र और राज्यों के अलग-अलग कई अप्रत्यक्ष कर (जैसे- एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, वैट, एंटरटेनमेंट टैक्स आदि) थे। जीएसटी ने इन सभी को खत्म करके एक एकल कर प्रणाली लागू की, जिससे ‘एक राष्ट्र, एक कर’ (One Nation, One Tax) का सपना साकार हुआ।


 

7. बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का कायाकल्प

वंदे भारत ट्रेनें, आधुनिक एक्सप्रेसवे और विश्वस्तरीय एयरपोर्ट्स का जाल बिछाकर सरकार ने ‘विकसित भारत 2047′ की भौतिक नींव तैयार की है।भारत ने राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की गति में अभूतपूर्व वृद्धि की है। आधुनिक एक्सप्रेसवे (जैसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे) का जाल बिछाया गया है, जिससे प्रमुख औद्योगिक शहरों के बीच यात्रा का समय घंटों कम हो गया है।’वंदे भारत’ जैसी स्वदेशी अर्ध-उच्च गति वाली ट्रेनें भारतीय रेलवे की नई पहचान बनी हैं। साथ ही, रेलवे स्टेशनों को एयरपोर्ट की तर्ज पर पुनर्विकसित (Redevelopment) किया जा रहा है।’उड़ान’ (UDAN) योजना के माध्यम से छोटे शहरों को विमान सेवा से जोड़ा गया है। पिछले 12 वर्षों में नए हवाई अड्डों का निर्माण और पुराने हवाई अड्डों का विस्तार हुआ है, जिससे आम आदमी का हवाई यात्रा का सपना सच हुआ है।
 

8. डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT)

सब्सिडी और योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजने से भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है और बिचौलियों का अंत हुआ है।DBT का मुख्य उद्देश्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के आधार-लिंक्ड बैंक खातों में हस्तांतरित करना है। इसका मूल मंत्र है-सही लाभ, सही व्यक्ति तक, बिना किसी देरी के।
 

9. ‘मिशन शक्ति’ और रक्षा आत्मनिर्भरता

भारत ने अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में अपनी ताकत दिखाई। एंटी-सैटेलाइट मिसाइल टेस्ट (Mission Shakti) ने दुनिया को भारत की तकनीकी क्षमता का अहसास कराया।27 मार्च 2019 को ‘मिशन शक्ति’ के तहत भारत ने एक एंटी-सैटेलाइट (ASAT) मिसाइल का सफल परीक्षण किया। भारत ने अपनी एक सक्रिय उपग्रह (Satellite) को अंतरिक्ष में सटीक निशाना बनाकर नष्ट कर दिया। ऐसा करने वाला भारत दुनिया का चौथा देश बना (अमेरिका, रूस और चीन के बाद)। यह परीक्षण यह बताने के लिए काफी था कि भारत अपनी अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा करने और अंतरिक्ष में किसी भी चुनौती का जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है।
 

रक्षा आत्मनिर्भरता (Defense Indigenization)

पिछले 12 वर्षों में भारत ने अपनी रक्षा जरूरतों के लिए विदेशी आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। ये हैं-
इम्पोर्ट पर लगाम (Negative Import List) सरकार ने उन रक्षा उपकरणों की एक लंबी सूची जारी की है जिनका आयात पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। अब भारतीय कंपनियों को ही इन्हें बनाने का अनिवार्य रूप से मौका दिया जाता है। रक्षा गलियारे (Defense Corridors): उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में ‘डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर’ विकसित किए गए हैं। यहां मिसाइलों से लेकर तोपों तक का निर्माण किया जा रहा है, जिससे हजारों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) जुड़ गए हैं।
 

10. स्वच्छ भारत मिशन

दुनिया का सबसे बड़ा स्वच्छता अभियान चलाकर सरकार ने जन-स्वास्थ्य और सम्मान के प्रति एक नई सोच को जन्म दिया, जिसे वैश्विक स्तर पर सराहा गया।स्वच्छ भारत मिशन भारत सरकार द्वारा चलाया गया एक अत्यंत महत्वपूर्ण जन-आंदोलन है, जिसने देश की स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी आदतों में व्यापक बदलाव किया है। यह मिशन न केवल बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित है, बल्कि यह नागरिकों की जीवनशैली में सुधार लाने और भारत को एक स्वच्छ राष्ट्र के रूप में नई पहचान दिलाने का एक प्रमुख माध्यम बना है।


 

11. ‘योग’ को वैश्विक मान्यता (अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस)

भारत की प्राचीन संस्कृति ‘योग’ को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाकर भारत ने वैश्विक ‘सॉफ्ट पावर’ में वृद्धि की है।
योग को वैश्विक मान्यता दिलाना भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) की एक बड़ी कूटनीतिक जीत रही है। भारत के प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के रूप में घोषित किया। इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र में इतने कम समय में रिकॉर्ड 177 देशों का समर्थन मिला, जो विश्व के इतिहास में किसी भी प्रस्ताव के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी।


 

12. ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज (G20 की सफल अध्यक्षता)

भारत ने अपनी G20 अध्यक्षता के दौरान ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की आवाज बनकर खुद को दुनिया के सामने एक निष्पक्ष और मजबूत नेतृत्वकर्ता के रूप में प्रस्तुत किया। G20 की सफल अध्यक्षता भारत के लिए एक कूटनीतिक मील का पत्थर रही है, जिसमें भारत ने ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की आवाज बनकर वैश्विक राजनीति में अपनी नेतृत्व क्षमता को सिद्ध किया है।

ये 12 कदम सिर्फ सरकार के फैसले नहीं हैं, बल्कि यह भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक हैं। इन 12 वर्षों में भारत ने यह सिद्ध किया है कि वह अब दुनिया का इंतजार नहीं करता, बल्कि दुनिया के लिए एजेंडा सेट करता है। शायद यही वजह है कि दुनिया भर में भारत की अलग ही पहचान बनी हुई है।


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