ये बात खुद अरुणाचल प्रदेश के एक आदिवासी समुदाय ने बताई है। चीन के विश्वासघात की यह पोल नाह समुदाय ने खोल कर रख दी है। उनका दावा है कि चीन ने भारत की सीमा के अंंदर सड़कें और मिलिट्री कैंप बना लिए हैं।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
अरुणाचल के नाह समुदाय ने चीन के घुसपैठ के बारे में बताया
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश के ‘नाह’ आदिवासी समुदाय ने चीन की भारत के सीमावर्ती गांवों में घुसपैठ को लेकर यह चिंता जताई है। चीन का यह विश्वासघात अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हो रहा है। अरुणाचल प्रदेश के नाह समुदाय का दावा है कि पिछले छह सालों में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने उनके पशु चराने, शिकार करने और खेती करने वाली जमीन के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है।
हमारी पुश्तैनी जमीनें अब चीन के कब्जे में
रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में अपर सुबनसिरी के डिप्टी कमिश्नर को सौंपे गए एक ज्ञापन में नाह वेलफेयर सोसाइटी (NWS) के अध्यक्ष केरू चाडर ने कहा, ‘हमारी पुश्तैनी जमीनें अब चीनी PLA के कब्जे में हैं।’ नाह समुदाय ने बताया कि ये हड़पी गईं जमीनें जो शिकार के इलाके थे और जहां हम कुछ साल पहले तक आजादी से घूमते थे और जंगल से उपज जुटाते थे और हमारे मवेशियों के चरने के इलाके हैं।
‘PLA ने भारत के अंदर सड़कें और कैंप बनाए हैं’
मेमोरेंडम में यह भी आरोप लगाया गया है कि चीनी सेना ने भारतीय इलाके में मिलिट्री कैंप और सड़कें बनाई हैं। चाडर ने मेमोरेंडम में कहा, ‘हमें अपनी सेना पर कोई शक नहीं है और हम हमेशा उन पर भरोसा करते हैं। वे कई सालों से हमारी जमीन की रक्षा कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोशिशें काफी नहीं हैं। टक्सिंग इलाके में चीनी PLA की मौजूदा गतिविधियों का मकसद और रफ्तार बहुत चिंताजनक है और यह हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय है। हम दिन-ब-दिन अपनी जमीन इंच-दर-इंच उनके हाथों गंवा रहे हैं।’
चीन ने पांच जगहों पर ऐसी जगहें ‘हड़पीं’
NWS ने पांच जगहों पर चीन की गतिविधियों का आरोप लगाया, जो उनके अनुसार अपर सुबनसिरी में टक्सिंग रेवेन्यू सर्कल के तहत आती हैं। उन्होंने कहा कि चीनी सरकार रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जगहों पर कब्जा करके अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास के इलाकों पर तेजी से अपना नियंत्रण बढ़ा रही है।
यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है
- नाचो के MLA नकाप नालो ने कहा कि इस मामले की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। नालो ने कहा, ‘प्रशासन को इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि करनी होगी।’ उन्होंने आगे कहा, ‘इन आरोपों को लेकर चिंताएं हैं, क्योंकि यह एक राष्ट्रीय मुद्दा है।’ घुसपैठ की घटनाओं का ब्योरा देते हुए NWS ने आरोप लगाया कि चीन ने पिछले 10 से 15 सालों में टक्सिंग सीमा क्षेत्र में अपनी गतिविधियां काफी बढ़ा दी हैं, जिसका मकसद ‘ज्यादा से ज्यादा जमीन पर कब्जा करना’ है।
- चीन मामलों पर नजर रखने वाले डिफेंस एनालिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी ने बताया कि चीन की विस्तारवादी नीति कभी रुक नहीं सकती है। यह चीन के नस-नस में है। चीन पर भारत को कभी भी भरोसा नहीं करना चाहिए। बातचीत की जाए, मगर सीमाई इलाकों को लेकर भारत को बेहद सतर्क रहना होगा।
ये हैं वो पांच जगहें, जहां ड्रैगन धीरे-धीरे निगल रहा
आदिवासी संगठन के नाह के अनुसार, कई ऐसी जगहें जिन पर 2020 तक उनका पारंपरिक नियंत्रण था, उन पर कथित तौर पर PLA ने कब्ज़ा कर लिया है। संगठन ने कहा कि असाफिला इलाके में ओयिंग, पनिआर (चुजार्टा इलाका), मारपन (मारनाफे), पोट्रांग (झील) और टिडिंगटंग (TG) जैसी जगहें धीरे-धीरे चीनी घुसपैठ की चपेट में आ गई हैं। संगठन का आरोप है कि ये जगहें टक्सिंग मुख्यालय के करीब हैं और इनमें से कुछ को तीर्थ स्थल भी माना जाता है।
न जिला प्रशासन और न ही राज्य सरकार की प्रतिक्रियाइस बीच, न तो जिला प्रशासन और न ही राज्य सरकार ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। डिप्टी कमिश्नर गैंबो टैसो समेत ज़िले के वरिष्ठ अधिकारी भी टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हो सके।
