उत्तरकाशी। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन से जुड़े चिन्हित राज्य आंदोलनकारियों ने अपनी लंबित मांगों के समाधान के लिए एक बार फिर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति, उत्तराखंड ने आगामी 25 सितंबर को उत्तरकाशी में विशाल प्रदर्शन का आह्वान किया है। प्रदर्शन में जिले के चिन्हित और सम्मानित राज्य आंदोलनकारियों के साथ ही लंबे समय से चिन्हीकरण और पेंशन जैसी सुविधाओं से वंचित आंदोलनकारियों के शामिल होने की अपील की गई है।
समिति के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. विजेंद्र पोखरियाल ने राज्य आंदोलनकारियों का आह्वान करते हुए कहा कि सभी आंदोलनकारी 25 सितंबर को प्रातः 10 बजे जिलाधिकारी कार्यालय, उत्तरकाशी पहुंचें और अपनी लंबित मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद करें। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान के कारण उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में आया, लेकिन राज्य गठन के वर्षों बाद भी अनेक आंदोलनकारी अपनी मूलभूत मांगों के लिए शासन-प्रशासन के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
समिति ने सरकार के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग सभी चिन्हित राज्य आंदोलनकारियों के लिए समान पेंशन की है। संगठन का कहना है कि पेंशन व्यवस्था में समानता लाई जानी चाहिए और सभी चिन्हित राज्य आंदोलनकारियों को ₹30 हजार प्रतिमाह पेंशन दी जानी चाहिए। समिति के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों और परिस्थितियों के कारण आंदोलनकारियों के बीच पेंशन संबंधी अंतर को समाप्त करते हुए एक समान पेंशन व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
इसके साथ ही लंबित पेंशन प्रकरणों को तत्काल स्वीकृति देने की मांग भी उठाई गई है। संगठन का कहना है कि जिन राज्य आंदोलनकारियों के पेंशन संबंधी मामले लंबे समय से शासन अथवा प्रशासन के स्तर पर लंबित हैं, उनका शीघ्र निस्तारण किया जाए। आंदोलनकारियों का कहना है कि पात्रता पूरी करने के बावजूद यदि किसी व्यक्ति का मामला लंबे समय तक लंबित रहता है तो इससे उसे आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
समिति की एक अन्य महत्वपूर्ण मांग सरकारी नौकरियों और सेवाओं में मूल निवास 1950 की व्यवस्था लागू करने से जुड़ी है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि उत्तराखंड के हितों और राज्य आंदोलन की मूल भावना को ध्यान में रखते हुए सरकारी नौकरियों एवं सेवाओं में मूल निवास 1950 की व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।
इसके अलावा चिन्हीकरण से वंचित राज्य आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण पूरा करने की मांग भी प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा रहेगी। समिति के अनुसार तहसील स्तर पर चिन्हीकरण से संबंधित अनेक आवेदन अभी भी लंबित हैं। संगठन ने इन मामलों पर शीघ्र विचार कर पात्र एवं छूटे हुए आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण पूरा करने की मांग की है। समिति का कहना है कि राज्य निर्माण आंदोलन में योगदान देने वाले ऐसे लोगों को भी सम्मान और सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए, जो किसी कारणवश अब तक सरकारी रिकॉर्ड में चिन्हित नहीं हो पाए हैं।
डॉ. विजेंद्र पोखरियाल ने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण का इतिहास आंदोलनकारियों के संघर्ष से जुड़ा हुआ है। आंदोलनकारियों ने लंबे समय तक सड़कों पर संघर्ष किया और अलग राज्य की मांग को लेकर विभिन्न स्तरों पर आंदोलन किए। ऐसे में राज्य बनने के बाद आंदोलनकारियों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि 25 सितंबर का प्रदर्शन केवल मांगों को सरकार तक पहुंचाने का माध्यम नहीं है, बल्कि आंदोलनकारियों की एकजुटता का भी संदेश होगा। उन्होंने उत्तरकाशी जिले के सभी चिन्हित राज्य आंदोलनकारियों से अपील की कि वे निर्धारित समय पर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचें और बड़ी संख्या में भाग लेकर प्रदर्शन को सफल बनाएं।
समिति ने स्पष्ट किया है कि आंदोलनकारियों की मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। पेंशन में समानता, लंबित पेंशन प्रकरणों का निस्तारण, मूल निवास 1950 की व्यवस्था तथा छूटे हुए आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर आंदोलनकारी लंबे समय से अपनी आवाज उठाते रहे हैं।
अब निगाहें 25 सितंबर को उत्तरकाशी जिलाधिकारी कार्यालय में होने वाले प्रदर्शन पर रहेंगी। प्रदर्शन के माध्यम से चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति सरकार और प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखेगी तथा लंबित मामलों के शीघ्र समाधान की मांग करेगी।
उत्तराखंड। राज्य आंदोलनकारियों की लंबित मांगों को लेकर केंद्रीय अभियान समिति के अध्यक्ष अवतार सिंह बिष्ट ने धामी सरकार से तत्काल सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण आंदोलनकारियों के लंबे संघर्ष, त्याग और बलिदान से हुआ है। ऐसे में राज्य निर्माण आंदोलन से जुड़े लोगों की जायज मांगों को लगातार लंबित रखना उचित नहीं है।
डॉ. विजेंद्र पोखरियाल
केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष
चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति, उत्तराखंड
उत्तरकाशी
