हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि शहर प्रशासन के पास किसी निजी कार्यक्रम को रद्द कराने का अधिकार है या नहीं, इसे लेकर वह निश्चित नहीं हैं।
भागवत 25 अगस्त को अमेरिका पहुंचे हैं। उनका अमेरिकी दौरा RSS के शताब्दी वर्ष में चलाए जा रहे वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। अमेरिका के बाद वह कनाडा और ब्रिटेन भी जाएंगे। न्यूयॉर्क में 29 अगस्त को वह ‘Universal Oneness Celebrations’ यानी सार्वभौमिक एकता उत्सव कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी समुदाय को संबोधित करेंगे। आयोजकों के मुताबिक, कार्यक्रम में करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
ममदानी ने क्या कहा?
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब ममदानी से पूछा गया कि क्या मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होने वाले कार्यक्रम को रद्द किया जाना चाहिए, तो उन्होंने कहा, “मैं इस रैली का समर्थन नहीं करता, लेकिन मुझे नहीं पता कि किसी प्राइवेट इवेंट को रद्द करने का अधिकार शहर के पास है या नहीं।”
ममदानी ने कहा, “मैं यहां हमारे शहर के इतिहास के पहले भारतीय-अमेरिकी मेयर के तौर पर खड़ा हूं। मेरी मां का परिवार अभी भी भारत में ही रहता है। मेरे परिवार ने मुझे भारत की जो छवि दिखाई और जिसे देखते हुए मैं बड़ा हुआ, वह एक ऐसे समाज की थी जिसमें कई तरह के लोग मिल-जुलकर रहते हैं- एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य जो भारत से जुड़े हर व्यक्ति को अपना मानता है। सच कहूं तो, किसी देश के बारे में ऐसी सोच रखने वाले आंदोलन का बढ़ना बहुत चिंताजनक है जो दूसरों को अलग-थलग करने या बाहर रखने पर आधारित हो। इसलिए मैं इसका कड़ा विरोध करता हूं- न सिर्फ एक भारतीय-अमेरिकी के तौर पर, बल्कि एक ऐसे शहर के मेयर के तौर पर भी जो हर व्यक्ति को अपना मानता है, चाहे उनका रंग, पंथ, धर्म, आस्था कुछ भी हो या वे कहीं से भी आए हों।”
कार्यक्रम में क्या होगा?
‘सार्वभौमिक एकता उत्सव’ का आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) कर रहा है। आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन रक्षाबंधन के अवसर पर एकता, सामाजिक जिम्मेदारी, संवाद और वैश्विक सद्भाव का संदेश देने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
आयोजकों ने कार्यक्रम का केंद्रीय विचार ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ यानी ‘दुनिया एक परिवार है’ बताया है। उनके अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य कृत्रिम विभाजनों से आगे बढ़कर मानवता के साझा संबंधों, आपसी सम्मान और सद्भाव पर जोर देना है।
AHEAD ने 21 अगस्त को दावा किया था कि 135 से अधिक हिंदू-अमेरिकी संगठन इस आयोजन से जुड़े हैं। कार्यक्रम में सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, धार्मिक और सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल होंगे।
विरोध में उतरे कई संगठन
भागवत के कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क में विरोध भी शुरू हो गया है। कई अंतरधार्मिक और नागरिक अधिकार संगठनों ने न्यूयॉर्क सिटी हॉल के बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कार्यक्रम का विरोध किया और मैडिसन स्क्वायर गार्डन से इसे रद्द करने की अपील की।
विरोध करने वाले संगठनों में हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स, इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) और इंटरफेथ सेंटर ऑफ न्यूयॉर्क समेत कई संगठन शामिल थे। मंगलवार को हुए विरोध को “No Platform for Hate” के नाम से आयोजित किया गया। इसमें मुस्लिम, हिंदू, सिख, ईसाई, दलित और अंतरधार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
विरोध करने वाले संगठनों का आरोप है कि RSS की विचारधारा भारत में अल्पसंख्यकों और बहुलतावाद को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। इसी आधार पर वे भागवत को न्यूयॉर्क में मंच दिए जाने का विरोध कर रहे हैं।
RSS की ओर से क्या कहा गया?
RSS की ओर से भागवत के विदेश दौरे को संगठन के शताब्दी वर्ष में चलाए जा रहे वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा बताया गया है। संगठन के मुताबिक, इस अभियान का उद्देश्य भारतीय मूल के लोगों और व्यापक समुदायों से संवाद करना तथा भारत की सांस्कृतिक परंपराओं और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की अवधारणा को सामने रखना है।
RSS के लिए क्यों अहम है भागवत का अमेरिकी दौरा?
RSS इस साल अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। इसी सिलसिले में संगठन ने विदेशों में भी संपर्क कार्यक्रम बढ़ाए हैं। भागवत का मौजूदा दौरा अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन तक फैला है। RSS के अनुसार, इसका उद्देश्य विदेशों में भारतीय और हिंदू समुदायों के साथ संवाद को मजबूत करना तथा संगठन और उसकी विचारधारा को लेकर मौजूद धारणाओं पर बातचीत करना है।
न्यूयॉर्क का 29 अगस्त वाला कार्यक्रम इस दौरे का सबसे बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम माना जा रहा है। करीब 5,000 लोगों की प्रस्तावित मौजूदगी और मैडिसन स्क्वायर गार्डन जैसे प्रतिष्ठित स्थल के कारण इस पर भारत और अमेरिका दोनों में राजनीतिक नजरें टिकी हैं।
