ईरान-अमेरिका तनाव का असर उत्तराखंड तक, रुद्रपुर, देहरादून और हरिद्वार में भी एटीएम सेवाओं पर पड़ सकता है प्रभाव

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अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत की बैंकिंग सेवाओं तक पहुंचने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा प्रभाव एटीएम में नकदी पहुंचाने वाली कंपनियों पर पड़ रहा है। देश के कई हिस्सों में एटीएम कैश रिफिलिंग सेवाएं प्रभावित हुई हैं और यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो उत्तराखंड के प्रमुख शहर रुद्रपुर, देहरादून और हरिद्वार भी इससे अछूते नहीं रहेंगे।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में सोमवार को कई स्थानों पर एटीएम में नकदी भरने की सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित रहीं। कैश मैनेजमेंट कंपनियों ने बढ़ती परिचालन लागत का हवाला देते हुए कुछ समय के लिए कैश रिफिलिंग और संबंधित सेवाओं को सीमित कर दिया। इससे अनेक एटीएम में नकदी उपलब्धता प्रभावित हुई और ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
कैश मैनेजमेंट कंपनियों का कहना है कि डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण नकदी ढोने वाले विशेष वाहनों का खर्च लगातार बढ़ रहा है। सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों का वेतन, वाहन रखरखाव, बीमा और अन्य परिचालन खर्च भी पहले की तुलना में काफी अधिक हो चुके हैं। इसके बावजूद बैंकों की ओर से सेवा शुल्क में अपेक्षित संशोधन नहीं किया गया है। मौजूदा अनुबंधों के तहत काम करना कंपनियों के लिए आर्थिक रूप से कठिन होता जा रहा है।
कंपनियों का दावा है कि बढ़ती लागत के कारण उन्हें 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। इस विषय पर इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) से कई दौर की बातचीत हुई, जिसमें परिचालन शुल्क बढ़ाने की मांग रखी गई। कई निजी बैंक सेवा शुल्क पर दोबारा विचार करने के संकेत दे रहे हैं, जबकि सरकारी बैंकों के साथ बातचीत अभी जारी है।
उत्तराखंड के औद्योगिक शहर रुद्रपुर में बड़ी संख्या में उद्योग, कारोबारी प्रतिष्ठान और श्रमिक वर्ग नकद लेनदेन के लिए एटीएम पर निर्भर रहते हैं। यदि कैश रिफिलिंग प्रभावित होती है तो वेतन निकासी, छोटे व्यापार और दैनिक लेनदेन पर असर दिखाई दे सकता है। त्योहारी सीजन या महीने की शुरुआत में नकदी की मांग अधिक रहती है, ऐसे समय एटीएम खाली होने की स्थिति लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है।
राजधानी देहरादून में सरकारी कार्यालय, निजी संस्थान, शैक्षणिक केंद्र और बड़ी आबादी बैंकिंग सेवाओं का नियमित उपयोग करती है। शहर में प्रतिदिन हजारों लोग एटीएम से नकदी निकालते हैं। यदि कैश सप्लाई प्रभावित हुई तो कई एटीएम समय से पहले खाली हो सकते हैं। ऐसे में ग्राहकों को एक एटीएम से दूसरे एटीएम तक जाना पड़ सकता है।
हरिद्वार धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से देश के सबसे व्यस्त शहरों में शामिल है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। होटल, धर्मशालाएं, छोटे व्यापारी और स्थानीय बाजारों में नकद लेनदेन का महत्व आज भी बना हुआ है। यदि एटीएम में समय पर नकदी उपलब्ध न हो तो यात्रियों और व्यापारियों दोनों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
कैश मैनेजमेंट कंपनियों की संस्था कॉन्फेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री (CATMi) ने इस मुद्दे को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सामने भी उठाया है। संस्था का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत को देखते हुए सेवा शुल्क में संशोधन आवश्यक है, ताकि एटीएम सेवाएं बिना किसी रुकावट के संचालित होती रहें।
बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि एटीएम नेटवर्क देश की वित्तीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। समय पर नकदी उपलब्ध रहना आम नागरिकों, व्यापारियों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बेहद जरूरी है। यदि परिचालन लागत और सेवा शुल्क के बीच संतुलन स्थापित हो जाता है तो इस समस्या का समाधान संभव है।
विशेषज्ञ ग्राहकों को सलाह दे रहे हैं कि आवश्यकता के अनुसार ही नकदी निकालें, डिजिटल भुगतान का उपयोग बढ़ाएं और एक ही समय में अधिक मात्रा में नकद निकालने से बचें। इससे एटीएम पर दबाव कम रहेगा और अधिक लोगों तक नकदी उपलब्ध हो सकेगी।
फिलहाल उत्तराखंड में व्यापक स्तर पर एटीएम सेवाएं सामान्य हैं, फिर भी देश के अन्य राज्यों में उत्पन्न हालात को देखते हुए रुद्रपुर, देहरादून और हरिद्वार सहित प्रदेश के प्रमुख शहरों में भी बैंक और कैश मैनेजमेंट कंपनियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में बैंकों, सेवा प्रदाताओं और नियामक संस्थाओं के बीच सहमति बनने पर एटीएम सेवाएं पूरी तरह सामान्य रहने की उम्मीद है।


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