कभी बैडमिंटन कोर्ट पर देश के लिए मेडल जीतने वाली एक खिलाड़ी ने शायद ही सोचा होगा कि एक गंभीर चोट उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल देगी. दरअसल, उत्तराखंड की कुहू गर्ग (Kuhoo Garg) के साथ कुछ ऐसा ही हुआ.

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घुटने में गंभीर चोट के बाद उन्हें अपना पसंदीदा खेल छोड़ना पड़ा. इसी मुश्किल दौर में उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की और करीब ढाई साल बाद पहली कोशिश में परीक्षा पास कर IPS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया. खास बात यह है कि जिस साल उनके पिता और उत्तराखंड के पूर्व DGP अशोक कुमार रिटायर हुए, उसी साल बेटी ने भी खाकी वर्दी की जिम्मेदारी संभाली.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

9 साल की उम्र से शुरू किया बैडमिंटन का सफर

कुहू गर्ग का जन्म 22 सितंबर 1998 को हुआ था. उन्होंने महज 9 साल की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था. पढ़ाई के साथ-साथ उनका पूरा ध्यान खेल पर था और धीरे-धीरे उन्होंने नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर अपनी पहचान बना ली. उनके स्पोर्ट्स करियर में 56 नेशनल और 19 इंटरनेशनल मेडल शामिल हैं. साल 2018 में उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी हिस्सा लिया और क्वार्टर फाइनल तक पहुंचीं.

वहीं, कुहू ने अपनी शुरुआती पढ़ाई देहरादून के सेंट थॉमस कॉलेज से की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से ग्रेजुएशन किया. खेल में आगे बढ़ने के साथ उनका करियर पूरी तरह बैडमिंटन की तरफ जाता दिख रहा था, लेकिन फिर एक चोट ने सब कुछ बदल दिया.

घुटने की चोट ने रोक दिया बैडमिंटन

बैडमिंटन खेलते हुए कुहू के घुटने में गंभीर चोट लगी. डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी और जांच में ACL से जुड़ी गंभीर समस्या सामने आई. चोट इतनी बड़ी थी कि उन्हें कॉम्पिटिटिव बैडमिंटन से दूरी बनानी पड़ी. जिस खेल को उन्होंने बचपन से अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाया था, उससे अचानक दूर होना उनके लिए आसान नहीं था.

हालांकि, कुहू ने इस मुश्किल समय को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. जब वह बेड रेस्ट पर थीं, उसी दौरान उनके मन में UPSC सिविल सेवा परीक्षा देने का विचार आया. इसके बाद उन्होंने अपनी ताकत एक नए लक्ष्य पर लगानी शुरू कर दी.

रोज 8 से 10 घंटे की पढ़ाई, पहली कोशिश में बनीं IPS

बैडमिंटन से दूरी बनाने के बाद कुहू ने UPSC की तैयारी शुरू की. उन्होंने अपनी तैयारी के दौरान रोजाना करीब 8 से 10 घंटे पढ़ाई की. लंबे समय तक पढ़ाई करना और चोट से उबरना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने लगातार अपनी तैयारी जारी रखी. आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई. UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2023 में कुहू गर्ग ने ऑल इंडिया रैंक 178 हासिल की. यह उनका पहला प्रयास था. इसी सफलता के बाद उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS के लिए हुआ.

पिता भी रहे हैं IPS अधिकारी

कुहू की सफलता की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उनके पिता अशोक कुमार 1989 बैच के IPS अधिकारी रहे हैं. वह उत्तराखंड पुलिस के Director General of Police यानी DGP के पद तक पहुंचे. कुहू के IPS बनने और उनके पिता के रिटायरमेंट का समय भी लगभग एक ही दौर में आया.

कुहू ने अपनी सफलता के बाद सोशल मीडिया पर पिता के साथ अपने इस खास जुड़ाव का जिक्र किया था. उनके मुताबिक, एक तरफ उनके पिता ने खाकी वर्दी छोड़ी और दूसरी तरफ उन्होंने उसी वर्दी को पहनने की जिम्मेदारी संभाली. उनके लिए यह किसी खास संयोग से कम नहीं था.

खुद को एक लक्ष्य पर रखने की आदत आई काम

कुहू ने अपनी कहानी साझा करते हुए बताया था कि कुछ साल पहले तक सिविल सर्विस उनके करियर प्लान का हिस्सा तक नहीं था. उस समय बैडमिंटन उनके जीवन का सबसे अहम हिस्सा था. लेकिन घुटने की चोट के बाद परिस्थितियां बदलीं और उन्होंने UPSC को अपना नया लक्ष्य बना लिया.

उनके लिए यह बदलाव आसान नहीं था. एक तरफ उन्हें उस खेल से दूर होना पड़ा, जिसे वह बचपन से खेलती आ रही थीं, वहीं दूसरी तरफ देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक की तैयारी शुरू करनी थी. लेकिन उन्होंने खुद को एक लक्ष्य पर केंद्रित रखा और लगातार मेहनत करती रहीं.

परिवार, डॉक्टर और दोस्तों को दिया सफलता का श्रेय

कुहू ने अपनी सफलता का श्रेय केवल अपनी मेहनत को नहीं दिया. उन्होंने अपने परिवार, डॉक्टरों, थेरेपिस्ट, सीनियर्स और दोस्तों का भी आभार जताया, जिन्होंने मुश्किल समय में उनका साथ दिया. खास तौर पर उन्होंने अपनी मां को याद किया, जिन्होंने हर मोड़ पर उन्हें हिम्मत दी.


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