भगवती प्रोडक्ट्स में फिर लेऑफ का संकट: श्रमिकों के समर्थन में उतरे हरीश पनेरू, जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा ज्ञापन

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रुद्रपुर, 7 जुलाई। ऊधम सिंह नगर के सिडकुल क्षेत्र स्थित भगवती प्रोडक्ट्स लिमिटेड एक बार फिर श्रमिक विवादों को लेकर चर्चा में है। कंपनी प्रबंधन द्वारा 1 जुलाई 2026 से 14 अगस्त 2026 तक अचानक घोषित किए गए लेऑफ के विरोध में भगवती इम्पलाइज यूनियन, ऊधम सिंह नगर ने मोर्चा खोल दिया है। यूनियन का आरोप है कि यह लेऑफ पूरी तरह अवैध है और इसका उद्देश्य श्रमिकों पर आर्थिक तथा मानसिक दबाव बनाकर उन्हें अपने अधिकारों की लड़ाई से पीछे हटने के लिए मजबूर करना है।
इसी मुद्दे को लेकर आज पूर्व राज्य मंत्री, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरू के नेतृत्व में यूनियन प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपेगा। ज्ञापन में मांग की जाएगी कि कंपनी का लेऑफ तत्काल समाप्त कराया जाए, प्लांट को पुनः संचालित कराया जाए तथा सभी श्रमिकों को काम पर वापस लिया जाए।
यूनियन के अनुसार भगवती प्रोडक्ट्स लिमिटेड में न्यूनतम वेतन लागू कराने और श्रमिकों को उनकी कुशल श्रेणी का लाभ दिलाने को लेकर पहले से औद्योगिक विवाद चल रहा है। इसी दौरान प्रबंधन ने बिना किसी ठोस कारण के लंबी अवधि का लेऑफ घोषित कर दिया। श्रमिक नेताओं का कहना है कि पहले से कम वेतन पर किसी तरह परिवार चला रहे कर्मचारियों के सामने अब रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
यूनियन ने अपने ज्ञापन में वर्ष 2018 की घटना का भी उल्लेख किया है। आरोप है कि 27 दिसंबर 2018 को कंपनी ने अचानक 303 श्रमिकों की छंटनी कर दी थी, 47 श्रमिकों को लंबे समय तक लेऑफ पर रखा गया था और एक कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया था। यह मामला वर्षों तक न्यायालयों में चला। श्रमिकों के पक्ष में औद्योगिक न्यायाधिकरण और उच्च न्यायालय से निर्णय आने के बाद मामला उच्चतम न्यायालय पहुंचा, जहां 13 जुलाई 2023 को समझौते के बाद प्लांट दोबारा शुरू हुआ।
श्रमिक नेताओं का आरोप है कि समझौते के बाद कंपनी ने योजनाबद्ध तरीके से उत्पादन घटाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे नए ऑर्डर कम लिए गए और जो कच्चा माल पंतनगर प्लांट में आ रहा था, उसे भी दूसरे प्लांट में भेजा जाने लगा। यूनियन का दावा है कि यह सब पहले से तय रणनीति का हिस्सा था ताकि अंततः प्लांट को निष्क्रिय दिखाकर फिर से लेऑफ लागू किया जा सके।
यूनियन ने यह भी आरोप लगाया है कि कंपनी ने अपने प्लांट के एक हिस्से को दूसरी कंपनी को किराए पर दे दिया, जबकि दूसरी ओर अपने ही कर्मचारियों को काम न होने का हवाला देकर घर बैठा दिया। श्रमिकों का कहना है कि यदि प्लांट का हिस्सा किराए पर दिया जा सकता है, तो फिर कर्मचारियों को काम देने में असमर्थता का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरू ने कहा कि श्रमिकों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि जब श्रमिक अपने वैधानिक अधिकारों—न्यूनतम वेतन, कुशल श्रेणी और श्रम कानूनों के पालन—की मांग कर रहे हैं, तब कंपनी द्वारा लेऑफ घोषित करना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यह केवल रोजगार का मामला नहीं बल्कि सैकड़ों परिवारों के भविष्य का प्रश्न है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी प्रबंधन श्रमिकों पर लगातार आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न कर रहा है। लंबे समय तक अनिश्चितता में रखना, आय के स्रोत बंद कर देना, परिवारों को आर्थिक संकट में धकेलना और भविष्य को लेकर भय का माहौल पैदा करना श्रमिकों पर मानसिक दबाव बनाने का माध्यम बन गया है। ऐसे हालात में अनेक परिवारों के सामने बच्चों की पढ़ाई, इलाज, मकान का किराया और दैनिक खर्च चलाना भी कठिन हो गया है।
यूनियन का कहना है कि श्रमिकों को यह आशंका सता रही है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। कई कर्मचारियों पर बैंक ऋण और अन्य वित्तीय जिम्मेदारियां हैं। लगातार आय बंद रहने से उनका आर्थिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ सकता है।
ज्ञापन में जिलाधिकारी से मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, लेऑफ की वैधानिकता की जांच हो, श्रम विभाग के माध्यम से औद्योगिक विवाद का शीघ्र निस्तारण कराया जाए तथा कंपनी को प्लांट पुनः चालू कर सभी कर्मचारियों को काम पर लेने के निर्देश दिए जाएं।
श्रमिकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन तेज करेंगे। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य केवल रोजगार बचाना और श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले अधिकारों की रक्षा करना है।
फिलहाल सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। यदि प्रशासन इस मामले में सक्रिय पहल करता है तो लंबे समय से असमंजस में जी रहे सैकड़ों श्रमिक परिवारों को राहत मिल सकती है। वहीं दूसरी ओर, इस विवाद ने एक बार फिर सिडकुल क्षेत्र में श्रमिक अधिकारों, औद्योगिक संबंधों और श्रम कानूनों के प्रभावी पालन को लेकर बहस तेज कर दी है।

भगवती प्रोडक्ट्स पर श्रमिक उत्पीड़न के आरोप, न्यूनतम मजदूरी में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करने की मांग
रुद्रपुर। भगवती प्रोडक्ट्स लिमिटेड के खिलाफ श्रमिकों का आंदोलन तेज हो गया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरू के नेतृत्व में श्रमिकों ने उप जिलाधिकारी के माध्यम से प्रशासन से मांग की कि कंपनी के खिलाफ न्यूनतम मजदूरी के कथित उल्लंघन और श्रमिकों के आर्थिक शोषण के मामले में मुकदमा दर्ज किया जाए।
श्रमिक पक्ष का दावा है कि जब इस पूरे मामले में कंपनी के एचआर हेड नरेंद्र त्यागी से फोन पर बातचीत की गई तो उनका रवैया बेहद नकारात्मक रहा। श्रमिकों का आरोप है कि उन्होंने कहा कि “कंपनी अपने नियमों से चलती है, हमें शासन-प्रशासन से कोई फर्क नहीं पड़ता और जिन श्रमिकों को हमने बाहर किया है, उन्हें किसी भी हालत में दोबारा कंपनी में नहीं रखा जाएगा।” श्रमिक नेताओं का कहना है कि यदि ऐसा बयान दिया गया है, तो यह न केवल श्रमिकों के प्रति असंवेदनशीलता दर्शाता है बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति भी अनादर का संकेत है।
हरीश पनेरू ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की स्थापना श्रमिकों, किसानों और आम जनता के सम्मान तथा अधिकारों की रक्षा की भावना से हुई थी। यदि किसी कंपनी द्वारा न्यूनतम मजदूरी संबंधी नियमों की अनदेखी की जाती है और श्रमिकों का आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न किया जाता है, तो यह राज्य की मूल अवधारणा के विपरीत है।
उन्होंने उप जिलाधिकारी से मांग की कि कंपनी द्वारा न्यूनतम मजदूरी में कथित अनियमितताओं, श्रम कानूनों के संभावित उल्लंघन और अवैध लेऑफ की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित प्रावधानों के तहत कंपनी के खिलाफ विधिक कार्रवाई और मुकदमा दर्ज किया जाए।
नोट: कंपनी के एचआर हेड से जुड़े कथित बयान और अन्य आरोप श्रमिक पक्ष के दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों पर कंपनी का विस्तृत पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।


(नोट: यह समाचार यूनियन द्वारा लगाए गए आरोपों और ज्ञापन में किए गए दावों पर आधारित है। कंपनी प्रबंधन का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा


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