रुद्रपुर में बेदखली नोटिस पर बवाल: संजय कॉलोनी और मस्जिद कॉलोनी के सैकड़ों परिवार सड़कों पर, पुनर्वास से पहले कार्रवाई न करने की मांग

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रुद्रपुर। पंतनगर क्षेत्र की संजय कॉलोनी और मस्जिद कॉलोनी में रहने वाले सैकड़ों परिवारों को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अतिक्रमण का नोटिस दिए जाने के बाद मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। दशकों से बसे लोगों के सामने अचानक उजड़ने का खतरा खड़ा हो गया है, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश और असुरक्षा का माहौल बन गया है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


शुक्रवार को बड़ी संख्या में कॉलोनीवासी पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट मांग रखी कि बिना पुनर्वास के किसी भी हालत में बेदखली की कार्रवाई न की जाए।
60 वर्षों से रह रहे परिवारों पर अचानक नोटिस
ज्ञापन में कॉलोनीवासियों ने बताया कि वे पिछले 60-65 वर्षों से उक्त भूमि पर निवास कर रहे हैं। उनके पास वोटर आईडी, राशन कार्ड, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और बिजली बिल जैसे दस्तावेज मौजूद हैं, जो उनके लंबे समय से यहां रहने का प्रमाण देते हैं।
निवासियों का कहना है कि इतने वर्षों में उन्हें कभी बेदखली का नोटिस नहीं मिला, लेकिन 13 अप्रैल को पंतनगर विश्वविद्यालय के परिसंपत्ति अधिकारी द्वारा घर-घर नोटिस चस्पा कर 30 अप्रैल तक मकान खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया गया। नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि तय समय सीमा तक मकान खाली न करने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी और उसका खर्च भी निवासियों से ही वसूला जाएगा।
“बिना पुनर्वास नहीं हटने देंगे” – राजेश शुक्ला
कलेक्ट्रेट परिसर में कॉलोनीवासियों को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने प्रशासन को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि उनके रहते किसी भी सूरत में इन कॉलोनियों को उजड़ने नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन कार्रवाई करना चाहता है तो पहले प्रभावित परिवारों के लिए समुचित पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि वर्षों से निवास कर रहे लोगों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के हटाना न्यायसंगत नहीं है।
वनभूलपुरा और बिंदुखत्ता का दिया उदाहरण
शुक्ला ने हल्द्वानी के वनभूलपुरा और बिंदुखत्ता का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सरकार सर्वे कर पुनर्वास और मालिकाना हक देने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य स्थानों पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है, तो पंतनगर के इन परिवारों के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है।
“यह सिर्फ जमीन नहीं, सैकड़ों परिवारों का भविष्य है”
उन्होंने प्रशासन से संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने की अपील करते हुए कहा कि यह केवल जमीन का मुद्दा नहीं है, बल्कि सैकड़ों परिवारों के आशियाने, रोजगार और भविष्य का सवाल है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे को शासन स्तर तक मजबूती से उठाया जाएगा और समाधान निकलने तक वे कॉलोनीवासियों के साथ खड़े रहेंगे।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
इस दौरान अल्केश सिंह, सुमित कुमार, राजू ठाकुर, नींबू लाल, छोटे लाल, राज देवी, मोनू गुप्ता, फिरोज, निसार, मन्ना देवी, हरीश पाल, हरेंद्र यादव, रहीम, रईस, कमलेश, जहीर, रिजवाउद्दीन, सुभान, शरीफ वारसी, विवेक, वीरेंद्र, विश्वकर्मा, धर्मेंद्र, फातिमा, सद्दाम, समीर, राजेश यादव, सावित्री देवी सहित हजारों लोग मौजूद रहे।

रुद्रपुर में संजय कॉलोनी और मस्जिद कॉलोनी का मामला अब सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। प्रशासन के सामने एक ओर भूमि प्रबंधन की चुनौती है, तो दूसरी ओर वर्षों से बसे सैकड़ों परिवारों के पुनर्वास और अधिकारों का सवाल खड़ा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने के संकेत दे रहा है।


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