

रुद्रपुर देहरादून/देवभूमि उत्तराखंड में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम अब गंभीर विवाद का रूप ले चुका है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी के बाद जैसे ही वह मंच से रवाना हुए, हरियाणवी गायक मासूम शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने मंच से आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इस घटना ने न केवल स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आक्रोशित किया, बल्कि इसे हरियाणा की सांस्कृतिक मानसिकता से जोड़कर भी देखा जाने लगा है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
नेहरू कॉलोनी और डालनवाला थानों में चार पार्षदों द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई है, जबकि कांग्रेस नेता सुधांशु नोडियाल ने भी श्रीनगर कोतवाली पहुंचकर गायक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि इस प्रकार की भाषा देवभूमि की मर्यादा और सामाजिक मूल्यों के खिलाफ है।
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब हरियाणा महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मासूम शर्मा को नोटिस जारी कर 18 अप्रैल को पंचकूला स्थित कार्यालय में पेश होने के निर्देश दिए। आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया ने स्पष्ट किया कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह महिलाओं की गरिमा और सामाजिक आचरण के लिए गंभीर खतरा है।
हालांकि विवाद बढ़ने पर मासूम शर्मा ने एक वीडियो जारी कर माफी मांगी है। उन्होंने दावा किया कि वह मानसिक तनाव में थे, क्योंकि एक संदिग्ध व्यक्ति उन्हें लगातार परेशान कर रहा था। उनके भाई ने तो यहां तक आरोप लगाया कि एक गैंगस्टर हथियारों के साथ देहरादून तक पहुंच गया था।
लेकिन बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या बार-बार मंचों पर गन कल्चर, आक्रामक भाषा और विवादित बयानों को बढ़ावा देना हरियाणा की एक उभरती सांस्कृतिक पहचान बनता जा रहा है? इससे पहले भी मासूम शर्मा पर गन कल्चर को बढ़ावा देने, महिलाओं से जुड़े आरोपों और मंचीय विवादों के मामले सामने आ चुके हैं।
देवभूमि उत्तराखंड, जो अपनी शालीनता, आध्यात्मिकता और मर्यादा के लिए जानी जाती है, वहां इस तरह की घटनाएं बाहरी सांस्कृतिक प्रभावों पर भी सवाल खड़े करती हैं। यह विवाद केवल एक गायक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता पर भी बहस छेड़ता है, जहां मनोरंजन के नाम पर भाषा और व्यवहार की सीमाएं लगातार टूटती जा रही हैं।
अब देखना होगा कि कानून और सामाजिक दबाव के बीच यह मामला किस दिशा में जाता है, और क्या यह विवाद भविष्य में मंचीय आचरण की मर्यादाओं को तय करने का आधार




