

मध्य पूर्व में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में हुई करीब 21 घंटे लंबी अहम वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कहा कि परमाणु हथियारों के मुद्दे पर अमेरिका अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा, जबकि ईरान ने अपनी शर्तों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इससे क्षेत्र में एक बार फिर युद्ध का खतरा गहराने लगा है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
इस बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब में अपने लड़ाकू विमान तैनात कर दिए हैं, जो दोनों देशों के रक्षा समझौते के तहत बड़ा कदम माना जा रहा है। इस तैनाती से संकेत मिल रहे हैं कि यदि सऊदी अरब पर हमला होता है तो पाकिस्तान भी इस संघर्ष में उतर सकता है। वहीं चीन द्वारा ईरान को संभावित सैन्य सहायता की खबरों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर संतुलित रुख अपनाया है। भारत क्षेत्रीय शांति, ऊर्जा आपूर्ति और अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।
अगर नुकसान की बात करें तो इस संघर्ष में अब तक भारी जनहानि हुई है। ईरान में करीब 3000 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान में 1953 और इजराइल में 23 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। खाड़ी के अन्य देशों में भी एक दर्जन से अधिक लोगों की जान गई है। अमेरिका को प्रत्यक्ष जनहानि कम हुई है, लेकिन सैन्य और आर्थिक स्तर पर भारी दबाव बना हुआ है। इसके अलावा क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है और वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, वार्ता विफल होने के बाद मध्य पूर्व एक बार फिर अस्थिरता के दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां किसी भी समय हालात और बिगड़ सकते हैं।




