भाजपा भ्रष्ट तो कांग्रेस महाभ्रष्ट, ताकि सनद रहे”

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उत्तराखंड विधानसभा में बैकडोर भर्तियों का बड़ा खुलासा: कांग्रेस और भाजपा दोनों सरकारों पर लगे आरोप, 228 से अधिक नियुक्तियां हुईं निरस्त
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा में वर्षों तक चली कथित बैकडोर (पीछे के दरवाजे से) भर्तियों का मामला राज्य के सबसे चर्चित भर्ती विवादों में शामिल रहा है। जांच में सामने आया कि राज्य गठन के बाद कांग्रेस और भाजपा, दोनों दलों के शासनकाल में विभिन्न विधानसभा अध्यक्षों के कार्यकाल के दौरान बिना खुली प्रतियोगी प्रक्रिया और विज्ञापन के तदर्थ नियुक्तियां की गईं, जिनमें से कई को बाद में नियमित भी कर दिया गया। वर्ष 2022 में इस पूरे मामले की जांच के बाद 228 से अधिक नियुक्तियों को निरस्त कर दिया गया।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


विवाद ने तब बड़ा रूप लिया जब तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने शिकायतों के आधार पर उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की। समिति की रिपोर्ट में कई नियुक्तियां नियमों के विपरीत पाई गईं, जिसके बाद विधानसभा सचिवालय ने बड़े पैमाने पर नियुक्तियां रद्द करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
कांग्रेस शासनकाल में हुई नियुक्तियां
जांच रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस सरकार के दौरान तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष यशपाल आर्य (2002–2007) के कार्यकाल में लगभग 85 तदर्थ नियुक्तियां की गईं।
इसके बाद गोविंद सिंह कुंजवाल (2012–2017) के कार्यकाल में सबसे अधिक विवाद सामने आया। वर्ष 2016 के दौरान 150 से अधिक नियुक्तियां किए जाने का मामला प्रकाश में आया, जिन्हें बाद में जांच के आधार पर निरस्त कर दिया गया।
भाजपा शासनकाल में भी लगे आरोप
भाजपा शासनकाल भी इस विवाद से अछूता नहीं रहा। राज्य गठन के बाद प्रकाश पंत (2000–2002) के विधानसभा अध्यक्ष रहते हुए लगभग 130 नियुक्तियां किए जाने का उल्लेख जांच में सामने आया।
इसके बाद हरबंस कपूर (2007–2012) के कार्यकाल में करीब 35 नियुक्तियां हुईं।
वहीं प्रेमचंद अग्रवाल (2017–2022) के विधानसभा अध्यक्ष रहते हुए 72 से 74 नियुक्तियों पर सवाल उठे, जिन्हें वर्ष 2022 की कार्रवाई में निरस्त कर दिया गया।
2022 में हुई ऐतिहासिक कार्रवाई
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर 228 से अधिक बैकडोर नियुक्तियों को निरस्त किया गया। यह कार्रवाई उत्तराखंड विधानसभा के इतिहास की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई मानी गई। बाद में इस निर्णय को न्यायिक स्तर पर भी राहत मिली और इसे वैधानिक समर्थन प्राप्त हुआ।
निष्कर्ष
उत्तराखंड विधानसभा की बैकडोर भर्ती का विवाद किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं रहा। जांच में कांग्रेस और भाजपा, दोनों दलों के शासनकाल में हुई नियुक्तियों पर सवाल उठे। वर्ष 2022 की कार्रवाई ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों के पालन की आवश्यकता को रेखांकित किया तथा भविष्य में ऐसी नियुक्तियों पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।


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