फिर वो चाहे अंडरवर्ल्ड के डैडी अरुण गवली हो या फिर भारत का अब तक का सबसे बड़ा गैंगस्टर और अंडरवर्ल्ड दुनिया का बेताज बादशाह दाऊद इब्राहिम। हर कोई उसके नाम से खौफ खाने लगा था।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
तो आइए मिलते हैं मुंबई अंडरवर्ल्ड के इसी रावण से जो आज की तारीख 10 अगस्त को एक एनकाउंटर मारा गया था। तो कहानी शुरू होती है दादर सब्जी मंडी से.. 80 के दशक में भी यहां से करोड़ों रुपये का कारोबार होता था। इसी मंडी में अजित नाइक की भी दुकान थी। अजित के पिता ने उसके भाई अमर से भी कहा कि उसे अपने भाई की दुकान पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि अमर गुस्सैल और झगड़ालू किस्म का इंसान था। अब अमर अपने भाई अजित के साथ सब्जी की दुकान चलाने लगा।
यहीं से कहानी ने लिया नया मोड़
इसी सब्जी मंडी में पोटिया गैंग सक्रिया था। ये गैंग वहां काम करने वाले व्यापारियों से हफ्ता वसूलता था। इस बार जब पोटिया गैंग के लोग दादर सब्जी मंडी में हफ्ता वसूली के लिए आए तो उनका सामना अमर से हो गया क्योंकि ये लोग अजित की दुकान पर भी वसूली के लिए पहुंचे थे। अमर ने इन लोगों को एक भी पैसा देने से इनकार कर दिया और यहीं से झगड़े की शुरुआत हुई।
एक दिन पोटिया गैंग के पांच लोगों ने अमर के भाई अजित की पिटाई करनी शुरू कर दी। वो उससे अमर का पता पूछ रहे थे। इसकी खबर जब अमर को लगी तो उससे रहा नहीं गया और उसने उन पांचों को चुनौती दी और जमकर आमना-सामना हुआ। इस दौरान पोटिया गैंग के तीन लोग घायल हो गए और बाकी दो भाग गए। इसके बाद नाइक का सिक्का दादर सब्जी मंडी में चलने लगा।
पोटिया गैंग ने बनाया अमर को सबक सिखाने का प्लान
इधर, पोटिया गैंग को लगने लगा कि उसका दबदबा कम होने लगा है तो ऐसे में ये गैंग अमर को सबक सिखाने का प्लान बनाने लगा। इसके बाद पोटिया गैंग ने अमर के छोटे भाई अश्विन को किडनैप कर लिया और बदले में अमर की डिमांड की। ये बात अमर को नागवार गुजरी और उसने अपने लड़कों को तैयार किया। अमर अपने गैंग के साथ पोटिया गैंग पर धावा बोलने ही वाला था कि अश्विन पोटिया गैंग को चकमा देकर भाग निकला।
अब अमर समझ गया था कि पोटिया गैंग को तोड़ना जरूरी है, नहीं तो ये गैंग आए दिन परेशान करेगा। इस गैंग को तोड़ने के बाद अमर नायक का रुतबा धीरे-धीरे अंडरवर्ल्ड की दुनिया में बढ़ने लगा।
अंडरवर्ल्ड में शुरू हुई वर्चस्व की लड़ाई
इन घटनाओं के बाद अब अंडरवर्ल्ड में वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो चुकी थी। जहां एक तरफ दाऊद इब्राहिम अरुण गवली और उसके गुर्गों से लड़ रहा था तो वहीं दूसरी तरफ अमर नाइक भी इन लोगों को कड़ी चुनौती दे रहा था। वैसे इस समय तक दाऊद खुद दुबई शिफ्ट हो चुका था लेकिन दुश्मनों की सफाई के लिए उसने छोटा राजन को मुंबई में छोड़ रखा था।
हालांकि अमर नाइक को कंट्रोल कर पाना छोटा राजन के लिए मुश्किल हो गया था क्योंकि अमर नाइक भी अक्सर देश से बाहर ही रहता था। उसके पास पांच अलग-अलग पासपोर्ट थे और अब तक अमर नाइक का चेहरा अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ था।
पुलिस को भी नहीं थी अमर नाइक की भनक
यहां तक कि पुलिस भी अमर नाइक की तलाश में थी लेकिन उसके पास भी उसकी कोई तस्वीर नहीं थी। कहते तो यहां तक हैं कि एक बार तो अमर नाइक पुलिस के सामने आया और पुलिसकर्मियों से हाय हैलो भी की फिर चला भी गया लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।
अमर का भाई अजित शिवसेना में हुआ शामिल
इस बीच अमर का भाई अजित नाइक शिवसेना में शामिल हो गया लेकिन वह सब्जी बेचने का काम करता रहा। वहीं, उसका छोटा भाई अश्विन जो किडनैप हुआ था जिसका अंडरवर्ल्ड से कोई लेना देना नहीं वह छोटा राजन की रडार पर आ गया। एक बार जब वो फ्लाइट से बेंगलुरु से मुंबई आया तो नेशनल हाईवे पर अश्विन की कार पर हमला हो गया। चारों तरफ से गोलियां चलीं पर किस्मत से अश्विन और उसकी पत्नी की जान बच गई।
इस घटना ने अश्विन की पत्नी को झकझोर दिया और उसने अश्विन पर प्रेशर बनाया कि वह अपने भाई अमर नाइक की गैंग में शामिल हो जाए। अश्विन ने अपनी पत्नी की बात मान ली और वो अमर की गैंग में शामिल हो गया।
अमर नाइक गैंग का आतंक
अमर नाइक के गिरोह का दामन ज्यादातर उन्हीं लड़कों ने थामा था, जो कपड़ा मिलें ठप होने बाद भुखमरी से जंग लड़ रहे थे। वक्त के साथ रावण की सल्तनत में उसका इकबाल बुलंद होने लगा। अमर नाइक इतना क्रूर था कि अंडरवर्ल्ड में लोग उसको रावण कहा करते थे। एक सब्जी विक्रेता से अंडरवर्ल्ड डॉन बने नाइक ने मुंबई की कई नामचीन हस्तियों की हत्या की थी, जिनमें खटाव मिल के मालिक सुनीत खटाव का भी नाम शामिल था।
अमर नायक भी उसी सेंट्रल मुंबई के इलाके से ऑपरेट करता था, जहां से अरुण गवली अपना गिरोह चलाता था। इसलिए दोनों के बीच दुश्मनी पैदा हो गई। जिस तरह एक म्यान में दो तलवारे नहीं रह सकती, उसी तरह से एक इलाके में दो अंडरवर्ल्ड डॉन भी नहीं रह सकते थे। गवली और नाइक के बीच भयंकर गैंगवार छिड़ गया था जिसमें दोनों ने एक दूसरे के कई लोगों की हत्याएं कीं।
पुलिस की एनकाउंटर की तैयारी
जब पुलिस का सिरदर्द बढ़ा तो रातों-रात एक प्लान बनाया गया। अमर के परिवार को टारगेट पर लिया गया। अचानक सब कुछ बदल गया। अश्विन को पुलिस ने टॉर्चर करना शुरू किया। आधी रात उसे पुलिस घर से उठा ले जाती, थाने में घंटों बिठाती, मारपीट करती, ये सब इसलिए ताकि अमर के ठिकाने का पता मिल सके।
वहीं, अरुण गवली को पुलिस ने पकड़ के जेल में डाल दिया और उसकी गैंग के सदस्यों को या तो जेल भेज दिया था या फिर एनकाउंटर में ढेर कर दिया। वहीं अमर नाइक पर भी पुलिस का दवाब बढ़ता गया, लेकिन पुलिस मुठभेड़ में उसके गिरोह के लोगों के मारे जाने से अमर नाइक भी कमजोर पड़ने लगा और उसका ‘रावण राज्य’ आखिर धराशायी हो गया।
अमर नाइक का एनकाउंटर
1995 में अमर नाइक को मदनपुरा इलाके में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट विजय सालस्कर के नेतृत्व में पुलिस ने घेर लिया। पुलिस से घिरने पर उसने फायरिंग शुरू की, लेकिन आधी रात को हुई इस मुठभेड़ में अमर नाइक को मार गिराया गया। कुख्यात गैंगस्टर अमर नाइक पर दर्जनों मुकदमे दर्ज थे जिनमें से हत्या, हत्या की कोशिश, रंगदारी और जबरन वसूली जैसे संगीन मामले शामिल थे।
