2027 की राह में रोड़ा बनी उत्तराखंड कांग्रेस की ‘अंतःकलह’, गुटबाजी और आपसी फूट से कार्यकर्ता पस्त

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उत्तराखंड देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 भले ही नजदीक आ रहे हों, लेकिन कांग्रेस पार्टी सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाने के बजाय खुद अपनी ही ‘आपसी फूट’ की आग में झुलस रही है। शीर्ष नेताओं के बीच चल रही गुटबाजी और वर्चस्व की जंग अब खुलकर सड़कों पर आ चुकी है, जिसने आगामी चुनावों में पार्टी की जीत की उम्मीदों पर पानी फेरना शुरू कर दिया है।
धड़ों में बंटी पार्टी, अपनी ही पीठ में छुरा घोंप रहे नेता

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


पार्टी के भीतर मची इस खींचतान ने वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग खेमों में बांट दिया है। प्रदेश आलाकमान और जमीन पर संघर्ष कर रहे वरिष्ठ चेहरों के बीच की खाई इतनी गहरी हो चुकी है कि सांगठनिक बैठकों में भी सहयोग की जगह केवल आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के बड़े नेता गुपचुप तरीके से एक-दूसरे के राजनीतिक जनाधार को कमजोर करने में जुटे हैं, जिससे संगठन पूरी तरह कमजोर हो चुका है।
2027 के दावों के बीच ‘अंतःकलह’ ने बढ़ाई दिल्ली की चिंता
दिल्ली स्थित केंद्रीय मुख्यालय (24 अकबर रोड) तक भी उत्तराखंड कांग्रेस की इस सिरफुटौवल की गूंज पहुंच चुकी है। केंद्रीय नेतृत्व के बार-बार एकजुट रहने के निर्देशों को राज्य के क्षत्रप लगातार हवा में उड़ा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही गुटबाजी जारी रही, तो कांग्रेस 2027 में भाजपा के खिलाफ एक मजबूत विकल्प पेश करने की स्थिति में भी नहीं रहेगी।
कार्यकर्ताओं में निराशा, जनता में गलत संदेश
नेताओं की इस आपसी लड़ाई का सबसे बुरा असर जमीनी कार्यकर्ताओं पर पड़ रहा है। लगातार मिल रही चुनावी हार के बाद भी नेताओं के रवैये में कोई सुधार न देख कार्यकर्ताओं का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है। जनता के बीच भी यह संदेश जा रहा है कि जो पार्टी खुद एकजुट नहीं रह सकती, वह राज्य को क्या संभालेगी। साफ है कि कांग्रेस की यह ‘अंतःकलह’ आगामी चुनाव में उसके लिए सबसे बड़ा आत्मघाती कदम साबित होने जा रही है।


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