देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारियों के वर्षों से लंबित मामलों के समाधान की दिशा में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल की पहल पर गृह सचिव शैलेश बगोली के साथ विस्तृत बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य आंदोलनकारियों के विभिन्न लंबित मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई और समाधान के लिए कैबिनेट की उप समिति गठित करने के प्रस्ताव पर सहमति बनी।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि राज्य आंदोलनकारियों से जुड़े मामलों का स्थायी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के लिए सरकार, प्रशासन और आंदोलनकारियों के प्रतिनिधियों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित की जाए। इसके बाद तैयार प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा, ताकि कैबिनेट स्तर पर निर्णय लेकर आंदोलनकारियों को शीघ्र न्याय दिलाया जा सके।
बैठक के दौरान सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारियों ने राज्य निर्माण के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में उनके सम्मान, अधिकारों और लंबित समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्षों से कई महत्वपूर्ण विषय लंबित हैं, जिनका समयबद्ध निस्तारण आवश्यक है।
गृह सचिव शैलेश बगोली ने आंदोलनकारियों की बातों को गंभीरता से सुना और विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने आश्वासन दिया कि लंबित मामलों के समाधान के लिए आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी तथा कैबिनेट की उप समिति के गठन का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा।
बैठक में राज्य आंदोलनकारियों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दे प्रमुखता से उठाए। इनमें सबसे पहले विभिन्न जिलों में अब तक राज्य आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण कार्य पूरा न होने का विषय शामिल रहा। प्रतिनिधियों ने कहा कि चिन्हीकरण प्रक्रिया अधूरी रहने के कारण अनेक पात्र आंदोलनकारी सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ पाने से वंचित हैं। इस प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने की मांग की गई।
इसके अलावा राज्य आंदोलनकारियों को मिलने वाले 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का लाभ सभी पात्र आंदोलनकारियों तक समान रूप से नहीं पहुंचने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधियों ने कहा कि आरक्षण संबंधी सरकारी प्रावधानों का पूर्ण और समान रूप से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी पात्र आंदोलनकारी के साथ भेदभाव की स्थिति उत्पन्न न हो।
बैठक में वर्ष 2011-12 में चयनित और उत्तीर्ण राज्य आंदोलनकारियों को नियुक्ति न मिलने का मामला भी विस्तार से रखा गया। आंदोलनकारियों ने कहा कि संबंधित अभ्यर्थियों को आज तक नियुक्ति नहीं मिल सकी है, जिससे उनमें निराशा है। उन्होंने सरकार से इस विषय में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।
एक अन्य महत्वपूर्ण विषय कैबिनेट के पूर्व आदेश से जुड़ा रहा। आंदोलनकारियों ने कहा कि आदेश में केवल अधीनस्थ चयन सेवा आयोग/चयन बोर्ड का उल्लेख किया गया है, जबकि अन्य चयन संस्थाओं को इसमें शामिल नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि सभी संबंधित चयन संस्थाओं को इस व्यवस्था के दायरे में शामिल किया जाए, ताकि किसी भी पात्र अभ्यर्थी के साथ असमानता न रहे।
प्रतिनिधियों ने राज्य आंदोलनकारियों के लिए आयु सीमा में आवश्यक छूट देने का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि लंबे समय से लंबित मामलों और प्रशासनिक विलंब के कारण अनेक आंदोलनकारी रोजगार के अवसरों से वंचित हो गए हैं। इसलिए आयु सीमा में वृद्धि कर उन्हें अवसर प्रदान किया जाना चाहिए।
बैठक में यह भी मांग उठी कि राज्य आंदोलनकारियों के मामलों की समीक्षा करने वाली समिति को अधिक अधिकार दिए जाएं। आंदोलनकारियों का कहना था कि समिति को अधिकार सम्पन्न बनाया जाएगा तो वह विभिन्न मामलों पर प्रभावी निर्णय लेने और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने में सक्षम होगी।
बैठक का वातावरण सकारात्मक रहा और दोनों पक्षों के बीच रचनात्मक चर्चा हुई। आंदोलनकारियों ने उम्मीद जताई कि इस बैठक के बाद उनके वर्षों पुराने लंबित मामलों के समाधान की दिशा में ठोस प्रगति देखने को मिलेगी। वहीं प्रशासन की ओर से भी सकारात्मक पहल का भरोसा दिलाया गया।
बैठक में गृह सचिव शैलेश बगोली, उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल, राजीव तलवार (वन्य जीव प्रतिपालक), समिति सदस्य ओमी उनियाल, ललित जोशी, प्रदीप कुकरेती, अंबुज शर्मा, संतन सिंह रावत तथा पी.सी. जोशी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। सभी प्रतिनिधियों ने राज्य आंदोलनकारियों के हितों से जुड़े विषयों पर अपने सुझाव और विचार रखे।
बैठक के समापन पर यह सहमति बनी कि राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं के समाधान के लिए त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित कर कैबिनेट की उप समिति के गठन का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। आंदोलनकारियों ने इसे सकारात्मक पहल बताते हुए उम्मीद जताई कि सरकार शीघ्र निर्णय लेकर राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान, अधिकारों और लंबित मांगों के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।
