उज्ज्वला के मुफ्त सिलेंडर, महिलाओं को ₹2,500 और किसानों के लिए आर्थिक सहायता की योजनाओं से दूसरे राज्यों में राहत की पहल; रुद्रपुर में ओलावृष्टि से नुकसान के बाद उत्तराखंड सरकार की जवाबदेही पर सवाल
रुद्रपुर। देश के अलग-अलग राज्यों में सरकारें महिलाओं, किसानों, गरीब परिवारों और जरूरतमंद लोगों को आर्थिक राहत देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही हैं। उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को दो मुफ्त एलपीजी सिलेंडर रिफिल देने की तैयारी है, झारखंड में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत महिलाओं के खातों में ₹2,500 भेजे जा रहे हैं और किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से आर्थिक सहायता दी जा रही है। वहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने का काम भी जारी है।
इन योजनाओं के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार के सामने भी एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या प्रदेश की जरूरतों के अनुरूप महिलाओं, किसानों, गरीब परिवारों और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों के लिए पर्याप्त राहत योजनाएं बनाई जा रही हैं?
हाल ही में रुद्रपुर सहित उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में आंधी-तूफान और भारी ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। किसानों की मेहनत पर मौसम की मार पड़ी है। ऐसे में सवाल केवल सरकारी योजनाओं की घोषणा का नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में प्रभावित परिवारों तक वास्तविक आर्थिक सहायता पहुंचाने का है।
उत्तर प्रदेश में उज्ज्वला लाभार्थियों को दो मुफ्त सिलेंडर
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के पात्र लाभार्थियों को दो मुफ्त एलपीजी सिलेंडर रिफिल उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी देने की जानकारी दी है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पहला चरण अक्टूबर से दिसंबर 2026 और दूसरा चरण जनवरी से मार्च 2027 के बीच रखा गया है। इस योजना पर राज्य सरकार का अनुमानित खर्च लगभग ₹2,142.78 करोड़ बताया गया है।
उज्ज्वला योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों की महिलाओं को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना है। लकड़ी और उपलों के चूल्हे से निकलने वाले धुएं से राहत, समय की बचत और रसोई के काम में सुविधा इसके प्रमुख लाभ हैं। केंद्र सरकार की ओर से पात्र उज्ज्वला लाभार्थियों को निर्धारित शर्तों के तहत प्रति 14.2 किलोग्राम सिलेंडर ₹300 की लक्षित सब्सिडी भी दी जाती रही है।
अब सवाल उत्तराखंड सरकार से है। क्या राज्य सरकार गरीब महिलाओं और उज्ज्वला लाभार्थियों को त्योहारों पर अतिरिक्त राहत देने के विकल्प पर विचार नहीं कर सकती? यदि दूसरे राज्य अपने संसाधनों से ऐसी योजनाएं चला सकते हैं, तो उत्तराखंड में भी पात्र परिवारों की जरूरतों का आकलन कर ठोस पहल क्यों नहीं होनी चाहिए?
झारखंड में महिलाओं के खातों में ₹2,500
झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत सितंबर 2026 की सम्मान राशि रांची, गुमला और धनबाद जिलों की लाखों पात्र महिलाओं के बैंक खातों में हस्तांतरित किए जाने की जानकारी दी गई है। प्रत्येक लाभार्थी को ₹2,500 की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से भेजी गई।
रांची में 3,93,994 महिलाओं को लगभग ₹98.50 करोड़ और धनबाद में 3,46,365 महिलाओं को लगभग ₹86.59 करोड़ हस्तांतरित किए जाने के आंकड़े सामने आए हैं। गुमला में भी 1.52 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ पहुंचाने की जानकारी दी गई है।
इस तरह की योजनाएं परिवारों को घरेलू खर्च, बच्चों की जरूरतों और त्योहारों की खरीदारी में मदद दे सकती हैं। उत्तराखंड में भी महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार को प्रदेश की आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप महिला सहायता योजनाओं की समीक्षा कर यह देखना चाहिए कि जरूरतमंद महिलाओं को नियमित और प्रभावी सहायता किस प्रकार दी जा सकती है।
रामपुर में आयुष्मान कार्ड बनाने में उपलब्धि
उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पिछले एक वर्ष में 1.79 लाख आयुष्मान कार्ड बनाए जाने की जानकारी दी गई है। इस उपलब्धि के लिए राज्य स्तरीय कार्यक्रम में जिले को सम्मानित किए जाने का समाचार सामने आया है।
यह उदाहरण बताता है कि सरकारी योजनाओं की सफलता केवल बजट बनाने से नहीं, बल्कि पात्र लोगों तक लाभ पहुंचाने के लिए प्रशासनिक सक्रियता और विभागों के समन्वय से भी तय होती है।
उत्तराखंड में भी स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं के दायरे, पात्र परिवारों की पहचान और जरूरतमंद लोगों को समय पर लाभ मिलने की नियमित समीक्षा होनी चाहिए। गरीब परिवार गंभीर बीमारी के इलाज के लिए कर्ज लेने को मजबूर न हों, यह किसी भी संवेदनशील सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
आवास योजना में निर्माण और भुगतान की निगरानी जरूरी
बिहार के रोसड़ा नगर परिषद क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 2015-16 से 2025-26 तक 1,369 आवास स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी गई है। इनमें 914 मकानों का निर्माण पूरा हुआ। लाभार्थियों को विभिन्न चरणों में किस्तों का भुगतान भी किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के अंतर्गत भी नए आवासों पर काम जारी बताया गया है।
उत्तराखंड में भी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के ऐसे परिवारों की पहचान जरूरी है, जो अब तक पक्के मकान की सुविधा से वंचित हैं। रुद्रपुर और आसपास तेजी से बढ़ती आबादी के बीच गरीब एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए आवास, स्वच्छता, पेयजल और बुनियादी सुविधाएं महत्वपूर्ण सवाल हैं। सरकार को योजनाओं की घोषणाओं के साथ यह भी बताना चाहिए कि कितने पात्र परिवारों को वास्तव में मकान मिला और कितने अब भी प्रतीक्षा कर रहे हैं।
ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को राहत कब?
रुद्रपुर और उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में हालिया आंधी-तूफान और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान ने किसानों की चिंता बढ़ाई है। खेती में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और अन्य संसाधनों पर खर्च करने के बाद यदि तैयार फसल मौसम की मार से खराब हो जाए, तो किसान के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है।
ऐसे समय में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि प्रभावित क्षेत्रों में शीघ्र सर्वे कराया जाए, नुकसान का वास्तविक आकलन हो और पात्र किसानों को फसल बीमा, आपदा राहत या अन्य लागू प्रावधानों के तहत सहायता उपलब्ध कराई जाए। मुआवजे की प्रक्रिया पारदर्शी हो और किसानों को कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।
मुख्यमंत्री धामी को अधिकारियों को निर्देश देकर नुकसान का आकलन, राहत की पात्रता और भुगतान की समयसीमा सार्वजनिक करने पर विचार करना चाहिए। किसानों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समय पर मदद चाहिए।
चुनावी राजनीति से ऊपर उठकर जनता की जरूरतों पर ध्यान दे सरकार
उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ना स्वाभाविक है। लेकिन जनता के लिए असली कसौटी चुनावी भाषण, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप या प्रचार नहीं, बल्कि रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान है।
रुद्रपुर में सड़क, जलभराव, रोजगार, महंगाई, स्वास्थ्य सुविधाओं और किसानों की समस्याओं के साथ सामाजिक सौहार्द भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। हिंदू-मुस्लिम सहित सभी समुदायों के नागरिकों को बिना भेदभाव सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। धार्मिक पहचान के आधार पर समाज को बांटने के बजाय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता नागरिक सुविधाएं, कानून-व्यवस्था, रोजगार और आर्थिक सुरक्षा होनी चाहिए।
सवाल यह भी है कि क्या रुद्रपुर के जनप्रतिनिधि स्थानीय समस्याओं पर उतनी ही गंभीरता से आवाज उठा रहे हैं, जितनी गंभीरता से राजनीतिक मुद्दों पर बयान दिए जाते हैं? क्या प्रभावित किसानों, गरीब महिलाओं और आवास की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों की समस्याओं को प्राथमिकता मिल रही है?
धामी सरकार के सामने पांच अहम सवाल
क्या उत्तराखंड में पात्र उज्ज्वला लाभार्थियों को त्योहारों पर अतिरिक्त राहत देने की संभावना पर विचार होगा?
क्या जरूरतमंद महिलाओं के लिए प्रभावी आर्थिक सहायता योजनाओं की समीक्षा की जाएगी?
रुद्रपुर और मैदानी क्षेत्रों में ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के नुकसान का आकलन और राहत कब तक सुनिश्चित होगी?
प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र लाभार्थियों को मकान और किस्तों का लाभ समय पर मिल रहा है या नहीं?
क्या स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की प्रगति सार्वजनिक कर जनता को जवाबदेह प्रशासन दिया जाएगा?
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की जनसरोकारों पर नजर
उत्तर प्रदेश, झारखंड और अन्य राज्यों की योजनाओं के उदाहरण उत्तराखंड सरकार के लिए तुलना का अवसर हैं। हर राज्य की आर्थिक स्थिति, योजनाओं की पात्रता और प्रशासनिक व्यवस्था अलग हो सकती है, इसलिए किसी योजना की हूबहू नकल ही समाधान नहीं है। जरूरत यह है कि सफल पहलों से सीख लेकर उत्तराखंड की परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर योजनाएं बनाई जाएं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार को चाहिए कि वह किसानों के नुकसान, महिलाओं की आर्थिक जरूरतों, गरीब परिवारों के आवास और आम जनता की बुनियादी समस्याओं को प्राथमिकता दे। लोकतंत्र में सरकार की असली उपलब्धि यही है कि संकट के समय नागरिकों को राहत मिले और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
जनता को चुनाव से पहले वादों की नहीं, जमीन पर दिखाई देने वाले काम की जरूरत है। रुद्रपुर के किसान को फसल का मुआवजा, महिला को आर्थिक सुरक्षा और गरीब परिवार को सम्मानजनक आवास मिले—यही विकास की वास्तविक कसौटी होनी चाहिए।
अवतार सिंह बिष्ट | अवतार सिंह बिष्ट हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर
उत्तराखंड, देश-दुनिया की खबरों पर नजर।
दूसरे राज्यों में महिलाओं-किसानों को राहत, उत्तराखंड में ओलावृष्टि से प्रभावित परिवारों को इंतजार क्यों? धामी सरकार आईना देखे!हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट की जनसरोकारों पर नजर
