देहरादून में उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद स्मार्ट सिटी के तहत संचालित इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को निर्धारित मार्गों तक सीमित कर दिया गया है। यह मामला कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इससे एक बड़ा सवाल सामने आता है कि जब राजधानी में पर्यावरण, यातायात और जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक बस सेवा को इतना महत्व दिया जा रहा है, तब प्रदेश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक जिले उधम सिंह नगर को ऐसी आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से अभी तक क्यों वंचित रखा गया है?
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
उधम सिंह नगर आज उत्तराखंड की आर्थिक राजधानी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है। रुद्रपुर, किच्छा, पंतनगर, दिनेशपुर, नगला, आवास विकास, ट्रांजिट कैंप और हल्द्वानी से जुड़े मार्गों पर प्रतिदिन हजारों विद्यार्थी, कर्मचारी, मजदूर, व्यापारी और आम नागरिक सफर करते हैं। औद्योगिक इकाइयों के विस्तार और लगातार बढ़ती आबादी के कारण निजी वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इसका सीधा असर यातायात व्यवस्था, सड़क सुरक्षा और पर्यावरण पर दिखाई दे रहा है।
रुद्रपुर शहर की अधिकांश प्रमुख सड़कें दिनभर वाहनों के दबाव में रहती हैं। कार्यालय खुलने और बंद होने के समय लंबा जाम आम बात बन चुका है। दोपहिया और चारपहिया वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। यदि शहर और आसपास के क्षेत्रों के लिए नियमित, समयबद्ध और आधुनिक इलेक्ट्रिक सिटी बस सेवा उपलब्ध हो जाए तो बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन को अपनाएंगे। इससे सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा और दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।
पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी इलेक्ट्रिक बसें समय की आवश्यकता हैं। डीजल और पेट्रोल से चलने वाले वाहनों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण का बड़ा कारण है। औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण उधम सिंह नगर पहले ही प्रदूषण की चुनौती का सामना कर रहा है। ऐसे में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन स्वच्छ और हरित परिवहन की दिशा में प्रभावी कदम साबित होगा।
यदि सरकार रुद्रपुर को केंद्र बनाकर एक सिटी बस नेटवर्क विकसित करे तो इससे हजारों लोगों को प्रतिदिन लाभ मिल सकता है। संभावित रूटों में रुद्रपुर–आवास विकास–केंद्र कॉलोनी–डिग्री कॉलेज–किच्छा, रुद्रपुर–पंतनगर–सिडकुल, रुद्रपुर–दिनेशपुर, रुद्रपुर–नगला तथा रुद्रपुर–हल्द्वानी जैसे मार्गों को प्राथमिकता दी जा सकती है। इन मार्गों पर यात्रियों की संख्या पहले से ही काफी अधिक है।
इस सुविधा का सबसे बड़ा लाभ विद्यार्थियों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत कर्मचारियों को मिलेगा। सुरक्षित, सस्ती और समयबद्ध यात्रा उपलब्ध होने से लोगों का समय और धन दोनों बचेंगे। साथ ही सार्वजनिक परिवहन मजबूत होने से शहर की यातायात व्यवस्था अधिक व्यवस्थित बन सकेगी।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स के माध्यम से उत्तराखंड सरकार, मुख्यमंत्री, परिवहन विभाग और शहरी विकास विभाग से आग्रह है कि देहरादून की तर्ज पर उधम सिंह नगर में भी इलेक्ट्रिक सिटी बस सेवा शुरू करने की दिशा में शीघ्र निर्णय लिया जाए। रुद्रपुर सहित पूरे जिले की बढ़ती आबादी, औद्योगिक विकास और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए यह केवल एक परिवहन परियोजना भर नहीं होगी, बल्कि सुरक्षित यातायात, स्वच्छ पर्यावरण और आधुनिक शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण निवेश साबित होगी।
आज आवश्यकता दूरदर्शी निर्णय की है। जिस प्रकार राजधानी में इलेक्ट्रिक बसों ने सार्वजनिक परिवहन को नई पहचान दी है, उसी प्रकार उधम सिंह नगर भी इस सुविधा का पूर्ण अधिकार रखता है। सरकार यदि समय रहते इस दिशा में पहल करती है तो आने वाले वर्षों में रुद्रपुर और आसपास का क्षेत्र अधिक सुरक्षित, प्रदूषणमुक्त और सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था वाला आधुनिक शहर बन सकता है। यही समय की मांग है और यही जनहित का सबसे प्रभावी कदम भी होगा।
