देहरादून, 7 अक्टूबर। उत्तराखंड और जर्मनी के ब्रांडेनबर्ग राज्य के बीच शैक्षणिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और संस्थागत सहयोग को नई दिशा देने की पहल शुरू हो गई है। उत्तराखंड सचिवालय में बुधवार को उत्तराखंड–ब्रांडेनबर्ग संयुक्त घोषणा-पत्र (Joint Declaration of Intent-JDI) के तहत पहली हितधारक बैठक आयोजित हुई। बैठक में दोनों पक्षों के शिक्षाविदों, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड
बैठक की अध्यक्षता उत्तराखंड शासन के प्रमुख सचिव, तकनीकी शिक्षा डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, IAS ने की। बैठक में वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (VMSBUTU) की कुलपति प्रो. (डॉ.) तृप्ता ठाकुर, जर्मनी के ब्रांडेनबर्ग स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ पॉट्सडैम के प्रो. एक्सल ब्रोंस्टर्ट, IIT रुड़की के Sponsored Research & Industrial Consultancy के डीन श्री विवेक के. मलिक, जल विज्ञान विभाग के प्रो. अंकित अग्रवाल सहित उत्तराखंड के राज्य सरकार के विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे।
इस सहयोग के क्रियान्वयन के लिए VMSBUTU और यूनिवर्सिटी ऑफ पॉट्सडैम को प्रमुख संस्थान के रूप में जोड़ा गया है, जबकि IIT रुड़की ज्ञान साझेदार की भूमिका में रहेगा। बैठक में इस साझेदारी को केवल औपचारिक समझौते तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और संस्थानों के स्तर पर ठोस कार्यक्रमों में बदलने पर जोर दिया गया।
शिक्षा और शोध सहयोग को मिलेगी प्राथमिकता
प्रमुख सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा ने तकनीकी शिक्षा विभाग की प्राथमिकताओं को सामने रखते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब इसे प्रभावी संस्थागत साझेदारियों और ठोस कार्यक्रमों में बदला जाए। उन्होंने सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की ओर से आवश्यक सहयोग और समन्वय उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
VMSBUTU की कुलपति प्रो. (डॉ.) तृप्ता ठाकुर ने उत्तराखंड की शैक्षणिक और रणनीतिक क्षमताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इस साझेदारी से प्रदेश के विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थानों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए अवसर विकसित हो सकते हैं। बैठक में जर्मन भाषा शिक्षा, विद्यार्थी एवं शिक्षक विनिमय, संयुक्त डिग्री कार्यक्रम तथा अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक अनुभव को सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया।
विशेष रूप से राज्य के विश्वविद्यालयों में जर्मन भाषा के पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इससे विद्यार्थियों को जर्मनी के विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और उद्योग जगत के साथ संवाद एवं उच्च शिक्षा के अवसरों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
विद्यार्थी-शिक्षक विनिमय और संयुक्त डिग्री पर जोर
IIT रुड़की के डीन विवेक के. मलिक ने दीर्घकालिक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के लिए विद्यार्थियों, शिक्षकों और अकादमिक स्तर पर नियमित संवाद एवं विनिमय को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने संयुक्त कौशल विकास कार्यक्रमों के साथ विद्यार्थियों की रोजगारपरक क्षमता बढ़ाने तथा स्टार्ट-अप और MSME सहयोग की संभावनाओं पर भी जोर दिया।
बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि दोनों पक्षों के संस्थानों के बीच विद्यार्थी और शिक्षक विनिमय को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा सकता है। इसके साथ ही संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, संयुक्त अथवा द्वैध डिग्री कार्यक्रमों और कौशल आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव देने की दिशा में भी कार्य किया जा सकता है।
प्रो. अंकित अग्रवाल ने सहयोग को तत्काल उपलब्धियों के बजाय 5 से 10 वर्ष के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने IIT रुड़की और ब्रांडेनबर्ग के बीच पहले से विकसित संस्थागत संपर्कों का उल्लेख करते हुए अनुसंधान और शैक्षणिक सहयोग को और व्यापक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
हिमालयी क्षेत्र से लेकर AI तक सहयोग की संभावनाएं
बैठक में सहयोग के संभावित क्षेत्रों की व्यापक रूपरेखा भी सामने आई। इनमें स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन एवं हिमालयी लचीलापन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल प्रौद्योगिकी, पर्यटन एवं आतिथ्य, जीवन विज्ञान, आपदा प्रबंधन, कृषि, कौशल विकास और नवाचार प्रमुख हैं।
उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य के लिए जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन और पर्वतीय विज्ञान महत्वपूर्ण विषय हैं। ऐसे क्षेत्रों में जर्मनी के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के साथ संयुक्त शोध परियोजनाएं प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय शोध नेटवर्क से जोड़ सकती हैं।
इसी तरह AI, डेटा साइंस और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में सहयोग से प्रदेश के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को आधुनिक तकनीकी ज्ञान तथा अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता हासिल करने के अवसर मिल सकते हैं।
कृषि और पर्वतीय विज्ञान में भी साझेदारी
बैठक में गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमाऊं विश्वविद्यालय और श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय सहित राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के लिए सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
डिजिटल कृषि, पर्वतीय विज्ञान, जलवायु अध्ययन, AI, डेटा साइंस और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में विश्वविद्यालयों के बीच संयुक्त कार्यक्रम विकसित किए जाने की संभावना सामने आई। कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप नए शोध और प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित किए जा सकते हैं।
युवाओं के लिए नए अवसरों पर ब्रांडेनबर्ग का जोर
यूनिवर्सिटी ऑफ पॉट्सडैम के प्रो. एक्सल ब्रोंस्टर्ट ने अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने उत्तराखंड और ब्रांडेनबर्ग की पारस्परिक एवं पूरक क्षमताओं का उल्लेख करते हुए सार्वजनिक विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच व्यापक सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित किया।
उनके अनुसार शैक्षणिक संस्थानों के बीच संपर्क बढ़ने से विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए नए अनुभव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीखने के अवसर विकसित हो सकते हैं। इससे दोनों क्षेत्रों के संस्थानों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान भी मजबूत होगा।
तीन प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित चर्चा
बैठक में सहयोग के तीन प्रमुख आधारों पर विशेष चर्चा हुई—विद्यार्थी एवं शिक्षक विनिमय, संयुक्त अनुसंधान तथा संयुक्त/द्वैध डिग्री कार्यक्रम। इन पहलों का व्यापक उद्देश्य केवल संस्थानों को जोड़ना नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ना, ज्ञान का सह-सृजन करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य शैक्षणिक योग्यताओं के अवसर विकसित करना है।
इसके अलावा संयुक्त कौशल विकास, स्टार्ट-अप और MSME सहयोग को भी भविष्य की साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया। इससे शिक्षा और उद्योग के बीच संपर्क मजबूत करने तथा विद्यार्थियों को रोजगार एवं उद्यमिता के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है।
टास्क फोर्स के गठन पर भी चर्चा
JDI के तहत प्रस्तावित सहयोग को धरातल पर उतारने के लिए निरंतर हितधारक परामर्श, अंतर-विभागीय समन्वय और एक केंद्रित टास्क फोर्स के गठन पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य विभिन्न विभागों, विश्वविद्यालयों और संबंधित संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित कर प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना है।
राज्य के विश्वविद्यालयों में उभरते क्षेत्रों से जुड़े विद्यार्थी एवं शिक्षक विनिमय कार्यक्रम शुरू करना भी संभावित कार्ययोजना में शामिल रहा। इससे उत्तराखंड के उच्च शिक्षा संस्थानों को यूरोपीय अकादमिक नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार हो सकता है।
शिक्षा से अंतरराष्ट्रीय साझेदारी तक
उत्तराखंड–ब्रांडेनबर्ग JDI की पहली हितधारक बैठक को प्रदेश में उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को अंतरराष्ट्रीय स्तर से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि प्रस्तावित योजनाएं संस्थागत स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो उत्तराखंड के विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को जर्मनी के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के साथ प्रत्यक्ष संवाद तथा विनिमय के नए अवसर मिल सकते हैं।
यह साझेदारी आने वाले वर्षों में शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक अवसरों का एक व्यापक नेटवर्क विकसित करने की दिशा में आधार बन सकती है। बैठक में सामने आई योजनाओं से स्पष्ट है कि उत्तराखंड–ब्रांडेनबर्ग सहयोग को दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है, जिसमें राज्य के विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और युवाओं को इसका प्रमुख लाभार्थी बनाने पर जोर रहेगा।
