56 दिन से शहीद स्मारक पर डटे राज्य आंदोलनकारी, सरकार की चुप्पी पर फूटा आक्रोश

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बाबा मोहन उत्तराखंडी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि, आंदोलनकारियों ने कहा—सम्मान और अधिकार के लिए संघर्ष जारी रहेगा

देहरादून। उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले आंदोलनकारियों की उपेक्षा का मुद्दा एक बार फिर राजधानी देहरादून में सरकार के सामने जोरदार तरीके से उठाया गया। शहीद स्मारक परिसर में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राज्य आंदोलनकारियों का क्रमिक अनशन और धरना प्रदर्शन रविवार को 56वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा रोष जताते हुए कहा कि जिन लोगों के संघर्ष और बलिदान से उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में आया, आज उन्हीं आंदोलनकारियों को अपनी जायज मांगों के लिए सड़कों पर बैठना पड़ रहा है।

राज्य आंदोलनकारी संयुक्त मंच के तत्वावधान में चल रहे धरना प्रदर्शन में रविवार को विकासनगर निवासी राम किशन और देहरादून निवासी मंच संयोजक अम्बुज शर्मा क्रमिक अनशन पर बैठे। आंदोलनकारियों ने साफ किया कि उनका संघर्ष व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान, अधिकार और लंबित मांगों के समाधान के लिए है।

बाबा मोहन उत्तराखंडी को पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि

धरना स्थल पर उत्तराखंड पृथक राज्य आंदोलन और गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के संघर्ष के महान आंदोलनकारी शहीद बाबा मोहन उत्तराखंडी को उनकी पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। आंदोलनकारियों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके संघर्ष को याद किया और कहा कि बाबा मोहन उत्तराखंडी ने उत्तराखंड की अस्मिता, पहाड़ के अधिकार और गैरसैंण को राजधानी बनाए जाने की मांग के लिए अपना जीवन समर्पित किया।

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद आंदोलनकारियों ने सरकार से सवाल किया कि जिन सपनों को लेकर राज्य आंदोलन लड़ा गया था, उन सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी किसकी है। आंदोलनकारियों का कहना था कि राज्य गठन के दशकों बाद भी मूल आंदोलनकारी मुद्दे समाधान की प्रतीक्षा में हैं।

56 दिन बाद भी मांगों पर कार्रवाई का इंतजार

मंच संयोजक अम्बुज शर्मा ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि आंदोलनकारियों की मांगों को आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष और दोनों उपाध्यक्षों के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जा चुका है। इसके बावजूद धरने को 56 दिन पूरे हो गए और सरकार की ओर से अपेक्षित स्तर पर ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों की मांगों को बार-बार आश्वासन और पत्राचार तक सीमित रखने से समस्या का समाधान संभव नहीं है। आंदोलनकारियों को सम्मान के साथ उनका अधिकार चाहिए और इसके लिए सरकार को स्पष्ट निर्णय लेना होगा।

चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय महामंत्री नवीन नैथानी और जिला अध्यक्ष विश्वंभर बौंठियाल ने कहा कि 15 जून 2026 से शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना और क्रमिक अनशन लगातार जारी है। 56 दिन बीत जाने के बाद भी परिस्थितियां जस की तस बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय उत्तराखंड के निर्माण के संघर्ष में लगाया। आज उनकी जायज मांगों के लिए उन्हें धरना देने की स्थिति में पहुंचना सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

आंदोलनकारियों ने सरकार से मांगा स्पष्ट निर्णय

आंदोलनकारियों ने कहा कि उत्तराखंड का निर्माण केवल राजनीतिक घोषणा से संभव नहीं हुआ था। इसके पीछे हजारों आंदोलनकारियों का संघर्ष, महिलाओं की भागीदारी, युवाओं की ऊर्जा और अनेक लोगों का बलिदान रहा है। आंदोलनकारियों के परिवारों ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया। ऐसे में राज्य निर्माण के मूल संघर्ष से जुड़े लोगों की मांगों को सरकार की प्राथमिक सूची में स्थान मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी सरकार से टकराव की राजनीति के बजाय सम्मानजनक समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं। लगातार धरना देने के बावजूद यदि सरकार की ओर से ठोस पहल सामने नहीं आती है तो आंदोलनकारियों का आक्रोश और बढ़ेगा।

आंदोलनकारियों ने कहा कि शहीद स्मारक केवल एक स्थान भर नहीं है, यह उत्तराखंड आंदोलन के संघर्ष, बलिदान और स्वाभिमान का प्रतीक है। इसी स्थान पर बैठकर अपनी मांगों को उठाना आंदोलनकारियों के लिए भावनात्मक विषय भी है। सरकार को इस आवाज को गंभीरता से सुनना चाहिए।

समर्थन में पहुंचे आंदोलनकारी

धरना प्रदर्शन के समर्थन में मोहन खत्री, सुरेश नेगी, रामलाल खंडूरी, प्रदीप कुकरेती, प्रभात डंडरियाल, ललित चंद्र जोशी, नवीन नैथानी, विश्वंभर बौंठियाल, मोहन चंद्र शर्मा, प्रशांत तड़ियाल, सुरेश कुमार, सुशील विरमानी, विनोद शरीयाल, आनंद बिष्ट, विनीत लोहानी, अरुणा थपलियाल, मनोज नौटियाल, सुशील चमोली, शांति शर्मा, राकेश थपलियाल, हरि सिंह महर, गीता बिष्ट, गणेश डंगवाल, प्रवीण गुसाईं, उपेंद्र प्रसाद, प्रताप सिंह राणा, राधा तिवारी, सुधीर नारायण शर्मा, हरि प्रकाश शर्मा और पुष्पा बहुगुणा सहित अनेक आंदोलनकारी मौजूद रहे।

आंदोलनकारियों ने एक स्वर में कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन की मूल भावना, आंदोलनकारियों के सम्मान और उनके अधिकारों से जुड़े विषयों पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना होगा। 56 दिन से जारी धरना यह संदेश दे रहा है कि आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं।

उन्होंने सरकार से अपील की कि आंदोलनकारियों को बार-बार आश्वासन देने की जगह समयबद्ध निर्णय और धरातल पर कार्रवाई की जाए। आंदोलनकारियों का कहना है कि उत्तराखंड के निर्माण में योगदान देने वालों की आवाज को अनसुना करने से राज्य की आंदोलनकारी भावना आहत होती है। अब सरकार को तय करना है कि वह इस आवाज को सुनेगी या आंदोलन को और लंबा खिंचने देगी।


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