नई दिल्ली। भारत ने एक देश, एक समय की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। केंद्र सरकार ने भारतीय मानक समय (आईएसटी) को अनिवार्य करने के लिए नियमों की अधिसूचना जारी कर दी है।

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इन नियमों के तहत मार्च 2027 से पूरे देश में सभी कानूनी, प्रशासनिक, व्यावसायिक और डिजिटल कार्यों में भारतीय मानक समय (आईएसटी) एकमात्र अनिवार्य मानक समय संदर्भ होगा।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि जब पूरे देश में घड़ी का समय पहले से ही एक है तो एक देश, एक समय की जरूरत क्यों पड़ी। दरअसल देश में भले ही घड़ी का समय एक है, लेकिन उसका स्रोत एक नहीं है।

आमतौर पर लग सकता है कि इससे फर्क नहीं पड़ता, लेकिन यह आपके पैसे, सुरक्षा और देश की सुरक्षा सबसे जुड़ा मामला है। दरअसल, यह बैंक, सर्वर, बिजली ग्रिड और दूसरे सिस्टम समय के स्रोत के लिए जीपीएस जैसे विदेशी सेटेलाइट पर निर्भर हैं।

क्यों पाई एक देश-एक टाइम की जरूरत?

नए नियमों का प्रमुख मकसद विदेशी उपग्रह आधारित समय स्रोतों पर निर्भरता कम करना है। इसके साथ ही डिजिटल दुनिया में कुछ सेकंड या मिलीसेकंड का अंतर भी बहुत मायने रखता है इसलिए सही टाइम स्टेंपिंग बेहद जरूरी है। टाइम-स्टैंप एक निश्चित समय का सटीक रिकार्ड होता है जो यह बताता है कि कोई कार्रवाई कब हुई।

उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने 27 अगस्त को लीगल मेट्रोलाजी (भारतीय मानक समय) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी की, लेकिन आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन के 180 दिन बाद नए नियम लागू होंगे ताकि सभी सरकारी विभाग, व्यावसायिक संस्थान अपनी घड़ियों और सर्वरों को आइएसटी के साथ समायोजित कर सकें। इस पहल का उद्देश्य देश के सभी सरकारी, वित्तीय और डिजिटल बुनियादी ढांचे में समय की एकरूपता और सटीकता लाना है।

आपकी जिंदगी पर क्या असर?

बैंकिंग और डिजिटल भुगतान, रेलवे, हवाईअड्डा, दूरसंचार, पावर ग्रिड और आधिकारिक कानूनी रिकार्ड अब सटीक आइएसटी टाइम-स्टैंप का उपयोग करेंगे।

यह कदम डिजिटल और प्रौद्योगिकी आधारित सिस्टमों पर बढ़ती निर्भरता के बीच उठाया गया है। बैंकिंग और भुगतान, दूरसंचार, रेलवे, पावर ग्रिड और कंप्यूटर नेटवर्क सटीक और समन्वित समय स्टैंप पर निर्भर करते हैं।

वर्तमान में उपयोग में लाए जा रहे विभिन्न समय स्रातों के बीच अंतर ऐसे कार्यों के समन्वय और रिकार्डिंग को प्रभावित कर सकती हैं। इस कारण एक देश, एक समय लागू करने की आवश्यकता महसूस हुई है।

सरकार भारतीय संस्थानों और लीगल मेट्रोलाजी प्रयोगशालाओं के माध्यम से सटीक आइएसटी का प्रसार करने के लिए बुनियादी ढांचा तैयार कर रही है।

नए नियमों से भारत के स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन सिस्टम (नाविक) के साथ अन्य स्वीकृत भारतीय समय स्रोतों के उपयोग की अनुमति मिलेगी ताकि सुरक्षित और विश्वसनीय समय प्रसार सुनिश्चित किया जा सके।

‘व्हाइट रैबिट’ प्रौद्योगिकी क्या है?

‘व्हाइट रैबिट’ प्रौद्योगिकी का प्रयोग सफल एक देश, एक समय पहल के तहत सरकार ने जुलाई 2026 में बेंगलुरु की रीजनल रेफरेंस स्टैंडर्ड लेबोरेटरी (आरआरएसएल) में व्हाइट रैबिट टेक्नोलाजी पर आधारित आइएसटी डेमांस्ट्रेशन नेटवर्क शुरू किया। यह सुरक्षित नेटवर्क पूरे देश में नैनोसेकेंड से भी कम समय में सटीक समय दर्शाता है।

इससे वित्त, दूरसंचार और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए विदेशी जीपीएस पर निर्भरता समाप्त होगी। व्हाइट रैबिट टेक्नोलाजी एडवांस तकनीक है।

इसका मुख्य उद्देश्य हजारों जुड़े हुए उपकरणों के बीच एक नैनोसेकेंड से भी कम समय का सटीक तालमेल स्थापित करना और देशभर में समान, सटीक भारतीय मानक समय (आईएसटी) सिस्टम बनाना है।

बैंकिंग, रेलवे, डिजिटल भुगतान में समय की सटीकता

इस पायलट प्रोजेक्ट ने दिखाया है कि आईएसटी का उपयोग बैंकिंग, दूरसंचार, बिजली, ट्रांसपोर्ट और डिजिटल गवर्नेंस जैसे सेक्टरों में कैसे किया जा सकता है। यह परियोजना उपभोक्ता मामले विभाग, सीएसआइआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की संयुक्त पहल है।

इसी तरह के एक प्रदर्शन में सीएसआईर-एनपीएल के साथ मिलकर उपभोक्ता मामले विभाग, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी), एनएसई और सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल ने बेंगलुरु प्रयोगशाला और एनएसई की चेन्नई यूनिट के बीच सुरक्षित समय प्रसारण का सत्यापन परीक्षण भी पूरा किया है।


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