मुहर्रम की 10 तारीख यानी आशूरा के दिन लोगों को पानी, शरबत और खाना बांटना सेवा की मिसाल माना जाता है. लेकिन इस बार मुंबई में इसी परंपरा की आड़ में कथित तौर पर एक ऐसी साजिश रची गई, जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया.

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मुंबई पुलिस के मुताबिक, पुणे के 39 वर्षीय कारोबारी फैयाज प्रेमजी ने दर्द निवारक दवाइयों जैसी दिखने वाली करीब 14 हजार जहरीली कैप्सूल तैयार की थीं. इन कैप्सूलों में जिंक फॉस्फाइड नाम का बेहद जहरीला चूहे मारने वाला केमिकल मिलाया गया था. जांच एजेंसियों का दावा है कि इन कैप्सूलों को आशूरा के जुलूस में शामिल शिया श्रद्धालुओं के बीच बांटने की योजना थी.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

पुलिस का कहना है कि आरोपी की योजना यहीं तक सीमित नहीं थी. जांच में सामने आया है कि वह कुल करीब 30 हजार कैप्सूल तैयार करने की तैयारी में था. अगर समय रहते यह साजिश सामने नहीं आती, तो बड़ी संख्या में लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी.

इस घटना के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि खुद खोजा शिया मुसलमान होकर फैयाज ने शिया समुदाय को ही क्यों बनाया निशाना? आखिर इस्लाम से उसकी ऐसी क्या दुश्मनी थी कि उसने 15000 मुसलमानों को मारने का प्लान बना लिया? इसी सवाल का जवाब अब मुंबई पुलिस तलाश रही है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि पिछले कुछ वर्षों में फैयाज की वैचारिक सोच में बड़ा बदलाव आया था.

फैयाज ने क्यों छोड़ दिया था इस्लाम?

गिरफ्तारी से पहले फैयाज कई इंटरव्यू, पॉडकास्ट और यूट्यूब चर्चाओं में खुलकर हिस्सा ले चुका है. इन कार्यक्रमों में उसने खुद को ‘पूर्व शिया मुस्लिम’ (Ex-Shia Muslim) बताते हुए दावा किया कि उसने इस्लाम छोड़ दिया है.

एक इंटरव्यू में उसने कहा था कि बचपन से ही उसे हर बात पर सवाल उठाने की आदत थी. उसके मुताबिक, यह सोच उसे अपने ननिहाल से मिली थी, जहां किसी भी बात को बिना परखे स्वीकार करने की बजाय उस पर सवाल किए जाते थे.

फैयाज का दावा था कि इस्लाम का गहराई से अध्ययन करने के बाद उसने धर्म छोड़ने का फैसला लिया. उसने यह भी कहा था कि पहले उसने इस्लाम में सुधार लाने की कोशिश की, लेकिन उसे लगा कि उसका समुदाय बदलाव के लिए तैयार नहीं है.

शिया-सुन्नी विवाद पर भी खूब देता था बयान

फैयाज अपने कार्यक्रमों में अक्सर शिया और सुन्नी समुदायों के बीच ऐतिहासिक मतभेदों पर भी चर्चा करता था. वह धार्मिक कट्टरता की आलोचना करता था और दावा करता था कि अलग-अलग इस्लामी संप्रदायों की बुनियादी सोच में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है.

उसके भाषणों और वीडियो को सोशल मीडिया पर काफी लोगों ने देखा. जहां कुछ एक्स मुस्लिम ग्रुप और दक्षिणपंथी सोशल मीडिया वर्गों में उसे खूब समर्थन भी मिला, वहीं बड़ी संख्या में मुस्लिम संगठनों और लोगों ने उसके बयानों की आलोचना भी की.

जांच के घेरे में ईरान-इराक के लगातार दौरे

जांच एजेंसियों के लिए एक और अहम पहलू उसके विदेश दौरे हैं. पुलिस के मुताबिक, 2019 से 2025 के बीच फैयाज कई बार ईरान और इराक गया. सिर्फ पिछले एक साल में ही उसने इन दोनों देशों की 19 यात्राएं कीं.

अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन दौरों का मकसद क्या था? क्या उसका किसी बड़े नेटवर्क से संपर्क था? और क्या कथित जहरीली कैप्सूल साजिश का इन यात्राओं से कोई संबंध है?

डायरी, डिजिटल रिकॉर्ड और मकसद की जांच

फिलहाल जांच एजेंसियां फैयाज के डिजिटल रिकॉर्ड, संपर्कों और गतिविधियों की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि उसने यह कदम आखिर किस मकसद से उठाया और क्या वह अकेले काम कर रहा था या उसके साथ कोई और भी शामिल था.

हालांकि, अब तक मुंबई पुलिस ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा है कि फैयाज की वैचारिक सोच और कथित जहरीली कैप्सूल साजिश के बीच कोई सीधा संबंध साबित हो गया है. पुलिस का कहना है कि उसके मकसद और संभावित नेटवर्क की जांच अभी जारी है.

अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला हाल के वर्षों में धार्मिक आयोजन को निशाना बनाकर रची गई सबसे बड़ी कथित साजिशों में से एक माना जाएगा.


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