देहरादून। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 17 जुलाई को प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है। कार्यक्रम के आयोजन स्थल परेड ग्राउंड को लेकर कांग्रेस और प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया है। कांग्रेस का आरोप है कि कार्यक्रम की अनुमति पहले ही मिल चुकी थी, जबकि प्रशासन अब नई शर्तों और पूर्व निर्धारित सरकारी कार्यक्रमों का हवाला देकर मैदान उपलब्ध कराने से पीछे हट रहा है। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए 10 जुलाई को परेड ग्राउंड की अनुमति प्रदान की गई थी। पार्टी ने उसी आधार पर तैयारियां शुरू कीं और छात्र-युवा संवाद कार्यक्रम की रूपरेखा तय की। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि जब तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचीं तो प्रशासन ने अचानक रुख बदल लिया और मैदान उपलब्ध कराने पर संशय व्यक्त कर दिया।
प्रशासन का पक्ष इससे अलग है। अधिकारियों के अनुसार दी गई अनुमति अंतिम स्वीकृति नहीं थी। वह विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) और अन्य औपचारिकताओं के अधीन थी। साथ ही परेड ग्राउंड में 11 से 15 जुलाई तक केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का ‘लोक संवर्धन पर्व’ आयोजित किया गया, जिसकी अवधि बढ़ाकर 17 जुलाई तक कर दी गई। 16 और 17 जुलाई को राज्यपाल के कार्यक्रम भी प्रस्तावित बताए गए हैं। ऐसे में सुरक्षा और प्रशासनिक दृष्टि से मैदान उपलब्ध कराना संभव नहीं बताया जा रहा है।
कांग्रेस इस तर्क को स्वीकार करने के मूड में दिखाई नहीं दे रही। मंगलवार देर रात बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता परेड ग्राउंड पहुंच गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अनुमति पहले ही जारी कर दी गई थी तो अंतिम समय में कार्यक्रम रोकने की कोशिश क्यों की जा रही है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक गतिविधियों में बाधा डालने वाला कदम बताया और कार्यकर्ताओं से कांग्रेस भवन में एकत्र होकर आगे की रणनीति बनाने का आह्वान किया।
राजनीतिक गलियारों में इस विवाद को केवल मैदान का मामला नहीं माना जा रहा। कांग्रेस इसे छात्र-युवाओं की आवाज दबाने का प्रयास बताकर सरकार को घेर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी का यह कार्यक्रम छात्रों, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रियाओं और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहेगा। उनका दावा है कि बड़ी संख्या में छात्र और युवा इस संवाद का हिस्सा बनने के लिए उत्साहित हैं।
कांग्रेस का यह भी कहना है कि राज्य में विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं, शिक्षा व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में बने हुए हैं। ऐसे समय में राहुल गांधी का छात्रों के साथ सीधा संवाद सत्ता पक्ष को असहज कर रहा है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि यही कारण है कि कार्यक्रम के आयोजन में प्रशासनिक अड़चनें पैदा की जा रही हैं।
दूसरी ओर भाजपा इस पूरे विवाद को राजनीतिक रंग देने का आरोप कांग्रेस पर लगा रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रशासन अपने नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुसार निर्णय लेता है तथा किसी भी कार्यक्रम के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस तथ्य छिपाकर राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास कर रही है।
हालांकि कांग्रेस के भीतर राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे को लेकर उत्साह स्पष्ट दिखाई दे रहा है। चार जून को खराब मौसम के कारण अल्मोड़ा और पौड़ी के कार्यक्रम स्थगित हो गए थे। ऐसे में इस बार पार्टी कार्यकर्ता किसी भी स्थिति में कार्यक्रम को सफल बनाना चाहते हैं। प्रदेशभर से छात्र संगठनों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को देहरादून पहुंचने की तैयारियां पहले से चल रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद अब केवल आयोजन स्थल तक सीमित नहीं रह गया है। यह कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक संदेश की लड़ाई का रूप ले चुका है। एक ओर कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और युवाओं की आवाज का मुद्दा बना रही है, तो दूसरी ओर भाजपा प्रशासनिक प्रक्रियाओं और सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात कर रही है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के हालिया बयानों पर भी कांग्रेस लगातार निशाना साध रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर असहज दिखाई दे रही है और इसी वजह से राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पार्टी का दावा है कि जनता विकास, रोजगार, शिक्षा और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर जवाब चाहती है तथा छात्र-युवाओं का बढ़ता समर्थन कांग्रेस के पक्ष में माहौल बना रहा है।
अब सबकी नजर प्रशासन के अंतिम निर्णय पर टिकी है। यदि परेड ग्राउंड उपलब्ध नहीं कराया जाता तो कांग्रेस वैकल्पिक स्थल चुनती है या आंदोलन का रास्ता अपनाती है, यह आने वाले घंटों में स्पष्ट होगा। इतना तय है कि राहुल गांधी के प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम ने उत्तराखंड की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। आयोजन स्थल को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सियासी प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है और 17 जुलाई का दिन राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
