देहरादून। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में सामने आए आंकड़ों ने जहां निर्वाचन विभाग को चौंकाया, वहीं लोगों को मुस्कुराने का भी मौका दे दिया। सरकारी रिकॉर्ड में हजारों ऐसे मामले मिले, जिनमें माता-पिता और संतान की उम्र में महज कुछ वर्षों का अंतर दर्ज है। इससे एक पुराना मजाक फिर चर्चा में आ गया—”उम्र पूछो तो जवाब मिलता है, होंगे… 42-43 के आसपास!”
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
उत्तराखंड देहरादून में मतदाता सूची की बड़ी गड़बड़ियां उजागर, 1.86 लाख नाम हटे
देहरादून में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान चौंकाने वाली विसंगतियां सामने आई हैं। जांच में 28,637 ऐसे मतदाता मिले, जिनकी उम्र और उनके माता-पिता की उम्र में 15 वर्ष से भी कम का अंतर दर्ज है। वहीं 16,351 मामलों में यह अंतर 50 वर्ष से अधिक पाया गया। इसके अलावा 13,527 रिकॉर्ड में दादा-दादी या नाना-नानी और मतदाता की उम्र में 40 वर्ष से कम का अंतर दर्ज मिला, जिससे वर्षों से चले आ रहे रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। सत्यापन के बाद देहरादून की मतदाता सूची से 1,86,008 नाम हटाए गए हैं। पहले जिले में 13,76,813 मतदाता दर्ज थे, जो अब घटकर 11,90,805 रह गए हैं। निर्वाचन विभाग के अनुसार एसआईआर अभियान ने मृतक, स्थानांतरित और अपात्र मतदाताओं के साथ-साथ डेटा एंट्री व पारिवारिक विवरण की गंभीर त्रुटियों को भी उजागर किया है। 13 अगस्त तक दावे और आपत्तियां दर्ज कर रिकॉर्ड में सुधार कराया जा सकता है।
उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में उम्र कम बताने की आदत पर अक्सर हल्के-फुल्के अंदाज में चर्चा होती रहती है। कई लोग 55 की उम्र में खुद को 42 बताते हैं, तो 50 वर्ष की महिला भी मुस्कुराकर कह देती हैं, “अभी तो 35 भी पूरे कहाँ हुए!” मजे की बात यह कि चेहरा अक्सर सच्चाई की गवाही दे देता है।
वहीं पहाड़ी क्षेत्रों का अंदाज कुछ अलग माना जाता है। यहां कई परिवारों में जन्म की तारीख, समय और स्थान तक सुरक्षित रहता है। विवाह के समय जन्मपत्री मिलाने की परंपरा के कारण उम्र का रिकॉर्ड भी अपेक्षाकृत स्पष्ट रहता है। ऐसे में 30 साल का युवक अपनी वास्तविक उम्र बताए तो लोग उल्टा कह देते हैं, “अरे, तुम तो 22-23 के लग रहे हो!”
उम्र का यह किस्सा यहीं खत्म नहीं होता। समाज में एक और दिलचस्प दृश्य अक्सर देखने को मिलता है। 45 साल की महिला अगर किसी 30 साल की महिला को “आंटी” कह दे तो माहौल कुछ सेकंड के लिए बिल्कुल शांत हो जाता है। जवाब भी कम मजेदार नहीं होता—”पहले अपनी उम्र तो बता दीजिए!”
सोशल मीडिया पर लोग मजाक में कह रहे हैं कि अगर उम्र घटाने की यह रफ्तार जारी रही तो अगली मतदाता सूची में कुछ माता-पिता अपने ही बच्चों के बड़े भाई-बहन बन जाएंगे।
हालांकि, वास्तविकता यह है कि निर्वाचन विभाग द्वारा सामने लाई गई विसंगतियां मुख्य रूप से पुराने रिकॉर्ड, डेटा एंट्री की त्रुटियों, अधूरी जानकारी और वर्षों से अद्यतन न होने के कारण भी हो सकती हैं। इन्हें केवल लोगों द्वारा जानबूझकर उम्र कम बताने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
यानी संदेश साफ है—उम्र चाहे दिल की 25 हो, मगर सरकारी रिकॉर्ड में वही लिखवाइए जो सच हो, वरना अगली बार मतदाता सूची भी पूछ सकती है—”बेटा, तुम अपने पिताजी से सिर्फ 12 साल छोटे कैसे हो?”
