जैसे हिंदू देवी-देवताओं, मंदिरों, त्योहारों, या हिंदू रीति-रिवाजों का मजाक उड़ाना या अपमान करना, धर्म को आधार बनाकर हिंदुओं को पिछड़ा, अंधविश्वासी या खतरनाक बताना, हिंदू मंदिरों पर हमला, तोड़फोड़ करना, मीडिया, किताबों या स्कूलों में हिंदू धर्म को नकारात्मक तरीके से दिखाना. ये सबकुछ हिंदूफोबिया है. अब तक आपने इस्लामोफोबिया का शोर बहुत सुना होगा.
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
आपने सुना होगा कि इस्लाम और मुसलमानों से धर्म के आधार पर नफरत की जाती है. लेकिन जॉर्जिया में जो प्रस्ताव पास हुआ है, उससे साफ होता है कि दुनिया अब ये मान रही है कि हिंदू भी मजहबी नफरत के शिकार हैं, हिंदू भी मजहबी हिंसा और मजहबी कट्टरता के टारगेट पर है. प्रस्ताव हिंदुओं के खिलाफ नफरत, भेदभाव और हिंसा की निंदा करता है. प्रस्ताव में हिंदू परंपराओं को अमेरिकी संस्कृति को समृद्ध करने का श्रेय दिया गया है. हिंदुओं के खिलाफ नफरत और अकादमिक पक्षपात का भी जिक्र किया गया है. हिंदू धर्म को दुनिया के सबसे पुराने और बड़े धर्मों में से एक बताया गया है. प्रस्ताव में कहा गया है कि धार्मिक सहिष्णुता के साथ ही हिंदू समुदाय की सुरक्षा के लिए राज्य प्रतिबद्ध है यानी हिंदुओं को सुरक्षा की गारंटी दी गई है. हिंदूफोबिया के खिलाफ पास किया गया ये प्रस्ताव महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे अमेरिका के एक राज्य ने पास किया है.
हिंदुओं के खिलाफ नफरतों का विरोध करेगा बिल
जॉर्जिया में हिंदूफोबिया का प्रस्ताव पास होने से भारत से बाहर हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और हिंदू से मजहबी नफरत पर सबका ध्यान जाएगा. अब ये तथ्य के तौर पर स्थापित हो गया है कि हिंदू भी मजहबी नफरत के शिकार हैं. जॉर्जिया का हिंदूफोबिया के खिलाफ प्रस्ताव दुनिया भर में हिंदुओं के खिलाफ मजहबी नफरत का विरोध करने वालों के लिए मॉडल बन गया है. दूसरे अमेरिकी राज्य और देश इसे फॉलो कर सकते हैं. इस प्रस्ताव ने अमेरिका और दुनिया में हिंदू समुदाय की सकारात्मक भूमिका को स्वीकार किया है. इससे सनातनी हिंदुओं के सद्भाव और श्रम को सम्मान मिला है. हिंदूफोबिया के खिलाफ ये प्रस्ताव पहली बार 27 मार्च 2023 को जॉर्जिया के सदन में पेश किया गया था. अब इसे पास किया गया है. एक अंतर आपको जरूर समझना चाहिए. जॉर्जिया ने हिंदूफोबिया यानी हिंदुओं के खिलाफ मजहबी नफरत के खिलाफ कोई कानून नहीं बनाया है, बस एक प्रस्ताव पास किया है. यानी अब ये औपचारिक तौर पर माना गया है कि अमेरिका में हिंदू भी मजहबी नफरत के शिकार हैं.
अमेरिका में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा
सनातनधर्मी दुनिया में जहां भी गए, यही भावना साथ लेकर गए. लेकिन कट्टरपंथियों ने इस भावना का सम्मान नहीं किया. एक समुदाय ऊंचे सुर में शोर मचाता रहा कि हम पर जुल्म हो रहा है. इस समुदाय की मजबूत समर्थक लॉबी इस प्रोपेगैंडा को दुनियाभर में फैलाती रही है. आज इस लॉबी को जॉर्जिया में पास हुए हिंदूफोबिया वाले प्रस्ताव को जरूर पढ़ना चाहिए. आज इस लॉबी को ये जानना चाहिए कि हिंदू भी महजबी नफरत और हिंसा के शिकार हैं. FBI की रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में अमेरिका में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की 26 घटनाएं हुईं. ये संख्या छोटी लग सकती है. लेकिन अमेरिका में हिंदू आबादी को देखते हुए ये नंबर बड़ा है. हिंदू संगठनों का ये भी आरोप है कि कई बार हिंदूफोबिया वाली घटनाओं को रिपोर्ट ही नहीं किया जाता है. सितंबर 2024 में न्यूयॉर्क के मेलविले में स्वामी नारायण मंदिर की दीवार पर नफरती मैसेज लिखे गए.
सितंबर 2024 में ही कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटो में मंदिर की दीवार पर हिंदू गो बैक जैसे नारे लिखे गए. मार्च 2025 में कैलिफोर्निया के ही चिनो हिल्स में स्वामी नारायण मंदिर की दीवार पर हिंदू विरोधी नारे लिखे गए थे. समझिए इस्लामोफोबिया के प्रोपेगेंडा के बीच अमेरिका में हिंदुओं के खिलाफ संगठित हिंसा हो रही है. हिंदू मजहबी नफरत के शिकार हो रहे हैं. दुनिया अब समझ गई है कि महजबी नफरत से असली खतरा हिंदुओं को है. इसलिए जॉर्जिया में हिंदूफोबिया के खिलाफ प्रस्ताव हुआ है. ऐसा ही प्रस्ताव अमेरिका के दूसरे राज्यों और दुनिया के दूसरे देशों में भी पास होना चाहिए. क्योंकि सिर्फ अमेरिका ही नहीं यूरोप और दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी हिंदू मजहबी नफरत के शिकार हो रहे हैं.
दुनियाभर में बढ़ते हिंदुफोबिया के मामले
ब्रिटेन में 2025 में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के 182 मामले दर्ज किए गए. बांग्लादेश में अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद हिंदू वहां के इस्लामिक कट्टरपंथियों की हिंसा के शिकार हुए. दीपू चंद्र दास को कट्टरपंथियों की भीड़ ने सड़क पर पीट-पीट कर मार डाला और जला दिया. बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई यूनिटी काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक हिंदुओं के 300 से ज्यादा घर जला दिए गए. 20 से ज्यादा मंदिरों में तोड़फोड़ हुई. ये आंकड़े और ज्यादा हो सकते हैं. कनाडा में नवंबर 2024 में हिंदू मंदिर के बाहर हिंसक झड़प हुई थी. 2023 में ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में मंदिर की दीवार पर हिंदू विरोधी नारे लिखे गए थे. डेनमार्क की सरकार लाउडस्पीकर के जरिए अजान पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है.
डेनमार्क के मंत्री मोर्टन बोडस्कोव ने कहा है कि मस्जिदों के लाउडस्पीकर से होने वाली अजान और उसके प्रसारण को कानूनी तौर पर बैन करने पर विचार हो रहा है. लाउडस्पीकर से होनेवाली अजान को बैन करने के पीछे डेनमार्क का क्या तर्क है उसे भी समझिए. डेनमार्क के नेताओं का कहना है कि लाउडस्पीकर पर अजान जैसी धार्मिक प्रथाएं डेनमार्क की संस्कृति और समाज का हिस्सा नहीं हैं. सार्वजनिक रूप से बढ़ती इस्लामिक प्रथाओं के कारण डेनमार्क के कुछ इलाके इस्लामाबाद जैसे दिखने लगे हैं. यानी ये कट्टरपंथियों के गढ़ बन गए हैं.
जॉर्जिया में हिंदूफोबिया के खिलाफ जो प्रस्ताव पास हुआ है, उसमें अमेरिकी संस्कृति को समृद्ध बनाने में हिंदुओं के योगदान की प्रशंसा की गई है. वही डेनमार्क में सरकार अपनी संस्कृति को बचाने के लिए अजान को बैन करने की तैयारी कर रही है. यही दो संस्कृतियों का फर्क है. यही फर्क अब दुनिया पहचान रही है. इसलिए हिंदूफोबिया का विरोध हो रहा है. और दुनिया इस्लामोफोबिया की मानसिकता से आगे बढ़ रही है
भारत में हिंदुफोबिया?
राम मंदिर में दान चोरी की घटना के बहाने स्वामी प्रसाद मौर्य हिंदूफोबिया वाली सोच को शब्द दे रहे हैं. राममंदिर में दान चोरी की जांच हो रही है. आज 8 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है. देवधन की चोरी करनेवाले ऐसे पापियों का विरोध जरूरी है, विरोध होना भी चाहिए. लेकिन उसकी भाषा स्वामी प्रसाद मौर्य जैसी नहीं होनी चाहिए. दान चोरी जैसे अपराध को आधार बनाकर श्रीराम के खिलाफ अमर्यादित भाषा सनातनियों को स्वीकार नहीं हो सकती है. ऐसी भाषा हिंदूफोबिया के दायरे में आती है. सवाल ये है कि आखिर जिनका नाम ही स्वामी प्रसाद मौर्य है. वो क्यों ऐसी शब्दावली का प्रयोग कर रहे हैं. वो कौन सी सोच है, जो भारत में हिंदूफोबिया को बढ़ावा दे रही है. लोकदल से राजनीति की शुरुआत करनेवाले स्वामी प्रसाद मौर्य 1996 से 2016 तक यानी करीब 20 साल बहुजन समाज पार्टी में रहे. अगस्त 2016 से जनवरी 2022 तक यानी करीब साढ़े पांच साल बीजेपी में रहे. जनवरी 2022 से फरवरी 2024 तक समाजवादी पार्टी में रहे. फरवरी 2024 में समाजवादी पार्टी छोड़ने के बाद उन्होंने अपना राजनीतिक स्टार्टअप राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के तौर पर शुरू किया.
भारत में ‘हिंदू हेट’ के खिलाफ हिंदूफोबिया
40 साल से ज्यादा की अपनी राजनीतिक यात्रा में स्वामी प्रसाद मौर्य ने पार्टियां बदली, विचार बदले, विचारधारा बदली. किसलिए, सत्ता के लिए. अब वो यूपी की राजनीति में हाशिए पर हैं इसलिए कुछ भी बोलकर चर्चा में रहना चाहते हैं. सनातनधर्मी उदार होते हैं, विरोध को भी विमर्श का हिस्सा मानते हैं. इसलिए स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे लोग चर्चा में आने के लिए हिंदूफोबिया को बढ़ावा देते हैं. इस बार उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम के लिए जिन अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया, उसने सामान्य हिंदुओं को ही नहीं साधु संतों को भी आक्रोशित कर दिया है. शांत प्रवृति वाले संतों को भी स्वामी प्रसाद मौर्य की हिंदूफोबिया वाली सोच ने आक्रोशित कर दिया है. ऐसे बयान सिर्फ संतों को ही नहीं सामान्य सनातनियों को भी नाराज करते है. ऐसे ही बयान सामाजिक और धार्मिक विद्वेष को बढ़ाते हैं. इसलिए जरूरी है कि स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे लोगों की जुबानी हिंसा और हिंदू विरोधी सोच को नियंत्रित किया जाए. भारत में भी ‘हिंदू हेट’ के खिलाफ हिंदूफोबिया के खिलाफ सख्त कानून बनाया जाए.
