तराई विकास सहकारी संघ के निदेशक बने राजेंद्र भट्ट, सीमांत क्षेत्र को मिला सशक्त प्रतिनिधित्व

Spread the love

रुद्रपुर। पिथौरागढ़ होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष, राज्य आंदोलनकारी और सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र भट्ट का तराई विकास सहकारी संघ लिमिटेड, रुद्रपुर के निदेशक पद पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ है। उनके निर्विरोध चुने जाने की खबर सामने आते ही पिथौरागढ़ समेत पूरे सीमांत क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। सामाजिक संगठनों, सहकारी संस्थाओं, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने इसे सीमांत क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए भट्ट को शुभकामनाएं दी हैं।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


राजेंद्र भट्ट लंबे समय से सामाजिक, सहकारी और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। होटल व्यवसाय से जुड़े होने के साथ-साथ उन्होंने राज्य आंदोलन के दौरान भी सक्रिय योगदान दिया था। क्षेत्र के विकास, पर्यटन, किसानों और स्थानीय व्यापारियों की समस्याओं को विभिन्न मंचों पर मजबूती से उठाने के कारण उनकी एक अलग पहचान बनी है। इसी सक्रियता और अनुभव को देखते हुए उन्हें तराई विकास सहकारी संघ लिमिटेड के निदेशक पद की जिम्मेदारी मिली है।
सीमांत क्षेत्र की आवाज होगी मजबूत
राजेंद्र भट्ट के निर्विरोध चयन को पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि तराई विकास सहकारी संघ जैसे बड़े सहकारी संस्थान में पहली बार सीमांत क्षेत्र को प्रभावी प्रतिनिधित्व मिलने से किसानों की समस्याएं अधिक मजबूती के साथ उठाई जा सकेंगी। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि, विपणन, खाद-बीज की उपलब्धता, कृषि उत्पादों के उचित मूल्य और सहकारी योजनाओं का लाभ गांव-गांव तक पहुंचाने की दिशा में सकारात्मक पहल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि पर्वतीय किसानों को लंबे समय से कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। खेती की लागत बढ़ने, पलायन, विपणन व्यवस्था की कमी और आधुनिक तकनीक के सीमित उपयोग जैसी समस्याओं के समाधान के लिए सहकारी संस्थाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में राजेंद्र भट्ट का निदेशक बनना इन मुद्दों को नई दिशा देने वाला कदम साबित हो सकता है।
सहकारिता को मिलेगा नया दृष्टिकोण
राजेंद्र भट्ट ने अपने निर्वाचन पर सभी सदस्यों और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि पूरे पिथौरागढ़ और सीमांत क्षेत्र की जनता का सम्मान है। उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से किसानों, युवाओं और छोटे व्यापारियों को मजबूत बनाने के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि सहकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। किसानों को समय पर खाद, बीज और अन्य कृषि संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, साथ ही कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में प्रभावी पहल की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
जिले में खुशी का माहौल
राजेंद्र भट्ट के निर्विरोध निदेशक चुने जाने पर पिथौरागढ़ जिले में खुशी का माहौल है। विभिन्न सामाजिक, व्यापारिक और सहकारी संगठनों ने इसे क्षेत्र के लिए सम्मानजनक उपलब्धि बताया है। लोगों का कहना है कि उनकी कार्यशैली, जनसरोकारों के प्रति समर्पण और संगठनात्मक अनुभव का लाभ सहकारी क्षेत्र को अवश्य मिलेगा।
शुभकामनाएं देने वालों में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, भुवन  कापड़ी,पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, गणेश गोटियाल, प्रीतम सिंह, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री किच्छा  विधायक तिलक राज बहेड़,हरक सिंह रावत, पूर्व दर्जा मंत्री हरीश पनेरु,पूर्व दायित्वधारी महेंद्र लुंठी, राजकुमार ठुकराल, रंजीत रावत, हरीश रावत, नारायण पाल, तराई विकास सहकारी संघ लिमिटेड के अध्यक्ष डी.एस. बोरा, पूर्व अध्यक्ष दान सिंह रावत, जिला पंचायत अध्यक्ष किशन भंडारी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और सहकारिता से जुड़े पदाधिकारी शामिल रहे। सभी ने विश्वास व्यक्त किया कि राजेंद्र भट्ट अपने अनुभव और नेतृत्व क्षमता के बल पर संस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
सहकारिता आंदोलन को मिलेगी मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में सहकारिता ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यदि सहकारी संस्थाएं प्रभावी ढंग से कार्य करें तो किसानों की आय बढ़ाने, कृषि आधारित रोजगार सृजित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति देने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे समय में अनुभवी और जनसरोकारों से जुड़े व्यक्तित्व का निदेशक मंडल में शामिल होना संस्था के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
राजेंद्र भट्ट के समर्थकों का कहना है कि वे वर्षों से समाज सेवा, पर्यटन विकास और जनहित के कार्यों में सक्रिय रहे हैं। उनके पास संगठन संचालन का अनुभव है और वे विभिन्न वर्गों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की क्षमता रखते हैं। यही कारण है कि उन्हें निर्विरोध समर्थन मिला।
राजेंद्र भट्ट के निर्विरोध निर्वाचन ने यह संदेश भी दिया है कि सहकारिता के माध्यम से पर्वतीय और तराई क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है। लोगों को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में किसानों के हितों की रक्षा, सहकारी संस्थाओं की मजबूती और क्षेत्रीय विकास के नए आयाम स्थापित होंगे। सीमांत क्षेत्र को मिला यह प्रतिनिधित्व आने वाले समय में सहकारिता आंदोलन को नई ऊर्जा देने के साथ-साथ किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।


Spread the love