जिसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग की चिंता बढ़ गई हैं.
एसआईआर में जांच में 1,99,121 ऐसे मतदाता हैं, जिनकी उम्र और उनके माता-पिता की दर्ज उम्र के बीच केवल 15 वर्ष या उससे भी कम का अंतर दिख रहा है. इसी तरह 92,114 मतदाताओं और उनके दादा-दादी या नाना-नानी की उम्र के बीच 40 वर्ष से कम का अंतर दर्ज मिला है. ये आंकड़े वास्तविक पारिवारिक स्थिति के बजाय पुराने रिकॉर्ड, गलत आयु प्रविष्टि, रिश्तों की मैपिंग और डेटा डिजिटाइजेशन की त्रुटियों की ओर संकेत करते हैं.
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
निर्वाचन विभाग अब ऐसे मामलों में मतदाताओं को नोटिस देकर दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगेगा. विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल विसंगति चिह्नित होने से किसी का नाम स्वतः मतदाता सूची से नहीं हटेगा. संबंधित व्यक्ति को रिकॉर्ड सुधारने और अपनी पात्रता साबित करने का अवसर दिया जाएगा.
निर्वाचन रिकॉर्ड की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची में 71,33,785 नाम शामिल किए गए हैं और दावे-आपत्तियों तथा नोटिसों का निस्तारण पूरा होने के बाद 15 सितंबर को अंतिम सूची जारी की जानी है. हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में सबसे ज्यादा ‘नाबालिग माता-पिता’ वाले रिकॉर्ड सामने आया है. माता-पिता और मतदाता की उम्र में 15 वर्ष या उससे कम अंतर वाले 1,99,121 मामलों में हरिद्वार सबसे आगे है.
जिले में ऐसे 43,418 मतदाता चिह्नित हुए हैं। ऊधमसिंह नगर में 38,818, देहरादून में 28,367 और नैनीताल में 22,650 रिकॉर्ड इस श्रेणी में आए हैं. इसके अलावा टिहरी में 12,688, अल्मोड़ा में 11,496, पौड़ी में 10,609, पिथौरागढ़ में 7,659, रुद्रप्रयाग में 5,505, चमोली में 4,625, बागेश्वर में 4,741, चंपावत में 4,273 और उत्तरकाशी में 4,272 मतदाता चिह्नित हुए हैं.
विधानसभा क्षेत्रवार देखें तो अल्मोड़ा की सल्ट विधानसभा में 14,001 जांचे गए मामलों में 3,938 यानी लगभग 28 प्रतिशत रिकॉर्ड ऐसे मिले. देहरादून की चकराता विधानसभा में 4,062 और हरिद्वार की खानपुर विधानसभा में 5,359 मतदाताओं की उम्र संबंधी प्रविष्टियों में यह असमान्यता पाई गई. इसके अलावा 1,09,547 मतदाता ऐसे भी मिले हैं, जिनकी उम्र उनके माता-पिता से 50 वर्ष से अधिक कम दर्ज है.
21 हजार मतदाताओं के दादा-दादी ‘जवान’
दादा-दादी या नाना-नानी और मतदाता की उम्र में 40 वर्ष से कम अंतर वाले रिकॉर्डों की संख्या 92,114 है. इसमें सबसे ज्यादा 21,036 मामले ऊधमसिंह नगर में सामने आए हैं. हरिद्वार में 14,071, देहरादून में 13,527 और नैनीताल में 11,875 मतदाता इस श्रेणी में चिह्नित हुए हैं.
अल्मोड़ा में 5,144, पौड़ी में 5,185, बागेश्वर में 4,507, पिथौरागढ़ में 4,115, टिहरी में 3,688, उत्तरकाशी में 2,608, चमोली में 2,405, चंपावत में 2,188 और रुद्रप्रयाग में 1,765 रिकॉर्डों में दादा-दादी या नाना-नानी की दर्ज आयु असामान्य रूप से कम मिली. बागेश्वर, कपकोट और अल्मोड़ा की द्वाराहाट विधानसभा में करीब 11-11 प्रतिशत मतदाता इस श्रेणी में पाए गए.
दो बच्चों की उम्र में नौ महीने से कम अंतर
SIR के दौरान एक और बड़ी विसंगति सामने आई है. प्रदेशभर में 2,39,566 ऐसे रिकॉर्ड मिले हैं, जिनमें एक ही परिवार के दो बच्चों की दर्ज उम्र के बीच नौ महीने से भी कम अंतर दिख रहा है. हरिद्वार की खानपुर विधानसभा में ऐसे 6,457, हरिद्वार ग्रामीण में 6,187 और देहरादून की विकासनगर विधानसभा में 3,236 मतदाता चिह्नित किए गए हैं.
कई जगह एक ही परिवार के मुखिया के नाम से छह या उससे ज्यादा मतदाताओं की मैपिंग भी मिली है. हरिद्वार जिले की पिरान कलियर विधानसभा में ऐसे 8,087 मतदाता दर्ज हैं. मंगलौर में 6,964 और लक्सर में 4,799 रिकॉर्ड इस श्रेणी में आए हैं.
नामों की स्पेलिंग की बड़ी समस्या
मतदाताओं और उनके रिश्तेदारों के नामों की गलत स्पेलिंग या पहचान संबंधी गड़बड़ी भी बड़े स्तर पर मिली है. देहरादून की रायपुर विधानसभा में 23,555 मतदाताओं यानी करीब 50 प्रतिशत रिकॉर्ड में स्वयं मतदाता के नाम से जुड़ी त्रुटि पाई गई. इसी क्षेत्र में 17,676 मामलों में रिश्तेदार के नाम की प्रविष्टि में गड़बड़ी मिली.
डोईवाला विधानसभा में 20,805 मतदाता, यानी लगभग 47 प्रतिशत रिकॉर्ड इस श्रेणी में आए। धर्मपुर में 23,048 और हरिद्वार की भेल रानीपुर विधानसभा में 15,379 मतदाताओं के नाम या रिश्तेदार के नाम से जुड़ी विसंगतियां सामने आई हैं.
5.26 लाख वोटरों की पुरानी सूची से मैपिंग नहीं
प्रदेश में 5,26,228 मतदाता ऐसे हैं, जिन्हें निर्वाचन विभाग पुरानी आधार मतदाता सूची से मैप नहीं कर पाया. सबसे गंभीर स्थिति ऊधमसिंह नगर की रुद्रपुर विधानसभा में है, जहां 42,808 मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो सकी. देहरादून की रायपुर विधानसभा में 17,859, विकासनगर में 10,536 और ऊधमसिंह नगर की जसपुर विधानसभा में 6,222 मतदाता पुराने रिकॉर्ड से नहीं जुड़ पाए.
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निर्वाचन विभाग ऐसे मतदाताओं को नोटिस जारी करेगा. नोटिस और सत्यापन के बाद भी संबंधित व्यक्ति या उसके दस्तावेज उपलब्ध नहीं हुए तो नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है.
कुल मतदाताओं के अनुपात में देहरादून में सबसे अधिक 3,95,868 रिकॉर्ड में विसंगतियां मिली हैं, जो जिले के 11,90,805 मतदाताओं का करीब 33 प्रतिशत है। हरिद्वार में 12,46,219 मतदाताओं में से 3,90,312 यानी 31 प्रतिशत रिकॉर्ड में गड़बड़ी है.
मतदाता क्या करें?
मतदाता को सबसे पहले ड्राफ्ट सूची में अपना नाम, जन्मतिथि, पता और रिश्तेदार का विवरण जांचना चाहिए. नोटिस मिलने पर उसे नजरअंदाज करने के बजाय निर्धारित समय में बीएलओ या संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के सामने दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे.
निर्वाचन विभाग का कहना है कि SIR का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची में वर्षों से चली आ रही आयु, संबंध, पता, स्पेलिंग और डुप्लीकेट प्रविष्टियों को ठीक करना है. अंतिम फैसला दस्तावेजों, सुनवाई और सत्यापन के बाद ही किया जाएगा.
