मकरंदपुर में महामाया काली पूजा और मुडिया खानपुर में अखण्ड महानाम संकीर्तन महोत्सव—पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल की मौजूदगी में भक्ति, आस्था और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम

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रूद्रपुर।जनपद उधम सिंह नगर के ग्रामीण अंचलों में इन दिनों धार्मिक आयोजनों की धूम है। निकटवर्ती ग्राम मकरंदपुर में आयोजित श्री श्री महामाया काली पूजा महोत्सव और ग्राम मुडिया खानपुर में आयोजित अखण्ड महानाम संकीर्तन महोत्सव ने क्षेत्र में भक्ति, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का वातावरण निर्मित कर दिया। दोनों ही आयोजनों में पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता राजकुमार ठुकराल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत कर न केवल धार्मिक परंपराओं को सम्मान दिया, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का संदेश भी दिया।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड) रही थी।


मकरंदपुर में गूंजा “जय मां काली” का उद्घोष
ग्राम मकरंदपुर में आयोजित श्री श्री महामाया काली पूजा महोत्सव पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। गांव का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा था। चारों ओर मां काली के जयकारों की गूंज और भक्ति गीतों की मधुर ध्वनि से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल का आयोजकों और ग्रामीणों द्वारा भव्य स्वागत किया गया। उन्हें अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। स्वागत के दौरान पूरे आयोजन स्थल पर उत्साह का माहौल देखने को मिला।
राजकुमार ठुकराल ने मां काली के चरणों में मत्था टेककर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मां काली शक्ति की प्रतीक हैं और उनकी पूजा भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान रखती है।
उन्होंने कहा—
“ऐसे धार्मिक आयोजन हमारी आस्था को मजबूत करते हैं और समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। यह आयोजन हमें हमारी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हैं तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों की पहचान कराते हैं।”
उन्होंने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि इतने भव्य और व्यवस्थित कार्यक्रम का आयोजन करना समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
पूजा महोत्सव के दौरान आयोजित भंडारे में भारी संख्या में ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान गांव के हर वर्ग के लोग—बुजुर्ग, महिलाएं, युवा और बच्चे—सभी एक साथ दिखाई दिए, जो सामाजिक एकता का प्रतीक था।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोगों में
आशीष बाला, गौरव मण्डल, प्रभाष मण्डल, कृष्ण हाल्दार, सपन स्वर्णकार, हरिदास घोष, दिनेश हाल्दार, डा. प्रदीप, रविन्द्र मण्डल, दिलीप सरकार, आनंद सरकार, अपून विश्वास, करन सिंह, किशन लाल, बरीत सिंह, शुभम राय, डा. कार्तिक, संजू दास, शंकर ढाली, गौतम घरामी, संजय ठुकराल, अंकित बठला, नित्यानंद सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
मुडिया खानपुर में अखण्ड महानाम संकीर्तन—भक्ति में डूबा जनसमूह
इसी क्रम में ग्राम मुडिया खानपुर में आयोजित अखण्ड महानाम संकीर्तन महोत्सव ने भी क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का वातावरण बना दिया। यहां भक्ति की ऐसी बयार बही कि हर व्यक्ति मंत्रमुग्ध हो गया।
कार्यक्रम में विभिन्न कीर्तन मंडलियों ने अपनी मधुर और भावपूर्ण प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। ढोल, मंजीरे और हारमोनियम की धुन पर गाए गए भजन पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना रहे थे।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे राजकुमार ठुकराल का यहां भी जोरदार स्वागत किया गया। मंदिर समिति और ग्रामीणों ने उन्हें स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
“कलयुग में नाम संकीर्तन ही सबसे सरल मार्ग”—ठुकराल
अपने संबोधन में राजकुमार ठुकराल ने कहा—
“कलयुग में भगवान की प्राप्ति का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम नाम संकीर्तन है। यह मन को शांति देता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है।”
उन्होंने कहा कि महानाम संकीर्तन जैसे आयोजन न केवल आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाते हैं बल्कि समाज में प्रेम, भाईचारा और सद्भाव को भी मजबूत करते हैं।
उन्होंने ग्रामीणों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन क्षेत्र में सकारात्मक वातावरण का निर्माण करते हैं और लोगों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं।
क्षेत्र की उन्नति और स्वास्थ्य के लिए की प्रार्थना
राजकुमार ठुकराल ने भगवान के चरणों में मत्था टेककर क्षेत्र की उन्नति, समृद्धि और सभी लोगों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने कहा कि समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब उसमें आपसी प्रेम और सहयोग की भावना हो।
अन्य वक्ताओं ने भी रखे विचार
इस अवसर पर दर्जा राज्य मंत्री उत्तम दत्ता और जिला पंचायत सदस्य सुखदेव हाल्दार ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और समाज में नैतिक मूल्यों को बनाए रखने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी संस्कृति की धरोहर हैं और इन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है।
ग्रामीणों की भागीदारी बनी कार्यक्रम की खासियत
मुडिया खानपुर के इस आयोजन में गांव के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख लोगों में
ग्राम प्रधान सुमंगल राय, हरे कृष्ण दास, विजय सिकदार, दीपक गाइन, विद्युत सिकदार, गोपाल, श्यामली ढाली, सत्यजीत, आनंद मण्डल, अजीत मण्डल, बाबू पाण्डे, प्रभाष वसु, तपन सिकदार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
धार्मिक आयोजनों से मजबूत हो रहा सामाजिक ताना-बाना
दोनों गांवों में आयोजित इन धार्मिक कार्यक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया कि ग्रामीण समाज आज भी अपनी संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसे आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होते, बल्कि यह सामाजिक एकता, सांस्कृतिक जागरूकता और सामूहिक सहभागिता के प्रतीक होते हैं।
इन आयोजनों में जिस तरह से सभी समुदायों और वर्गों के लोग एक साथ शामिल हुए, वह समाज में भाईचारे और सद्भाव का संदेश देता है।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
इन कार्यक्रमों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि इसमें युवाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। युवा वर्ग न केवल आयोजन में शामिल हुआ बल्कि व्यवस्थाओं में भी सक्रिय भूमिका निभाता नजर आया।
यह इस बात का संकेत है कि आने वाली पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझ रही है और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए तत्पर है।


मकरंदपुर का महामाया काली पूजा महोत्सव और मुडिया खानपुर का अखण्ड महानाम संकीर्तन महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं थे, बल्कि यह सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण और आध्यात्मिक जागरूकता के जीवंत उदाहरण बनकर उभरे।
पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल की उपस्थिति ने इन आयोजनों को और अधिक गरिमा प्रदान की। उनके संदेशों ने यह स्पष्ट किया कि धर्म केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और सकारात्मक दिशा देने का माध्यम भी है।
इन आयोजनों ने यह साबित कर दिया कि यदि समाज एकजुट होकर अपनी परंपराओं को जीवित रखे, तो न केवल सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहती है, बल्कि समाज में शांति, प्रेम और विकास का मार्ग भी प्रशस्त होता है।


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