उस वक्त 16 सांसदों के साथ चंद्रबाबू नायडू की तेलगू देशम पार्टी (TDP) और 12 सांसदों के साथ नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) ‘किंगमेकर’ बनकर उभरे थे। पूरे देश में ऐसा माना जा रहा था कि तीसरी बार बनी मोदी सरकार की असली चाबी इन्हीं दोनों दिग्गजों के हाथ में है और इनके बिना एनडीए (NDA) का बहुमत कभी भी खतरे में पड़ सकता है। लेकिन, अब 2026 आते-आते देश का सियासी समीकरण पूरी तरह से बदल चुका है। पहले पश्चिम बंगाल और फिर महाराष्ट्र में एक ऐसा जबरदस्त राजनीतिक भूचाल आया है, जिसने न सिर्फ मोदी सरकार को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर दिया है, बल्कि नायडू और नीतीश पर सरकार की निर्भरता को भी पूरी तरह खत्म कर दिया है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’: उद्धव गुट में कर दी सबसे बड़ी सेंधमारी
हाल ही में महाराष्ट्र की सियासत में ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली असली शिवसेना ने उद्धव ठाकरे गुट (UBT) को अब तक का सबसे तगड़ा झटका दिया है। उद्धव गुट के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों ने अचानक पाला बदलते हुए एकनाथ शिंदे गुट का दामन थाम लिया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपकर इन सभी सांसदों ने आधिकारिक तौर पर अपना गुट बदल लिया है।
शिंदे गुट में शामिल होने वाले इन 6 सांसदों के नाम हैं:
- धाराशिव से ओमप्रकाश राजेनिंबालकर
- हिंगोली से नागेश पाटिल आष्टीकर
- परभणी से संजय हरिभाऊ जाधव
- मुंबई उत्तर पूर्व से संजय दीना पाटिल
- शिरडी से भाऊसाहेब वाकचौरे
- यवतमाल-वाशिम से संजय देशमुख
इस बड़ी बगावत के बाद लोकसभा में उद्धव गुट (UBT) के पास अब नाममात्र के केवल 3 सांसद बचे हैं, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर सीधे 13 हो गई है। दल-बदल कानून के चंगुल से बचने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी, जिसे इन 6 सांसदों ने एक साथ आकर आसानी से पार कर लिया।
बंगाल में तो महाखेला हो गया! NDA की दूसरी सबसे बड़ी ताकत बनी NCPI
उधर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। लोकसभा में टीएमसी के 29 सांसदों में से 20 सांसदों ने ममता बनर्जी और उनके भतीजे व पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ खुला विद्रोह कर दिया है। इस ऐतिहासिक बगावत की अगुवाई बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार और बीरभूम से सांसद शताब्दी रॉय जैसी कद्दावर महिला नेता कर रही हैं। इन सभी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपकर आधिकारिक तौर पर एनडीए सरकार को अपना समर्थन देने का ऐलान कर दिया है।
दल-बदल कानून के तहत अपनी संसद सदस्यता रद्द होने के खतरे से बचने के लिए इन बागी सांसदों ने एक बेहद शातिर रणनीतिक कदम उठाया। कानून के मुताबिक दल-बदल की कार्रवाई से बचने के लिए दो-तिहाई सांसदों का एक साथ किसी दल में विलय करना जरूरी था। इसीलिए इन सभी ने ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) नामक एक बेहद कम चर्चित और गैर-मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी में अपने पूरे गुट का विलय कर लिया। साल 2023 के आसपास पंजीकृत हुई यह गुमनाम सी पार्टी रातों-रात भारतीय राजनीति के सबसे बड़े केंद्र में आ गई है। 20 सांसदों के इस विलय के साथ ही यह अब लोकसभा में देश की पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी और एनडीए के कुनबे में बीजेपी के बाद दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी बनकर उभरी है।
NDA का नया और मजबूत अंकगणित: कैसे खत्म हुआ ‘किंगमेकर्स’ का दबाव?
एकनाथ शिंदे के 6 नए सांसदों और पश्चिम बंगाल से आई NCPI के 20 सांसदों के एनडीए में शामिल होने के बाद, गठबंधन का कुल आंकड़ा लोकसभा में चट्टान की तरह मजबूत हो गया है। साल 2024 में सरकार गठन के समय एनडीए के पास लगभग 293 सांसद थे, जो अब बढ़कर सीधे 318 के पार पहुंच गया है।
ऐसे में देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति यह हो गई है कि अगर आज चंद्रबाबू नायडू (16 सांसद) और नीतीश कुमार (12 सांसद) किसी बात पर नाराज हो जाएं और एनडीए से अपना समर्थन वापस भी ले लें, तब भी इन नए बागी सांसदों और अन्य छोटे दलों के दम पर मोदी सरकार पूर्ण बहुमत (272) के जादुई आंकड़े से बहुत ऊपर रहेगी। यानी अब सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा और ‘किंगमेकर्स’ का दबाव पूरी तरह से खत्म हो चुका है।
दिल्ली से मुंबई तक बढ़ा सीएम शिंदे का रुतबा
इस पूरे सियासी चक्रव्यूह ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के अंदर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का कद बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। साल 2022 में विधायकों की ऐतिहासिक बगावत के जरिए शिवसेना में दो फाड़ करने के बाद, अब 2026 में लोकसभा के भीतर भी शिंदे ने यह पूरी तरह साबित कर दिया है कि ‘असली शिवसेना’ सिर्फ और सिर्फ उन्हीं की है और जमीन से जुड़े तमाम बड़े नेताओं का समर्थन उनके साथ है।
क्या ‘ऑपरेशन टाइगर’ के मास्टरमाइंड श्रीकांत शिंदे को मिलेगा मंत्री पद का इनाम?
उद्धव गुट के सांसदों को एक-एक करके तोड़ने वाले इस बेहद सीक्रेट मिशन ‘ऑपरेशन टाइगर’ को कामयाबी के अंजाम तक पहुंचाने का पूरा श्रेय किसी और को नहीं, बल्कि एकनाथ शिंदे के बेटे और कल्याण लोकसभा सीट से लगातार तीसरी बार सांसद चुने गए डॉ. श्रीकांत शिंदे को दिया जा रहा है। अंदरखाने से आ रही रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कई महीनों से श्रीकांत शिंदे ही दिल्ली से लेकर मुंबई तक इस पूरे ऑपरेशन की स्क्रिप्ट लिख रहे थे। बागी सांसदों को सुरक्षित दिल्ली लाने के लिए चार्टर्ड विमान बुक करने से लेकर उनकी सुरक्षा और स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात करवाने तक का पूरा जिम्मा श्रीकांत शिंदे ने खुद अपने कंधों पर संभाला था।
अब दिल्ली के सियासी गलियारों में यह चर्चा बहुत जोरों पर है कि मोदी सरकार में जल्द ही होने वाले कैबिनेट विस्तार में शिवसेना (शिंदे गुट) को इसका एक बहुत बड़ा रिटर्न गिफ्ट मिल सकता है। एनडीए के कुनबे में 6 नए मजबूत सांसद जोड़ने और सरकार को बिना शर्त स्थिरता प्रदान करने के इनाम के तौर पर डॉ. श्रीकांत शिंदे को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर मंत्री बनाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो यह आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उद्धव ठाकरे के खिलाफ शिंदे गुट के लिए एक बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक जीत होगी।
बंगाल में क्या ममता बनर्जी का ‘एंडगेम’ शुरू हो गया है?
दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए यह घटना किसी डरावने सपने से कम नहीं है। एक तरफ राज्य विधानसभा में उनके 60 से ज्यादा विधायकों ने अलग गुट बना लिया है और बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत कर चुकी है। वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली की संसद में उनकी पार्टी के दो-तिहाई से ज्यादा सांसद छिटक कर उस एनडीए के पाले में जाकर बैठ गए हैं, जिसके खिलाफ ‘दीदी’ ने पिछले एक दशक से देश में सबसे मुखर और आक्रामक राजनीति की है।
