सत्यापन टीम को ऐसे कई मामले मिले, जिसमें फर्जी प्रवेश दिखाकर कॉलेज छात्रवृत्ति डकार गए।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की सत्यापन टीम ने राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर दर्ज मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया। इसमें उत्तर प्रदेश के युवक ने हरिद्वार में पढ़ाई की बात से इनकार किया। टीम ने कई और नंबरों पर भी संपर्क किया, उन्होंने भी हरिद्वार में दाखिले की बात से इनकार किया। इसके बाद टीम ने विभिन्न संस्थानों का भौतिक सत्यापन किया, जहां मौके पर छात्रों की संख्या रिकॉर्ड से काफी कम मिली।
जांच में क्या निकला
जांच में सामने आया कि कई संस्थानों ने अपनी वास्तविक क्षमता से कई गुना अधिक छात्र दर्शाकर सरकारी छात्रवृत्ति की धनराशि हासिल की। एक संस्थान में मौके पर करीब 100 छात्र मिले, जबकि रिकॉर्ड और पोर्टल पर 405 छात्रों का पंजीकरण दिखाया गया था। फर्जीवाड़े के कई तथ्य सामने आने के बाद ही हरिद्वार जिले के 19 स्कूलों, कॉलेजों और आईटीआई के खिलाफ सिडकुल थाने में सरकारी धन के गबन में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
थापुल इस्माइलपुर मुजफ्फरनगर निवासी युवक के बारे में सत्यापन टीम को पता चला कि उसने उत्तर प्रदेश के एक आईटीआई में दाखिले के लिए अपने दस्तावेज दिए थे। उत्तराखंड में इस युवक ने न तो कोई दस्तावेज दिए और ना ही कोई पढ़ाई की। एसएसपी, हरिद्वार नवनीत सिंह ने कहा कि छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई है। सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
घोटाले की पांच कहानियां
सहारनपुर निवासी युवक को जब फोन किया गया तो उसने बताया कि वह खेती करता है। पहले हरिद्वार गया था, लेकिन उसने कभी एडमिशन नहीं लिया। पुरकाजी निवासी युवक ने बताया कि भाई के दाखिले के लिए रुड़की के निजी कॉलेज में इंक्वारी की थी, लेकिन दाखिला नहीं लिया। सहारनपुर के बिहारीगढ़ के तीन युवकों ने दस्तावेज छात्रवृत्ति के लिए लगाए गए थे। फोन करने पर तीनों के फोन बंद मिले।
वहीं, बहादराबाद, लक्सर और एक आईटीआई में जब टीम पहुंची तो बच्चे पोर्टल पर अधिक दिखाए गए थे, जबकि मौके पर कम मिले। थापुल इस्माइलपुर मुजफ्फरनगर निवासी युवक के बारे में सत्यापन टीम को पता चला कि उसने उत्तर प्रदेश के एक आईटीआई में दाखिले के लिए अपने दस्तावेज दिए थे। उत्तराखंड में इस युवक ने न तो कोई दस्तावेज दिए और न की कोई पढ़ाई की।
