उत्तराखंड में गुमशुदा महिलाएं और बच्चे: एक गंभीर चुनौती उत्तराखंड राज्य गठन (साल 2000) से लेकर 2026 तक गायब हुई महिलाओं, लड़कियों और नाबालिगों का कोई एक संचयी (cumulative) आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन उत्तराखंड पुलिस की सूचनाओं, आरटीआई (RTI) रिपोर्ट और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों से अलग-अलग समय अवधि के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:

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राज्य गठन से अब तक का कुल अनुमानित आंकड़ा (23-26 साल)

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

  • उत्तराखंड पुलिस द्वारा जारी की गई एक समीक्षा और आरटीआई (RTI) रिपोर्ट के अनुसार, राज्य गठन के बाद से पिछले 23 वर्षों (2023 तक) में उत्तराखंड से कुल 37,000 से अधिक लोग गुमशुदा हुए थे।
  • इस कुल संख्या में पुरुषों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाएं, युवतियां और नाबालिग शामिल हैं।

पिछले 5 वर्षों के आंकड़े (महिलाएं और नाबालिग लड़कियां)

जुलाई 2025 में सामने आई पुलिस और आरटीआई रिपोर्ट के अनुसार पिछले 5 सालों का डेटा इस प्रकार है:

लापता महिलाएं: पिछले 5 वर्षों में लगभग 10,500 से अधिक महिलाएं लापता हुईं। इनमें से अधिकांश को पुलिस ने ढूंढ लिया, लेकिन लगभग 750-767 महिलाएं ऐसी हैं जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। [1, 2]नाबालिग लड़कियां: इसी 5 साल की अवधि में लगभग 3,000 नाबालिग लड़कियां (18 साल से कम) गायब हुईं, जिनमें से 150 से अधिक बच्चियां अब भी लापता हैं

हालिया वर्ष (2024-2026) की स्थिति (नाबालिग और बच्चे)

  • NCRB और हालिया रिपोर्ट (2025-2026): नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में हर साल औसतन 1,200 से अधिक बच्चे (18 साल या उससे कम) गायब हो रहे हैं। [1, 2]
  • वर्ष 2023-2024 की रिपोर्ट में गायब हुए कुल 1,209 बच्चों में से 802 लड़कियां और 408 लड़के शामिल थे। गायब होने वाले बच्चों में लड़कियों की संख्या लड़कों के मुकाबले दोगुनी है

पुलिस जांच और सामाजिक रिपोर्टों के अनुसार, इन गुमशुदगी के मामलों के पीछे मुख्य रूप से बहला-फुसलाकर भगा ले जाना, मानव तस्करी (ह्यूमन ट्रैफिकिंग), मानसिक तनाव, और बाहरी राज्यों/विदेशों में नौकरी दिलाने का झांसा देना शामिल है। इसके समाधान के लिए उत्तराखंड पुलिस समय-समय पर ‘ऑपरेशन मिलाप’ जैसे राज्यव्यापी अभियान चलाकर गुमशुदा लोगों को सकुशल बरामद करने का प्रयास करती है।


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