देश के बाकी 3 राज्यों और एक केंद्र प्रशासित प्रदेश के साथ पश्चिम बंगाल में असेंबली चुनाव के लिए 4 मई को वोटों की काउंटिंग होनी जा रही है.

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कौन जीतेगा-कौन हारेगा, इसे लेकर सभी प्रत्याशियों के दिलों की धड़कन बढ़ी हुई है. बंगाल में बीजेपी और टीएमसी, अपनी-अपनी जीत को लेकर दावे कर रहे हैं. राज्य में असेंबली की कुल 294 सीटें हैं, जिसमें सरकार बनाने के लिए 148 सीटों की जरूरत होती है.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

टीएमसी मुखिया ममता बनर्जी ने दावा किया है किया है कि उनकी पार्टी 4 मई को 200 से ज्यादा सीटें जीतने जा रही है. उन्होंने एग्जिट पोल्स को ‘शेयर मार्केट मैनिपुलेशन’ करार देकर खारिज कर दिया. हालांकि राजनीतिक पंडित इस दावे को दूर की कौड़ी बता रहे हैं. उनका मानना है कि ममता के सामने SIR, एंटी इनकम्बेंसी, बीजेपी का धुआंधार प्रचार जैसे कुछ कारण हैं जो ममता का दावा कमजोर करते हैं. आइए हम आपको वे 5 कारण बताने जा रहे हैं, जो ममता की राह में बड़ा रोड़ा बन सकते हैं.

ममता की राह की 5 रुकावटें:

15 साल की एंटी-इनकम्बेंसी

TMC के सामने सबसे बड़ी बाधा एंटी-इनकम्बेंसी की है. वे 2011 से सत्ता में है. हालांकि, यह पहली बार है, जब उनके खिलाफ 15 साल की सत्ता विरोधी लहर साफ दिख रही है. बेरोजगारी, राजनीतिक हिंसा, महिलाओं की सुरक्षा और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर मतदाता उनसे नाराज दिखाई दिए. अगर उनकी नाराजगी वोटों में बदली तो टीएमसी की नैया डूब सकती है.

SIR का विवाद भारी पड़ा?

मतदाता सूची की विशेष संशोधन प्रक्रिया (SIR) ने TMC को नुकसान पहुंचाया. लाखों संदिग्ध नाम काटे गए और कई नए नाम जोड़े गए. इससे TMC के पारंपरिक वोट बैंक खासकर अल्पसंख्यक प्रभावित हुए. BJP ने इसे ‘घुसपैठियों’ के खिलाफ कार्रवाई बताया, जबकि TMC ने इसे ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया. ऐसे में अपने समर्थक वोटों का कटना बंगाल में TMC की विदाई की वजह बन सकता है.

BJP का धुआंधार प्रचार और रणनीति

BJP ने बंगाल में जीत के लिए 5 साल पहले ही तैयारी शुरू कर दी. बूथ मैनेजमेंट के साथ ही उम्मीदवारों के चयन पर भी बारीकी से ध्यान दिया गया है. पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत बड़े नेताओं को प्रचार के लिए मैदान में उतारा गया. डबल इंजन सरकार, औद्योगीकरण का नारा देकर लोगों को अपने राज्य में ही रोजगार दिलाने का वादा किया गया. जिसने बीजेपी को TMC के मुकाबले काफी मजबूत कर दिया.

चुनाव दर चुनाव बढ़ता चला गया वोट शेयर

बीजेपी पिछले 10 साल से पश्चिम बंगाल में अपनी जड़ मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही थी. वह बेशक राज्य में अब तक अपनी सरकार नहीं बना पाई थी, लेकिन हर चुनाव में उसने अपना वोट शेयर बढ़ाने में जरूर कामयाबी हासिल की. वर्ष 2021 में BJP ने 77 सीटें जीतकर राज्य में मुख्य विपक्षी पार्टी बनी. यह वोट प्रतिशत अगर इसी अनुपात में बीजेपी के फेवर में बढ़ा तो टीएमसी का सूपड़ा साफ हो सकता है.

हाई वोट पर्सेंटेज 92 प्रतिशत दे रहा खतरे की घंटी

राज्य में इस बार वोट पर्सेंटेज 92 प्रतिशत तक रहा है, जो सबसे ज्यादा हाई रहा है. आमतौर पर जब किसी राज्य में वोट पर्सेंटेज अचानक इतना ज्यादा बढ़ जाता है तो उसे मौजूदा सत्ता के खिलाफ माना जाता है. इस तथ्य को देखें तो ममता का दावा संदिग्ध नजर आता है. इसके साथ ही टीएमसी में अंदरुनी असंतोष और प्रशासनिक मशीनरी में नाराजगी भी उनके खिलाफ जा सकती है.


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