यूपी-उत्तराखंड में चुनावी हलचल तेज, बीजेपी ने शुरू किया विधायकों का गुप्त सर्वे

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उत्तराखंड,उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तापमान अभी से बढ़ने लगा है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की रणनीति पर काम तेज कर दिया है। पार्टी ने अपने मौजूदा विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार करना शुरू कर दिया है, वहीं इसका असर अब पड़ोसी राज्य उत्तराखंड की राजनीति में भी दिखाई देने लगा है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड


सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी हाईकमान यह जानने में जुटा है कि किन विधायकों की जनता के बीच पकड़ मजबूत है और किनके खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है। पार्टी का फोकस सिर्फ चुनाव जीतने वाले चेहरों पर है। यही वजह है कि कई मौजूदा विधायकों के टिकट कटने की चर्चा ने संगठन और सरकार दोनों में हलचल बढ़ा दी है।
दो बाहरी एजेंसियों को सौंपी गई जिम्मेदारी
बीजेपी नेतृत्व ने पूरे सर्वे को गोपनीय रखने के लिए इसकी जिम्मेदारी दो बाहरी एजेंसियों को दी है। एजेंसियों की टीमें यूपी और उत्तराखंड के कई जिलों में चुपचाप लोगों से बातचीत कर रही हैं। गांवों, कस्बों और शहरी इलाकों में जाकर जनता से विधायकों के व्यवहार, सक्रियता और विकास कार्यों पर फीडबैक लिया जा रहा है।
इसके साथ ही संभावित नए उम्मीदवारों की लोकप्रियता, जातीय समीकरण और सामाजिक प्रभाव का भी आकलन किया जा रहा है। पार्टी का मकसद साफ है—जिस उम्मीदवार की जीत की संभावना सबसे ज्यादा होगी, उसी पर दांव लगाया जाएगा।
मुरादाबाद मंडल बना बीजेपी की सबसे बड़ी चिंता
बीजेपी के अंदरूनी सर्वे में सबसे ज्यादा चिंता मुरादाबाद मंडल को लेकर सामने आई है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को यहां की 27 सीटों में से 14 पर जीत मिली थी, लेकिन 2022 में यह आंकड़ा घटकर 10 पर आ गया। यही गिरावट अब पार्टी नेतृत्व की टेंशन बढ़ा रही है।
पश्चिमी यूपी के इस इलाके का असर उत्तराखंड की सीमावर्ती राजनीति पर भी पड़ता है। खासकर ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार जैसे जिलों में पश्चिमी यूपी का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव काफी मजबूत माना जाता है। ऐसे में बीजेपी यहां किसी तरह की कमजोरी नहीं छोड़ना चाहती।
उत्तराखंड में भी एक्टिव हुआ संगठन
उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन यूपी में चल रहे सर्वे और टिकट समीक्षा अभियान के बाद वहां का संगठन भी सक्रिय हो गया है। पार्टी के भीतर जनप्रतिनिधियों की परफॉर्मेंस को लेकर फीडबैक जुटाया जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो उत्तराखंड बीजेपी भी उन सीटों पर विशेष फोकस कर रही है जहां पिछले चुनाव में जीत का अंतर कम रहा था या स्थानीय स्तर पर असंतोष की खबरें सामने आई थीं। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami सरकार की योजनाओं की जमीनी स्थिति को लेकर भी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
संघ और सांसदों की राय होगी अहम
बीजेपी संगठन जिला और क्षेत्रवार संभावित उम्मीदवारों की अलग सूची तैयार कर रहा है। इस प्रक्रिया में स्थानीय सांसदों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की राय को भी अहमियत दी जा रही है।
बताया जा रहा है कि बाहरी एजेंसियों की रिपोर्ट और संगठन की सूची का मिलान किया जाएगा। जिन नामों पर दोनों स्तर पर सहमति बनेगी, उनके टिकट लगभग तय माने जाएंगे। वहीं जिन विधायकों के खिलाफ लगातार नकारात्मक फीडबैक मिल रही है, उनका टिकट कटना लगभग तय माना जा रहा है।
योगी सरकार की योजनाओं पर भी हो रहा आकलन
यह सर्वे सिर्फ विधायकों तक सीमित नहीं है। पार्टी जनता के बीच Yogi Adityanath सरकार की योजनाओं और नौ साल के कामकाज को लेकर भी माहौल समझने की कोशिश कर रही है।
बीजेपी यह जानना चाहती है कि किन इलाकों में सरकार की योजनाओं का असर सबसे ज्यादा है और कहां एंटी-इनकंबेंसी का खतरा बढ़ रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि समय रहते कमजोरियों की पहचान कर रणनीति मजबूत की जा सकती है।
विपक्ष भी पूरी तरह अलर्ट
बीजेपी की इस कवायद के बाद विपक्षी दल भी सक्रिय हो गए हैं। Samajwadi Party अंदरखाने सर्वे के जरिए मजबूत उम्मीदवारों की तलाश में जुटी है। वहीं Indian National Congress पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड की कुछ सीटों पर निजी एजेंसियों के जरिए रिपोर्ट तैयार करा रही है।
दूसरी ओर Bahujan Samaj Party कई सीटों पर अपने प्रभारियों और संभावित प्रत्याशियों के नाम घोषित कर चुकी है। वहीं Azad Samaj Party भी दूसरे दलों के नाराज नेताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिशों में लगी हुई है।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों राज्यों में चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है। टिकट का गणित, जातीय समीकरण, जनता का मूड और गुप्त सर्वे रिपोर्ट आने वाले समय में कई बड़े नेताओं की राजनीतिक किस्मत तय करने वाले हैं।


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