अब उसके संभावित विदेशी, सीमापार और अंतरराज्यीय संपर्कों की जांच शुरू कर दी गई है।
एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह के अनुसार, आरोपित के मोबाइल फोन और इंटरनेट मीडिया अकाउंट्स की जांच में कई ऐसे डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जो उसे कट्टरपंथी नेटवर्क से जोड़ते हैं।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड।
टेलीग्राम, सिग्नल और इंस्टाग्राम पर सक्रिय कई ग्रुपों और चैट्स में कथित तौर पर शहादत और उग्र विचारधारा से जुड़ी सामग्री साझा की जा रही थी।
एसटीएफ सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में यह बात सामने आई है कि आरोपित उत्तराखंड में मस्जिद-मजार आदि पर सरकार की कार्रवाई से आहत होकर कट्टरपंथी सोच की तरफ आकर्षित हुआ था।
जांच एजेंसी का दावा है कि उसे फी सबीलिल्लाह (अल्लाह के लिए संघर्ष) जैसे विचारों से प्रेरित किया जा रहा था और वह स्वयं को किसी बड़े मिशन का हिस्सा मानने लगा था।
हालांकि, एसटीएफ ने अभी तक किसी संभावित लक्ष्य या प्रस्तावित हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपित की गतिविधियां और चैट्स किसी गंभीर साजिश की ओर संकेत करती हैं।
तेलंगाना कनेक्शन जांच के केंद्र में
जांच में तेलंगाना के एक व्यक्ति ‘जुबैर’ का नाम सामने आया है, जिससे आरोपित के संपर्क होने की बात कही जा रही है। सलाउद्दीन ने जुबैर से ही डेटोनेटर व अन्य हरियार लिए थे।
इसके अलावा उसे कुछ नकद धनराशि भी दी गई थी। जांच एजेंसी को संदेह है कि जुबैर संभवत: मोहम्मद इब्राहिम जुबैर है, जिसका पूर्व में अल कायदा से ताल्लुक होने की बात सामने आ चुकी है।
विस्फोटक और हथियारों से जुड़ी चैट्स मिलीं
एसटीएफ के अनुसार, आरोपित के मोबाइल से मिली चैट्स में हथियारों, विस्फोटक सामग्री और उनके सुरक्षित भंडारण से संबंधित संदिग्ध बातचीत भी सामने आई है। इन चैट्स की तकनीकी और फारेंसिक जांच की जा रही है।
डिलीट किए गए डेटा से खुल सकते हैं और राज
पूछताछ में आरोपित ने स्वीकार किया है कि उसने कुछ चैट्स और मोबाइल नंबर डिलीट किए थे। अब साइबर विशेषज्ञ उन डिलीट डेटा को रिकवर करने में लगे हैं।
एसटीएफ का मानना है कि इससे नेटवर्क के अन्य सदस्यों और संभावित संपर्कों के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है।
पाकिस्तान और विदेशी नेटवर्क की भी जांच
प्रारंभिक पूछताछ और गोपनीय स्रोतों से मिली जानकारी में सीमापार और विदेशी तत्वों की भूमिका के संकेत मिले हैं।
जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं आरोपित को विदेश में बैठे किसी नेटवर्क की ओर से प्रभावित या निर्देशित तो नहीं किया जा रहा था।
