

रुद्रपुर देहरादून।प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा ग्राम समाज की करीब 25 बीघा भूमि को फर्जी दस्तावेजों और कथित जाली न्यायिक आदेशों के जरिए हड़पने के मामले में की गई कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है। देहरादून सब-ज़ोनल कार्यालय ने मुख्य आरोपित विजय खन्ना और बलविंदर जीत स्याल के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) कोर्ट में सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल कर यह संदेश दिया है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और मनी लॉन्ड्रिंग के खेल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
ईडी की जांच उत्तराखंड पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी, जिसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। जांच में सामने आया कि विकासनगर तहसील के बंशीवाला गांव में ग्राम समाज की भूमि को हड़पने के लिए राजस्व अभिलेखों में कथित हेरफेर किया गया और एसडीएम कोर्ट के नाम से फर्जी आदेश तैयार किए गए।
आरोप है कि विजय खन्ना और उसके सहयोगियों ने इस जमीन को निजी संपत्ति दिखाकर पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए बेच भी दिया, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में जमीन ग्राम समाज के नाम ही दर्ज रही। ईडी ने इस मामले में लगभग 75 लाख रुपये की अचल संपत्ति अटैच कर दी है और आगे की जांच जारी है।
यह कार्रवाई बताती है कि अगर एजेंसियां निष्पक्ष होकर काम करें तो बड़े से बड़ा जमीन घोटाला भी उजागर हो सकता है।
❓ लेकिन बड़ा सवाल: रुद्रपुर और उधम सिंह नगर में कब होगी ऐसी कार्रवाई?
जहां एक ओर देहरादून में ईडी की सख्ती दिखाई देती है, वहीं दूसरी ओर रुद्रपुर और उधम सिंह नगर में नजूल भूमि पर वर्षों से चल रहे कथित बड़े-बड़े कब्जों पर सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
स्थानीय स्तर पर लगातार आरोप लगते रहे हैं कि—
नजूल भूमि के बड़े भूखंडों पर प्रभावशाली लोगों ने कब्जे किए
सत्ता से जुड़े नेताओं और कुछ नौकरशाहों की मिलीभगत से फाइलें दबाई गईं
जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती रही
अगर देहरादून में 25 बीघा भूमि पर कार्रवाई हो सकती है, तो रुद्रपुर में सैकड़ों बीघा नजूल भूमि के मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं?
सरकार का दोहरा चरित्र?
यह स्थिति सीधे तौर पर सरकार के दोहरे रवैये की ओर इशारा करती है—
एक ओर चुनिंदा मामलों में सख्त कार्रवाई कर “ज़ीरो टॉलरेंस” का संदेश
दूसरी ओर बड़े और प्रभावशाली कब्जाधारियों पर चुप्पी
क्या कानून सिर्फ कमजोर लोगों के लिए है?
क्या प्रभावशाली लोगों पर कार्रवाई से सरकार बच रही है?
क्या जांच एजेंसियों पर भी कहीं न कहीं दबाव है?
देहरादून में ईडी की कार्रवाई निश्चित रूप से स्वागत योग्य है और इससे उम्मीद जगी है कि सरकारी जमीनों की लूट पर लगाम लगेगी।
लेकिन जब तक रुद्रपुर और उधम सिंह नगर जैसे क्षेत्रों में नजूल भूमि घोटालों पर समान रूप से सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह लड़ाई अधूरी ही मानी जाएगी।
सरकार को अब जवाब देना होगा—क्या कानून सबके लिए बराबर है, या फिर रसूखदारों के लिए अलग नियम हैं?




