ऋषिकेश।गढ़वाल मण्डल विकास निगम (जीएमवीएन) कर्मचारी संघ ने निगमों के प्रस्तावित एकीकरण के विरोध में मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार और निगम प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। यात्रा कार्यालय के मुख्य गेट पर आयोजित गेट मीटिंग में बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी एकत्र हुए तथा “इंकलाब जिंदाबाद”, “नियमितीकरण नहीं तो एकीकरण नहीं” और “कर्मचारी विरोधी नीतियां वापस लो” जैसे नारों के साथ अपना विरोध दर्ज कराया।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार यदि वास्तव में कर्मचारियों के हितों को लेकर गंभीर है तो सबसे पहले वर्षों से लंबित नियमितीकरण और विनियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करे। इसके बाद ही किसी प्रकार के निगम एकीकरण पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी कर एकीकरण लागू करने का प्रयास किया गया तो राज्यव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा।
गेट मीटिंग को संबोधित करते हुए कर्मचारी संघ के पूर्व उपाध्यक्ष किशन पँवार ने कहा कि सरकार की नीतियां कर्मचारी हितों के अनुरूप दिखाई नहीं दे रही हैं। उन्होंने कहा कि जीएमवीएन में लगातार अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या घट रही है। अनुभवी कर्मचारियों के अभाव का सीधा असर निगम की कार्यप्रणाली और आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। ऐसे समय में रिक्त पदों को भरने और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय एकीकरण का प्रस्ताव लाना उचित कदम नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार को पहले दोनों निगमों की आर्थिक स्थिति, लाभ-हानि, परिसंपत्तियों, देनदारियों तथा प्रशासनिक ढांचे की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। आर्थिक सुधारों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना एकीकरण का निर्णय कर्मचारियों के हितों के विपरीत साबित हो सकता है।
जीएमवीएन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मनमोहन सिंह चौधरी ने कहा कि जब तक कर्मचारियों का विनियमितीकरण नहीं किया जाता, तब तक किसी भी स्थिति में एकीकरण स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यात्रा कार्यालय से आंदोलन की शुरुआत हो चुकी है और आने वाले दिनों में निगम मुख्यालय पर भी बड़ी बैठक आयोजित कर प्रदर्शन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि निगम की तीनों प्रमुख यूनियन—प्रबंधकीय एसोसिएशन, कर्मचारी संघ और कर्मचारी संगठन—इस मुद्दे पर एकजुट हैं और संयुक्त रूप से संघर्ष करेंगी। कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल पर्यटन मंत्री, मुख्यमंत्री तथा अन्य मंत्रियों से भी मुलाकात कर अपना पक्ष रखेगा और सरकार से कर्मचारी हितों की रक्षा करने की मांग करेगा।
मनमोहन सिंह चौधरी ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों को रोजगार से हटाने की उनकी कोई मांग नहीं है। उनका कहना है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को भी सम्मानजनक जीवनयापन के अनुरूप वेतन मिलना चाहिए। साथ ही पूर्व की व्यवस्था के अनुसार निगम को मस्टरोल के आधार पर आवश्यकतानुसार कर्मचारियों की नियुक्ति का अधिकार भी मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की कई मांगें वर्षों से लंबित हैं और सरकार को उनका शीघ्र समाधान करना चाहिए।
संघ के महासचिव बृजमोहन जुयाल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों का हित होना चाहिए, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां इसके विपरीत दिखाई दे रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निगमों में लगातार कर्मचारियों की कमी बनी हुई है, इसके बावजूद सरकार जबरन एकीकरण का निर्णय थोपना चाहती है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किए बिना लिया गया कोई भी निर्णय स्वीकार नहीं किया जाएगा और आंदोलन लगातार जारी रहेगा।
गेट मीटिंग के दौरान कर्मचारियों ने निगम प्रबंधन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारियों की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान करने की बजाय प्रशासनिक बदलावों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार पहले रिक्त पदों पर नियुक्तियां करे, कर्मचारियों का नियमितीकरण सुनिश्चित करे और निगम की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाए।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यदि सरकार कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से लेकर वार्ता करती है तो समाधान का रास्ता निकाला जा सकता है। मगर एकतरफा निर्णय लेकर एकीकरण लागू करने का प्रयास किया गया तो कर्मचारी प्रदेशभर में आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए है और इसे हर स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।
गेट मीटिंग में बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। यात्रा कार्यालय से रमेश बिष्ट, अनूप बिष्ट, सुरेश पँवार, संदीप मेवाड़, मेघा रावत, विमला तोपवाल, प्रीति डिमरी, राजपाल कण्डारी, किशोरीलाल थपलियाल, हयात सिंह, शम्भू चौहान, शूरवीर नेगी, इंदमोहन नेगी, धर्म सिंह सजवाण, वीरेंद्र गुंसाई, आशुतोष रावत और अंकित ने भाग लिया।
इसके अलावा भरत भूमि इकाई से मनोज बिजल्वाण, रणवीर रावत और पूरन सिंह उपस्थित रहे। ऋषिलोक पर्यटक आवास गृह से रामकिशोर, राजेन्द्र सिंह, भाव सिंह, जयेंद्र सजवाण और राजेन्द्र रावत ने गेट मीटिंग में सहभागिता की। वहीं गंगा रिजॉर्ट से भगवान सिंह राणा और कैलाश सहित बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान कर्मचारियों ने एक स्वर में घोषणा की कि जब तक उनकी वर्षों पुरानी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि कर्मचारी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नियमितीकरण, रिक्त पदों पर नियुक्तियां, आर्थिक सुधार और निगम की मजबूती के लिए ठोस नीति बनाई जाए। कर्मचारियों का कहना था कि निगम को मजबूत बनाने का रास्ता कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा से होकर गुजरता है, किसी भी प्रकार का एकतरफा एकीकरण इसका समाधान नहीं हो सकता।
गेट मीटिंग के अंत में कर्मचारी नेताओं ने आंदोलन को चरणबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने का निर्णय दोहराया और कहा कि यदि सरकार ने समय रहते सकारात्मक पहल नहीं की तो प्रदेश स्तर पर व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। कर्मचारियों ने एकजुटता का संकल्प लेते हुए अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारे लगाए और संघर्ष को निर्णायक मोड़ तक ले जाने का ऐलान किया।
