इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें जंतर-मंतर में सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ मंच पर उत्तराखंड पुलिस की वर्दी पहने शख्स दिख रहा है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि इस पुलिस जवान ने सीजेपी आंदोलन जॉइन कर लिया है। इस जवान का नाम शेर सिंह बताया जा रहा है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
उत्तराखंड पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, शेर सिंह ने चार दिन पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह वर्तमान में पिथौरागढ़ पुलिस लाइन में तैनात थे। दो-चार दिन पहले शेर सिंह 2009 में उत्तराखंड पुलिस में भर्ती हुआ था। पुलिस के रिकॉर्ड बताते हैं कि शेर सिंह का इतिहास काफी विवादित रहा है। वह बदमाशों की मुखबिरी में जेल जा चुका है।
कौन है शेर सिंह
हरिद्वार जनपद के रुड़की का रहने वाला शेर सिंह इससे पहले आईजी गढ़वाल का गनर रह चुका है। 2025 में इसे उत्तराखंड पुलिस से सस्पेंड कर दिया गया था। यह भी जानकारी है कि शेर सिंह पर ड्यूटी में लापरवाही के आरोप लगे थे। सात से आठ महीने पहले जमीन के लेन-देन के मामले में प्रवीण बाल्मिकी गैंग की मुखबिरी में शेर सिंह को एसटीएफ देहरादून ने गिरफ्तार किया था। तब शेर सिंह जेल भी गया था। शेर सिंह सोशल मीडिया पर भीम आर्मी से जुड़े वीडियो भी शेयर करता रहा है।
आईजी का गनर रह चुका
शेर सिंह रुड़की के पथरी के बहादपुर जट्ट गांव का निवासी है। कुछ माह पहले आईजी गढ़वाल का गनर था। जमीन मामले में गिरफ्तारी और जेल के बाद वह सस्पेंड चल रहा था। सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि इसने वीआरएस के लिए भी मुख्यालय को पत्र भेज रखा है।
सीजेपी और सरकार में क्या बात हुई?
इससे पहले सीजेपी और सरकार के बीच शुक्रवार को लंबी बातचीत हुई, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन सकी और सीजेपी ने साफ कहा कि उनका इस्तीफा होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
बातचीत में सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा तथा जितेंद्र सिंह और सीजेपी की ओर से प्रवक्ता सौरव दास तथा आशुतोष रांका शामिल थे। सीजेपी की ओर से एक मांग पत्र भी सौंपा गया। श्री प्रधान के इस्तीफे के अलावा पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा और दिल्ली में सीजेपी के धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों को रद्द करने की मांग प्रमुख हैं।
