2022 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी अपनी पारंपरिक सीट खटीमा हार गए थे. उन्हें इस बार खुद से इस सीट की जिम्मेदारी सौंपी र्गई है. वह वहां पार्टी के तमाम कार्यक्रमों पर नजर रखेंगे. सीएम धामी को साफ तौर से पार्टी की तरफ से दिशा निर्देश है कि राजनीतिक हालात का अंदाजा लगाएंगे और अगले विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी के लिए अच्छा माहौल बनाने की दिशा में काम करेंगे.
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
बीजेपी चुनाव से पहले एंटी-इनकंबेंसी और GEN-Z वोटरों की नाराजगी को हर हाल में दूर करना चाहती है. 2022 में BJP जिन 23 सीटों पर हारी थी, उनमें से 19 पर कांग्रेस जीती थी, जबकि बीएसपी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो-दो सीटें जीती थीं.
वरिष्ठ नेताओं को हारी सीटें जिताने का जिम्मा
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘ये नेता अपने तय किए गए चुनाव क्षेत्रों का दौरा करेंगे, राजनीतिक हालात का अंदाजा लगाएंगे, स्थानीय पार्टी नेताओं के साथ स्ट्रैटेजी बनाएंगे और 2027 में बीजेपी की जीत के लिए अच्छा माहौल बनाएंगे.’ बीजेपी ने 2022 में उत्तराखंड की 70 में से 47 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी. हालांकि धामी खटीमा हार गए, लेकिन बाद में वह चंपावत से उपचुनाव में चुने गए, जिससे वे मुख्यमंत्री बने रहे.
बीजेपी नेता ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, ‘धामी का होमटाउन खटीमा भी एक ऐसा चुनाव क्षेत्र है जहां वे अक्सर जाते हैं. वे लोगों को जानते हैं और आराम से उनसे मिलने और जनता के साथ-साथ बीजेपी कार्यकर्ताओं के मुद्दों को सुलझाने के लिए समय निकाल सकते हैं.’
चंपावत से ही चुनाव लड़ सकते हैं सीएम धामी
बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व 2027 के चुनावों के करीब यह आखिरी फैसला करेगा कि धामी खटीमा से चुनाव लड़ेंगे या चंपावत से. हालांकि, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि उन्हें चंपावत से चुनाव लड़ना चाहिए, जहां वे खटीमा हारने के बाद जीते थे.
चकराता और धारचूला समेत सभी 23 सीटें जीतना चाहती है बीजेपी
- बीजेपी के राज्य प्रमुख और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट को हरिद्वार जिले की मुस्लिम बहुल सीट पिरान कलियार सौंपी गई है, जहां पार्टी कभी नहीं जीती है. कांग्रेस के फुरकान अहमद 2012 से इस सीट पर विधायक हैं.
- राज्यसभा सांसद और बीजेपी के राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष नरेश बंसल को मंगलौर सीट का जिम्मा सौंपा गया है. यह सीट भी मुस्लिम बहुल है, जिसे अब तक बीएसपी और कांग्रेस जीतती रही है.
- उत्तराखंड में चकराता और धारचूला दो ऐसी सीटें हैं जहां बीजेपी कभी भी चुनाव नहीं जीत पाई है. इसलिए पार्टी महासचिव दीप्ति रावत को चकराता और वरिष्ठ नेता गणेश भंडारी धारचूला की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
- बीजेपी ने अपनी हारी हुई सीटों का प्रभार जिन वरिष्ठ नेताओं को सौंपी गई है उसमें केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा और पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत शामिल हैं. गढ़वाल के सांसद अनिल बलूनी को बद्रीनाथ सीट सौंपी गई है, यह सीट भट्ट 2022 में हार गए थे.
- बीजेपी के राज्य महासचिव कुंदन परिहार, जिन्हें हरिद्वार ग्रामीण सीट सौंपी गई है. उन्होंने कहा कि इस कवायद का मकसद पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करना है. परिहार ने कहा, ‘यह इन 23 सीटों के लिए एक माइक्रो-मैनेजमेंट एक्सरसाइज है. नेता अपने-अपने तय चुनाव क्षेत्रों का दौरा करेंगे, पोलिंग बूथ लेवल पर पार्टी को मजबूत करने के लिए लोकल नेताओं के साथ मीटिंग करेंगे और राजनीतिक समीकरणों और दूसरी चुनौतियों का आकलन करेंगे.’
