देहरादून। राज्य आंदोलनकारियों की लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर सरकार पर दबाव बढ़ने लगा है। चिन्हित राज्य निर्माण सेनानी संयुक्त समिति उत्तराखंड के केंद्रीय उपाध्यक्ष बाल गोविंद डोभाल ने स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त तक आंदोलनकारियों की सात प्रमुख मांगों पर ठोस घोषणा करने की मांग उठाई है। उन्होंने राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद की उपाध्यक्षा चारू माथुर कोठारी सहित परिषद के सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों का आभार जताते हुए उम्मीद जताई कि वे आंदोलनकारियों की आवाज को मुख्यमंत्री और सरकार तक मजबूती से पहुंचाएंगे।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
डोभाल ने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए संघर्ष करने वाले अधिकांश आंदोलनकारी अब 60 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं। ऐसे समय में उनकी लंबित मांगों का समाधान सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने पेंशन में समान वृद्धि कर इसे 15 हजार रुपये प्रतिमाह करने, 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू करने तथा वास्तविक रूप से वंचित आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण तत्काल पूरा करने की मांग की।
राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद की उपाध्यक्षा चारू माथुर कोठारी ने आंदोलनकारियों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में राज्य आंदोलनकारी के साथ परिवार के एक सदस्य को सहवर्ती के रूप में निशुल्क यात्रा की सुविधा मिलनी चाहिए। उन्होंने प्रत्येक तहसील में राज्य आंदोलनकारियों की स्मृति में शहीद स्मारक बनाए जाने तथा आंदोलनकारियों को ‘राज्य निर्माण सेनानी’ का सम्मानजनक दर्जा देने की मांग भी रखी।
इसके साथ ही गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के सभी सरकारी गेस्ट हाउसों में राज्य आंदोलनकारियों के लिए निशुल्क रात्रि विश्राम की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई है।
राज्य आंदोलनकारी सुरेंद्र प्रसाद सकलानी और हयात सिंह राणा ने मुख्यमंत्री के समक्ष आंदोलनकारियों की मांगें मजबूती से रखने के लिए चारू माथुर कोठारी समेत परिषद के सभी पदाधिकारियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों ने अपना जीवन उत्तराखंड के निर्माण के संघर्ष में लगाया है। सरकार को अब उनके सम्मान और अधिकारों से जुड़े विषयों पर निर्णायक कदम उठाना चाहिए।
राज्य आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि 15 अगस्त तक यदि सरकार सातों मांगों पर सकारात्मक घोषणा करती है तो आंदोलनकारियों में सरकार के प्रति विश्वास और मजबूत होगा। मांगों पर ठोस निर्णय लंबित रहने की स्थिति में राज्य आंदोलनकारी प्रदेशभर में आंदोलन को तेज करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री और राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आंदोलनकारियों को ठोस सौगात देने की मांग की है।
