मिडिल ईस्ट में जारी बारूदी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के रिश्ते एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर आकर खड़े हो गए हैं. ईरानी मीडिया से आ रही बड़ी खबर के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने रविवार तड़के ईरानी हवाई क्षेत्र में घुसपैठ करने वाले एक अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है.

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इस सैन्य कार्रवाई के साथ ही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले सभी जहाजों को खुली धमकी दी है कि बिना इजाजत मूवमेंट करने पर अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें. यह तनाव ऐसे समय पर सामने आया है जब हाल ही में अमेरिका ने ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह पर हमला किया था और जवाब में तेहरान ने भी पलटवार किया था.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड

दुश्मनाना इरादे से घुसा था अमेरिकी ड्रोन

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, रविवार तड़के IRGC की निगरानी और वायु रक्षा प्रणालियों ने ईरानी सीमा के भीतर एक संदिग्ध ड्रोन को ट्रेस किया था. ईरान का दावा है कि यह अमेरिकी सेना का MQ-1 ड्रोन था जो दुश्मनाना कार्रवाई करने के इरादे से उनके हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ था. खतरे को भांपते हुए IRGC की वायु रक्षा इकाइयों ने अपनी उन्नत मिसाइल प्रणालियों को एक्टिव किया और ड्रोन पर अचूक निशाना साधकर उसे हवा में ही सफलतापूर्वक नेस्तनाबूद कर दिया. सरकारी समाचार एजेंसी ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि उनके जवानों ने US-जायोनी हमलावर दुश्मन के मानवरहित विमान को मार गिराया है.

ईरान ने जहाजों को दिया सख्त अल्टीमेटम

ड्रोन गिराने की इस सैन्य कार्रवाई के तुरंत बाद ईरान ने वैश्विक व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते ‘होर्मुज स्ट्रेट’ पर अपनी संप्रभुता का ढिंढोरा पीटना शुरू कर दिया है. खातम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय ने एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट का पूरा प्रबंधन ईरान के सशस्त्र बलों के पूर्ण अधिकार में है. ईरानी मिलिट्री कमान ने वाणिज्यिक और नौसैनिक, दोनों तरह के जहाजों को अल्टीमेटम दिया है कि वे केवल तय रूट से ही यात्रा करें और ‘IRGC नेवी’ से पहले अनुमति प्राप्त करें. ईरान ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होगी. साथ ही वहां तैनात अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक टुकड़ियों को भी आगाह किया गया है कि अगर उन्होंने किसी भी जहाज के आवागमन में बाधा डाली, तो ईरान तत्काल जवाबी हमला करेगा.

ट्रंप की नो टोल शर्त बनाम ईरान की $12 अरब की मांग

इस सैन्य टकराव के बीच परदे के पीछे चल रही कूटनीति भी पूरी तरह पटरी से उतरती दिख रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सामने बेहद सख्त शर्तें रख दी हैं. ट्रंप का कहना है कि किसी भी समझौते के लिए ईरान को ये शर्तें माननी होंगी:

1. ईरान कभी भी परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल नहीं करेगा.
2. तेहरान को समुद्री रास्ते से बारूदी सुरंगें हटानी होंगी.
3. होर्मुज स्ट्रेट से बिना किसी टोल (टैक्स) के जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल करनी होगी.
4. ईरान को अपने एनरिच्ड यूरेनियम के भंडार को पूरी तरह खत्म करना होगा.

ट्रंप ने कड़े लहजे में साफ कर दिया है कि जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक अगले आदेश तक, किसी भी पैसे का लेन-देन नहीं होगा.

ईरान ने दिया करारा जवाब

दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने ट्रंप की जरूरी वाली भाषा को सिरे से खारिज कर दिया. बाकाई ने तंज कसते हुए कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ने 47 साल पहले ही ऐसी धौंस वाली भाषा को अलविदा कह दिया था. ईरान की न्यूज एजेंसी के मुताबिक, तेहरान ने साफ किया है कि समझौते के मूल पाठ में ‘टोल-मुक्त’ पहुंच जैसी कोई बात ही नहीं है और परमाणु भंडार को लेकर ट्रंप के दावे बेबुनियाद हैं. ईरान ने अपनी जिद अड़ाते हुए कहा है कि किसी भी कूटनीतिक समझौते पर आगे बढ़ने से पहले अमेरिका को ईरान के रुके हुए 12 अरब डॉलर तत्काल रिलीज करने होंगे. साफ है कि दोनों महाशक्तियों के अड़ियल रुख के कारण इस क्षेत्र में तीसरे विश्व युद्ध का खतरा मंडराने लगा है.


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